Uttarakhand ‘मंत्री की कुर्सी’ पर सियासी बवाल! | Ganesh Joshi | Vigilancecourt | Uttarakhand News

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दोस्तों, क्या उत्तराखंड में कानून सबके लिए बराबर है? या फिर सत्ता में बैठे लोगों के लिए नियम अलग हो जाते हैं? कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता ने गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि FIR इसलिए दर्ज नहीं हुई क्योंकि मामला एक कैबिनेट मंत्री से जुड़ा है, अगर ऐसा नहीं है तो शिकायत पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?क्या जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है?और सबसे बड़ा सवाल। क्या कानून की नजर में आम नागरिक और मंत्री, दोनों के लिए एक ही पैमाना है? दोस्तों, अगर किसी आम कर्मचारी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगे तो कार्रवाई की रफ्तार तेज दिखाई देती है। लेकिन जब आरोप एक कैबिनेट मंत्री पर हों, तो क्या नियम बदल जाते हैं? उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से जुड़े आय से अधिक संपत्ति के मामले में शिकायतकर्ता का दावा है कि दो साल तक विजिलेंस ने कार्रवाई नहीं की क्योंकि शासन से अनुमति नहीं मिली। अब विशेष अदालत ने मंत्री को नोटिस जारी कर उनका पक्ष रखने को कहा है, तो यहां मंत्री गणेश जोशी को बचाने की पूरी कोशिश की गई। दोस्तो उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी एक बार फिर चर्चा में हैं। मामला आय से अधिक संपत्ति के आरोपों का है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने मार्च 2024 में विजिलेंस विभाग को दस्तावेजों के साथ शिकायत दी थी और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। दोस्तो शिकायतकर्ता पंकज क्षेत्री का कहना है कि अप्रैल 2024 में उन्होंने दोबारा शिकायत की। उनका दावा है कि विजिलेंस की ओर से उन्हें बताया गया कि मामला कैबिनेट मंत्री से जुड़ा होने के कारण शासन की स्वीकृति आवश्यक है और स्वीकृति नहीं मिलने से मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सका।

दोस्तो शिकायतकर्ता के अनुसार, जब विजिलेंस स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने विशेष विजिलेंस अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत में बीएनएसएस की धारा 173 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(B) और 13(2) के तहत मामला दायर किया। दोस्तो इसके बाद अदालत ने विजिलेंस से रिपोर्ट मांगी गई। दोस्तो समय पर स्वीकृति मिल जाती और जांच आगे बढ़ती, तो दो साल का समय बर्बाद नहीं होता। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई बताते हुए दावा किया कि अदालत से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। फिलहाल इस मामले में विशेष अदालत ने अगली सुनवाई 3 सितंबर के लिए तय की है और मंत्री गणेश जोशी को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता लगातार आरोप लगा रहे हैं कि कार्रवाई में देरी हुई। इन आरोपों पर मंत्री गणेश जोशी या राज्य सरकार का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। अब निगाहें 3 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में क्या जवाब दिया जाएगा? क्या आरोप साबित होंगे या खारिज? इसका फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। फिलहाल मामला अदालत के विचाराधीन है।