दोस्तो दयारा बुग्याल से लापता बबीता पांडे की तलाश के बीच अब कुछ ऐसी चर्चाएं सामने आ रही हैं, जिन्होंने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि जंगलों में हाल के दिनों में डरावनी आवाजें सुनाई दी थीं और कुछ स्थानों पर खून जैसे निशान भी दिखाई दिए थे। क्या ये महज संयोग है, या फिर बबीता की गुमशुदगी से जुड़ा कोई अहम संकेत? क्या जंगल में मौजूद इन कथित निशानों का इस मामले से कोई संबंध है, या फिर यह सिर्फ कयासबाजी है? मै आपको बताउंगा क्या कहते हैं दयारा बुग्याल को लेकर स्थानीय लोग और कैसे बबीता के गायब होने से जोड़ा जा रहा है। वैसे दोस्तो बबीता पांडे के दयारा बुग्याल ट्रैक से गायब होने को लेकर कोई भी सटीक जानकारी नहीं दे पा रहा है कि आखिर बबीता पांडे के साथ क्या हुआ है लेकिन दोस्तो कुछ बातें जो चर्चा का हिस्सा हैं उसमें एक दो बाते बेहद चौकाने वाली लगती हैं, उन्हीं बातों को लेकर मै आज हाजिर हूं। बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और अपनी राय बना पाएंगे, दोस्तो सबसे पहले मै आपको ये बता दूं कि उत्तराखंड के प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थल दयारा बुग्याल क्षेत्र में 29 तारीख की रात बेस कैंप गोई से लापता हुई नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली बबीता पांडे का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। कई दिनों से लगातार चलाए जा रहे खोज एवं बचाव अभियान के बावजूद राहत टीमों को महिला के संबंध में कोई महत्वपूर्ण सुराग नहीं मिला है।
दोस्तो अब तक पुलिस, NDRF, SDRF, ITBP, वन विभाग, नेहरु पर्वतारोहण संस्थान, आपदा प्रबन्ध की क्यूआरटी, स्वान दल, एसओजी, स्थानीय लोग और गाइड की 3 टीमों का गठन किया गया है. इनमें कुल 120 से अधिक सदस्य शामिल हैं। ये टीमें तीन अलग-अलग रास्तों से सर्च ऑपरेशन को अंजाम दे रही हैं। इसके साथ ही दोस्तो 3 ड्रोन टीम को भी सर्चिंग में लगाया गया है। जिनके द्वारा विभिन्न क्षेत्र व अलग-अलग दिशाओं में ट्रेक मार्गों, जंगलों, खाइयों, गदेरों, झाड़ियों और अन्य संभावित स्थानों पर सघन कॉम्बिंग व तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन दोस्तो इस अब तक के सर्च ऑपरेशन में कुछ खास तो मिला नहीं पर इतना जरूर है गांव वालों की चौंकाने वाली बातें बबीता पांडे के गायब होने को और पेचिंदा बना रही हैं। दोस्तो उन बातों के बारे में चर्चा करूं उससे पहले आपको ये भी बता दूं कि प्रशासन द्वारा रविवार को हेलीकॉप्टर की मदद से भी हवाई खोज अभियान संचालित किया गया था ताकि दयारा बुग्याल और आसपास के दुर्गम इलाकों में किसी भी संभावित संकेत को तलाशा जा सके, लेकिन कुछ भी हाथ नहीं लगा। दोस्तो इस बीच स्थानीय ग्रामीणों के बीच एक और संभावना को लेकर चर्चा हो रही है। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि हाल के दिनों में दयारा बुग्याल से सटे जंगलों में दो भालुओं के आपसी संघर्ष जैसी तेज आवाजें सुनाई दी थीं। साथ ही कुछ जगहों पर खू’न जैसे निशान दिखाई देने की भी बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्थानीय लोग भी इसे बबीता पांडे के लापता होने की घटना से सीधे तौर पर जोड़ने से बच रहे हैं, लेकिन इस बात से इनकार भी कोई नहीं करता है कि दयारा बुग्याल के इन बेहद खूबसूरत जंगलों में भालूं नहीं हैं ये दोस्तो इस लिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
वैसे दोस्तो स्थानीय लोग कहतेहैं कि उन्होंने अपने जीवन में इस तरह का रहस्यमय मामला कभी नहीं देखा। साथ ही कुछ लोग इस बात का दावा कर रहे हैं कि सर्च ऑपरेशन के दौरान घटनास्थल से लगभग 600 मीटर दूर भालुओं के आपसी संघर्ष के संकेत मिले थे। दोस्तो स्थानीय लोगों के अनुसार यह समय भालुओं के प्रजनन का होता है, जिसके कारण मादा भालू अधिक आक्रामक हो सकती हैं, हालांकि खोज टीमों को घटनास्थल पर किसी मानव संघर्ष या बबीता से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं मिला है और दोस्तो इन दावों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे सवाल बढ़ते जा रहे हैं। आखिर बबीता पांडे कहां हैं? और क्या दयारा के जंगलों में छिपा है इस रहस्य का कोई अहम सुराग? ग्रामीणों और स्थानीय जानकारों के बीच यह संभावना भी चर्चा में है कि बबीता ऊंचाई वाले इलाकों की ओर जाने के बजाय रास्ता भटककर निचले क्षेत्रों की तरफ निकल गई हों। कुछ बुजुर्गों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में कई बार व्यक्ति अनजाने में अपेक्षित मार्ग से दूर निकल जाता है, जिससे तलाश और मुश्किल हो जाती है। दोस्तो स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों एक पुराने मामले का भी जिक्र किया, जिसमें वर्षों पहले एक पालतू बैल इलाके से गायब हो गया था और उसका कभी कोई पता नहीं चल पाया। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं की तुलना सीधे इस मामले से नहीं की जा सकती। ड्रोन, हेलीकॉप्टर, खोजी दलों और सैकड़ों जवानों की लगातार मेहनत के बावजूद अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है। इससे यह मामला और भी रहस्यमय बनता जा रहा है। दोस्तो जैसे-जैसे समय बीत रहा है, लोगों के मन में सवाल और गहरे होते जा रहे हैं। क्या बबीता किसी दुर्घटना का शिकार हुईं? क्या वह रास्ता भटक गईं? या फिर इस घटना के पीछे कोई और वजह है? इन सभी सवालों का जवाब फिलहाल जांच और खोज अभियान के नतीजों पर निर्भर है।