आधी रात को स्ट्रांग रूम पर धावा!| Kichha | Raj Kumar Thukral | Rajesh Pratap | Uttarakhand News

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क्या सच में बदल दी गईं 6 मतपेटियां?किच्छा चुनाव के ड्रामे में ठुकराल की एंट्री!पुलिस से भिड़े प्रत्याशी और आधी रात स्ट्रांग रूम पर ऐसा बवाल,जिसका वीडियो देखकर आप भी रह जाएंगे हैरान!आखिर क्या हुआ था स्ट्रांग रूम के अंदर? देखिए किच्छा चुनाव का पूरा हाई-वोल्टेज क्लेश! और देहरादून से क्या आया बयान बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो किच्छा नगर पालिका चुनाव का सस्पेंस अब उस लेवल पर पहुंच चुका है जहां बड़े-बड़े वेब सीरीज के राइटर्स भी हाथ खड़े कर दें! वोटिंग खत्म, लेकिन असली पिक्चर तो आधी रात को शुरू हुई! जगह— किच्छा का स्ट्रॉन्गरूम, वक्त— मंगलवार की देर रात। और सीन क्या था? पुलिस और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच ऐसी तीखी नोकझोंक कि पुलिस को उन्हें जबरन परिसर से बाहर ले जाना पड़ा! कांग्रेस प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह का सीधा और गंभीर आरोप है कि प्रशासन की मिलीभगत से 6 मतपेटियों को बदलने का खेल चल रहा है ताकि बीजेपी को फायदा पहुंचाया जा सके। और इस पूरे ड्रामे में तड़का लगाने पहुंचे रुद्रपुर के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, जिन्होंने आकर आग में घी डालने का काम कर दिया! आज की जेनजी (GenZ) पीढ़ी इसे देखकर सिर्फ एक ही मीम याद करेगी— ‘ये क्या चल रहा है भाई?!’ दोस्तो क्या सच में ये आरोप जो लगाए जा रहे है। ये उत्तराखंड की हिंसक होती राजनीति का मतलब है। दोस्तो वोटिंग खत्म होने के बाद जनता को लगा कि कहानी खत्म हो गई, लेकिन किच्छा में तो क्लाइमेक्स आना बाकी था! मंगलवार की देर रात किच्छा का स्ट्रॉन्गरूम एक अखाड़े में तब्दील हो गया।

कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष पद के प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह सीधे पुलिस और प्रशासन से भिड़ गए। विजुअल्स गवाह हैं कि कैसे पुलिस उन्हें जबरन स्ट्रॉन्गरूम परिसर से बाहर ले जा रही है। माहौल में गर्मी इतनी थी कि पारा सीधा सातवें आसमान पर पहुंच गया! दोस्तो आरोप हल्के-फुल्के नहीं हैं, बल्कि सीधे लोकतंत्र की आत्मा पर चोट करने वाले हैं! राजेश प्रताप सिंह का दावा है कि प्रशासन और पुलिस की मिलीभगत से स्ट्रॉन्गरूम में रखी 6 मतपेटियों को बदलने की साजिश रची जा रही है, ताकि बीजेपी प्रत्याशी की नैया पार लगाई जा सके। अब आज का यूथ सोचेगा— ‘बॉस, अगर इलेक्ट्रॉनिक या मतपेटियों के दौर में भी आधी रात को पेटियां बदलने का डर सता रहा है, तो सिस्टम पर भरोसा कैसे टिकेगा?’ हालांकि, इन धांधली के आरोपों की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सियासत में धुआं तभी उठता है जब आग लगी हो! और जब इतना बड़ा क्लेश हो, तो रुद्रपुर के फायरब्रांड नेता और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल कैसे पीछे रह सकते थे! देर रात ठुकराल साहब की भी एंट्री स्ट्रॉन्गरूम के बाहर होती है। उन्होंने भी सुर में सुर मिलाते हुए मतपेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए और कहा कि इन संगीन आरोपों की तुरंत जांच होनी चाहिए। रात के 11 से 12 बजे तक किच्छा में जो हाई-वोल्टेज गहमागहमी रही, उसने प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए।

दोस्तो अब बात करते हैं आज की (GenZ) पीढ़ी के नजरिए की। युवाओं के चश्मे की। दोस्तो आज का यूथ इस आधी रात के ड्रामे को किस तरह देख रहा है? यूथ के लिए यह ‘प्योर इनसिक्योरिटी और ट्रस्ट इश्यूज’ (Trust Issues) का मामला है। एक तरफ जहां डिजिटल इंडिया की बातें होती हैं, वहीं दूसरी तरफ मतपेटियों को बचाने के लिए नेताओं को रात-रात भर जागकर चौकीदारी करनी पड़ रही है। पुलिस का प्रत्याशियों को खींचकर बाहर करना और नेताओं का विक्टिम कार्ड खेलना— यह आज के युवाओं के लिए किसी थ्रिलर शो से कम नहीं है। युवा यह सवाल पूछ रहा है कि क्या वाकई चुनाव निष्पक्ष हो रहे हैं या फिर यह सिर्फ एक स्क्रिप्टेड ड्रामा है? वहीं दोस्तो कांग्रेस प्रत्याशी ने इस पूरे मामले की शिकायत सीधे राज्य निर्वाचन आयोग से की है और मतपेटियों की सुरक्षा के लिए थ्री-लेयर सिक्योरिटी और सीसीटीवी (CCTV) की कड़ी निगरानी की मांग की है। मौके पर फिलहाल भारी पुलिस बल तैनात है और माहौल को शांत कराया गया है। लेकिन आधी रात को जो अविश्वास की पेटी खुली है, उसकी गूंज नतीजों के आने तक सुनाई देगी। तो दोस्तों, दोस्तो किच्छा का यह स्ट्रॉन्गरूम क्लेश साफ दिखाता है कि लोकल चुनाव में साख दांव पर लगी हो तो नेता किसी भी हद तक जा सकते हैं। आधी रात का यह सस्पेंस अब क्या मोड़ लेगा, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन एक बात साफ है— आज का युवा इस पूरी राजनीति को बहुत बारीकी से देख रहा है और समझ रहा है कि सत्ता के खेल में शह और मात के मोहरे कैसे चले जाते हैं। आपको क्या लगता है? क्या वाकई मतपेटियों के साथ छेड़छाड़ की आशंका सच है या यह सिर्फ हार के डर से बनाया गया एक सियासी बहाना? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें, वीडियो को लाइक और शेयर करें।