Tehri बुरे फंसे BJP सरकार के मंत्री?! | Subodh Uiyal | Medical College | CM Dhami | Uttarakhand News

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दोस्तों, अस्पताल नहीं मेडिकल कॉलेज चाहिए! और जब सरकार जवाब नहीं दे पाई तो बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सड़कों पर उतर आए। टिहरी में अब सवाल सिर्फ मेडिकल कॉलेज का नहीं, भाजपा के दो बड़े नेताओं की सियासी खींचतान का भी है। आखिर मेडिकल कॉलेज नई टिहरी में बनेगा या कहीं और ले जाया जाएगा। क्या जनता के भविष्य से राजनीति खेली जा रही है? और सबसे बड़ा सवाल अगर मेडिकल कॉलेज का फैसला हो चुका था, तो फिर आज सड़क पर हजारों लोग क्यों हैं? टिहरी की सबसे बड़ी सियासी लड़ाई मेरी इस रिपोर्ट में। दोस्तो नई टिहरी की सड़कें जनआक्रोश की गवाह बन गईं, हाथों में तख्तियां बच्चों के साथ महिलाएं, व्यापारी, छात्र, और आम जनता, सब की एक ही मांग आज चाहिए अभी चाहिए नई टिहरी में मेडिकल कॉलेज चाहिए। दोस्तो टिहरी मेडिकल संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले हजारों लोग सुमन पार्क से जिलाधिकारी कार्यालय तक रैली निकालते हुए पहुंचे और मेडिकल कॉलेज को नई टिहरी में ही स्थापित करने की मांग उठाई। सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, नई टिहरी, बौराड़ी और बीपुरम के बाजार भी बंद रहे। जनता के सवालों से पूरा का पूरा सिस्टम घिरा हुआ दिखाई दिया। दरअसल पूरा विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब नरेंद्रनगर के विधायक और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने गजा क्षेत्र के पिफल्टी में मेडिकल कॉलेज के लिए भूमि चयन और डीपीआर भेजने की बात कही और इसके बाद टिहरी विधानसभा के विधायक किशोर उपाध्याय ने मेडिकल कॉलेज को नई टिहरी से बाहर ले जाने का विरोध शुरू कर दिया और उन्होंने चेतावनी के साथ तमाम तंज भी कसे। यानी, दोस्तो अब मेडिकल कॉलेज सिर्फ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि बीजेपी के भीतर सियासी टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है और कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है और विपक्षी तेवरों से लगता है कि बुरे फंस गए उत्तराखंड सरकार में मंत्री सुबोध उनियाल।

दोस्तो सियासत के साथ ही संघर्ष समिति का कहना है कि मेडिकल कॉलेज वर्षों पहले नई टिहरी के लिए प्रस्तावित हुआ था। अब अगर इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने की कोशिश हुई, तो आंदोलन और तेज होगा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजते हुए साफ चेतावनी दी कि जनता अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगी। सवाल और सियासी समर में कुदने को नेता तैयार हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है। अगर मेडिकल कॉलेज नई टिहरी के लिए प्रस्तावित था तो आज तक बना क्यों नहीं? अगर दूसरी जगह ज्यादा उपयुक्त है, तो जनता को भरोसे में क्यों नहीं लिया गया? और अगर बीजेपी के दो नेताओं के अलग-अलग दावे हैं तो आखिर सरकार की आधिकारिक नीति क्या है? कहीं ऐसा तो नहीं कि मेडिकल कॉलेज का सपना। सियासत की भेंट चढ़ रहा है? फिलहाल टिहरी की जनता साफ कह रही है “मेडिकल कॉलेज चाहिए राजनीति नहीं।” अब निगाहें सरकार पर हैं। क्या सरकार इस विवाद को खत्म करेगी या फिर मेडिकल कॉलेज की लड़ाई चुनावी अखाड़ा बन जाएगी? दोस्तो टिहरी की जनता सड़क पर है, बाजार बंद हैं, और सवाल सरकार से है—मेडिकल कॉलेज आखिर बनेगा कहाँ? या फिर यह मुद्दा चुनाव तक सिर्फ सियासी बयानबाज़ी का हिस्सा बना रहेगा?