मानसून का हर नया दिन, उत्तराखंड के लिए नई चुनौती लेकर आ रहा है। बारिश थमने का नाम नहीं ले रही। पहाड़ लगातार टूट रहे हैं और सड़कें मलबे में दबती जा रही हैं। प्रदेश के 8 जिले बाढ़ के खतरे की जद में हैं, जबकि 104 सड़कें बंद होने से हालात गंभीर बने हुए हैं। आखिर मौसम का अगला अपडेट क्या कहता है? दोस्तो पहाड़ दरक रहे हैं, नदियां उफान पर हैं और रास्ते एक-एक कर बंद होते जा रहे हैं। उत्तराखंड में मानसून अब राहत नहीं, बल्कि बड़ी चुनौती बन चुका है। 8 जिलों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, जबकि 104 सड़कें बंद होने से हजारों लोग प्रभावित हैं। इसी को देखते हुए अब आईएमडी ने देहरादून समेत आठ जिलों में कम से मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड (बाढ़ का खतरा) का पूर्वानुमान जताया। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। दोस्तो बीते दिनों से लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ा है और प्रदेश में 104 सड़कें बंद हैं। अगले सात दिन तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। दोस्तो मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) ने गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के जिलाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं। दोस्तो चेतावनी में कहा गया है कि 1 अगस्त के दौरान इन जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और निचले इलाकों में भारी बारिश के कारण जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। एसईओसी ने सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी और विभागीय नोडल अधिकारी हाई अलर्ट पर रहें। किसी भी दुर्घटना या आपदा की सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाए। पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाई, बीआरओ और अन्य एजेंसियों को सड़कें बाधित होने पर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही दोस्तो पुलिस, राजस्व, ग्राम विकास और पंचायत स्तर के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहने और मोबाइल फोन चालू रखने को कहा गया है। इधर दोस्तो राज्य सरकार ने जिलों को यह भी निर्देश दिए हैं कि यदि कहीं लोग फंसते हैं तो उनके लिए भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था की जाए। वहीं दोस्तो जैसे हालात बिगड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं वो कहते हैं कि अलर्ट रहना है। स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, भूस्खलन संभावित मार्गों पर पहले से मशीनें तैनात रखने और आवश्यकता पड़ने पर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही सीमित करने के लिए भी कहा गया है। साथ ही दोस्तो जिला सूचना अधिकारियों को चेतावनी का व्यापक प्रचार-प्रसार कर लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील करने के निर्देश दिए गए हैं।
उधर, राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र की जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में इस समय 104 सड़कें बंद हैं. इनमें एक राष्ट्रीय राजमार्ग, दो बीआरओ सड़कें, एक एमडीआर, 17 पीडब्ल्यूडी सड़कें और 84 पीएमजीएसवाई और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। वहीं दोस्तो रिपोर्ट ये कहती है कि मौसम की सबसे ज्यादा मार पहाड़ी जिलों पर पड़ी है जिससे ये पता चलता है कि सबसे अधिक 23 सड़कें चमोली, 19 पिथौरागढ़, 17 रुद्रप्रयाग, 12 टिहरी, 7-7 पौड़ी और बागेश्वर तथा 6 सड़कें देहरादून में बंद हैं। दोस्तो रिपोर्ट के मुताबिक रुद्रप्रयाग जिले में गौरीकुंड के पास केदारनाथ पैदल मार्ग पर मलबा और पत्थर गिरने से मार्ग बाधित हुआ, जिसके चलते यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया। वहीं उत्तरकाशी में जानकीचट्टी के पास यमुनोत्री पैदल मार्ग पर नदी का जलस्तर बढ़ने और बारिश के कारण फिसलन बढ़ने से यात्रियों की आवाजाही एहतियातन रोक दी गई। बाद में बड़कोट-नौगांव राष्ट्रीय राजमार्ग से मलबा हटाकर यातायात बहाल किया गया। नदियों के जलस्तर पर भी प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है. रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियां चेतावनी स्तर से कुछ ही नीचे बह रही हैं। दोस्तो हरिद्वार में गंगा, उत्तरकाशी में भागीरथी, बागेश्वर में सरयू और गोमती, पिथौरागढ़ में काली, गोरी और सरयू नदियों के जलस्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. हालांकि फिलहाल सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे हैं, दोस्तो मौसम विभाग के सात दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 5 अगस्त तक उत्तराखंड के अधिकांश और कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी हुई है। लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए अगले कुछ दिन संवेदनशील जिलों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। तो दोस्तों, मानसून अभी थमा नहीं है और आने वाले कुछ दिन उत्तराखंड के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। ऐसे में अगर आप चारधाम यात्रा, पर्यटन या किसी भी जरूरी काम से पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाने की योजना बना रहे हैं, तो मौसम और मार्ग की ताज़ा जानकारी लेकर ही घर से निकलें। नदी-नालों के किनारे जाने से बचें, भूस्खलन संभावित इलाकों में अनावश्यक आवाजाही न करें और प्रशासन की एडवाइजरी का पूरी तरह पालन करें।