चमोली जिले के थराली ब्लॉक स्थित कुराड़ (कुरूड़) गांव के लूणगिल तोक में उस समय हड़कंप मच गया, जब सुबह ग्रामीणों ने एक भालू के कराहने की आवाज सुनी। दरअसल, भोजन की तलाश में जंगल से भटककर आबादी वाले क्षेत्र में आया यह भालू खेतों की सुरक्षा के लिए लगाई गई तारों की बाड़ (जाल) में बुरी तरह फंस गया था। रातभर भालू खुद को छुड़ाने के लिए संघर्ष करता रहा, जिससे वह काफी थक चुका था। सोशल मीडिया पर शुरुआत में इसके पेड़ के बीच फंसे होने की खबरें और वीडियो वायरल हो रहे थे, लेकिन असल में भालू लोहे के तारों के बीच लाचार पड़ा हुआ था। घटना की जानकारी मिलते ही रेंजर मनोज देवराड़ी के नेतृत्व में वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वन्यजीव विशेषज्ञों और ग्रामीणों के सहयोग से टीम ने बेहद सावधानीपूर्वक ऑपरेशन चलाया और जाल बिछाकर भालू को सकुशल और सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। प्राथमिक जांच में भालू को कोई गंभीर चोट न होने की पुष्टि के बाद, वन विभाग ने उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास यानी गहरे जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया है। इस सफल रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
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