क्या अंकिता भंडारी मामले में नाम सामने आने के बाद अब बीजेपी के एक बड़े नेता की उत्तराखंड से विदाई को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है?आखिर क्या यह सिर्फ प्रशासनिक बदलाव है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है?और सबसे बड़ा सवाल—क्या यह महज शुरुआत है? अंकिता केस में ‘VIP’ कनेक्शन को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब एक के बाद एक हो रहे राजनीतिक बदलाव क्या संकेत दे रहे हैं?क्या उत्तराखंड की राजनीति में पर्दे के पीछे कोई बड़ी हलचल चल रही है, जो धीरे-धीरे सामने आ रही है?या फिर यह केवल एक सामान्य फेरबदल है, जिसे सियासी रंग दिया जा रहा है? तो फिर एक नाम और बचा है बल। दोस्तो वैसे तो खबर ये है कि उत्तराखंड बीजेपी के संगठन महामंत्री अजेय कुमार को पार्टी नेतृत्व ने उत्तराखंड से हटा दिया है और बीजेपी वाले कह रहे हैं कि उत्तराखंड से विदाई के बाद बड़ी जिम्मेदारी देते हुए राजस्थान का संगठन महामंत्री नियुक्त किया है। दोस्तो अजय कुमार ये नाम तो सुना ही होगा आपने बीते कुछ वक्त में हर घर में पहाड़ से लेकर मैदान तक इस नाम कि चर्चा था क्योंकि नाम अजय कुमार का अंकिता केस भी जुड़ा। दोस्तो अजय कुमार को लेकर प्रदेश की जनता के मन में पहले से कई तरह का शक और शंकाओं का दौर चल रहा था। जब से उनका नाम अंकिता भंडारी केश में जुड़ा और उसके बाद उर्मला सनावर के वीआईपी वाले ऑडियो वीडियो बम में भी बीजेपी के के महामंत्री अजय कुमार का नाम रहा। हांलाकि उत्तराखंड बीजेपी इन बातों को नकारती रही है, लेकिन इतना भी तय है कि जिन लोगों के नाम अंकिता केस से जुड़े उनकी सर्वजनिक भूमिका बीजेपी उत्तराखंड में ना के बराबर हो गई। तो दोस्तो बीजेपी संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए पार्टी नेतृत्व ने उत्तराखंड में लंबे समय से संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे अजेय कुमार को हटा दिया गया।
दोस्तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेतृत्व में संगठन को और अधिक मजबूत करने की दिशा में लगातार फैसले लिए जा रहे हैं और हाल में नितिन नवीन ने उत्तराखंड का दौरा किया था। दोस्तो और ठीक उनके दौरे से वापस लौटने के बाद उत्तराखंड से अजय कुमार की विदाई का पत्र उत्तराखंड पहुंच गया, लेकिन दोस्तो ऐसा क्या बीजेपी को फिर वो चाहे प्रदेश नेतृत्व हो या फिर केंद्रीय नेतृत्व उसको लगने लगा है कि अंकिता केस में नाम जुड़ने वाले नेता उनको बड़ा नुकासान पहुंचा सकते हैं आगामी चुनाव में ये सवाल इसलिए किया जा सकता है क्योंकि बीते दिनों जिस तरह से उर्मिला सानवर की ऑडियो वीडियो ने अंकिता केस में नया मोड़ लाया। इसमें अंकिता केस में वीआईपी के तौर पर अजय कुमार महांमंत्री बीजेपी उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम का आया यानि कि बीजेपी के उत्तराखंड प्रभारी इन दोनों के नाम आने के बाद इन दोनों की उत्तराखंड में सक्रियता ना के बराबर देखने को मिली हालांकि बीजेपी और कुछ प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम इन सब बातों को सिरे से खारिज करते रहे हैं। अब दोस्तो अजय कुमार के विदाई के बाद कांग्रेस कह रही है कि एक और नेता की जल्द ही उत्तराखंड से विदाई तय है करनी ही पड़ेगी। अब दोस्तो उत्तराखंड बीजेपी के महामंत्री संगठन रहे अजेय कुमार को एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें अब राजस्थान का प्रदेश महामंत्री संगठन बनाया गया है हालांकि उनके इस तबादले के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। अंकिता भंडारी मामले को लेकर विपक्ष लगातार उन पर निशाना साधता रहा था, और अब उनके उत्तराखंड से विदाई के बाद प्रदेश प्रभारी और संगठन पर भी सवाल उठने लगे हैं।तो क्या यह सिर्फ संगठनात्मक बदलाव है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश? सियासत में चर्चाएं तेज हैं और चर्चा इस बात की भी तेज है दोस्तो कि क्या अब बहुत जल्द बीजेपी प्रदेश प्रभारी के पद से दुष्यंत कुमार गौतम की भी छुट्टी होने वाली है। वैसे बीच में ऐसी खबरें आई कुछ बैनर पोस्टर से जब बीजेपी ने दुष्यंत गौतम को जगह नहीं दी तो लगा कि बीजपी को इस बात का आभास हो चुका है कि वो बीजेपी को अब फायदा कम डेंट ज्यादा देंगे तब सवाल किया गया तो बीजेपी के कई लोगों का ये कहना था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बदलें तो प्रभारी भी बदल दियए गए हैं इसलिए उनकी फोटो नहीं लगाई लोगों ने मान लिया था इस बात को लेकिन ऐसा हुआ कुछ नहीं धीरे-धारे दुष्यंत गौतम को पोस्टर में जगह दी जाने लगी और हाल में नितिन नवीन के दौरे के दौरान भी बी दुषयंत गौतम की मौजदूगी दिखाई दी लेकिन एक बात तो तय की बीजेपी वाले उनको बड़े बच बचाकर पेश कर रहे हैं। यानि कि उनको दिखाया भी जा रहा है ज्यादा छिपाने की ही कोशिश होती है लगता है। क्योंकि अब खुल कर सामने नहीं आते या फिर उनको नहीं आने को सीधे दिल्ली से कहा गया है तो क्या अब अंकिता केस में जिन दो लोगों का नाम चर्चा में था अजय कुमार और दुष्यंत गौतम चुनाव से पहले दुष्यंत गौतम की भी छुट्टी होगी या फिर कुछ और देखने को मिलता है देखना होगा।