सवालों में घिरा बुग्याल क्यों बना रहस्य? | Dayara | Pindari Glacier | Trekking | Uttarakhand News

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दोस्तो उत्तराखंड का एक बेहद खूबसूरत बुग्याल, जहां हर साल हजारों पर्यटक और ट्रेकर प्रकृति का आनंद लेने पहुंचते हैं। लेकिन क्या यही खूबसूरत वादियां अब एक रहस्यमयी पहेली बनती जा रही हैं? आखिर ऐसा क्या है कि एक दिन पहले एक इंजीनियर लापता हो जाता है और उसके अगले ही दिन एक MBA छात्रा का भी कोई सुराग नहीं मिलता? क्या यह सिर्फ संयोग है, या फिर इस बुग्याल में छिपा है कोई ऐसा रहस्य जो लगातार लोगों को अपने आगोश में ले रहा है? आखिर क्यों सवालों के घेरे में है उत्तराखंड का यह खूबसूरत बुग्याल?क्या खराब मौसम और दुर्गम रास्ते इसकी वजह हैं, या फिर इसके पीछे कोई और कहानी छिपी हुई है? दरअसल दोस्तो उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर की एक महिला दयारा बुग्याल ट्रैक मार्ग पर लापता हो गई। महिला के लापता होने की सूचना मिलते ही वन विभाग, प्रशासन और बचाव दलों ने संयुक्त रूप से खोज अभियान शुरू कर दिया। दोस्तो ये घटना ऐसे समय सामने आई है जब इससे एक दिन पहले ही नोएडा का एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक से लौटते समय लापता हो गया था। अधिकारियों के अनुसार, महिला की तलाश के लिए गढ़वाल, दयारा बुग्याल ट्रेक रूट और आसपास के जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अभी तक महिला का कोई सुराग नहीं मिला है। दोस्तो जो जानकारी मिली उसके अनुसार बबीता पांडे (30), जो एमबीए की छात्रा है और एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। शुक्रवार को पांच अन्य लोगों के साथ रायथल गांव से दयारा बुग्याल ट्रैक के लिए रवाना हुई थीं। रायथल गांव इस ट्रेक का शुरुआती पड़ाव माना जाता है और ट्रेक का आयोजन एक निजी एजेंसी द्वारा किया गया था।

इधर दोस्तो एसडीआरएफ कि माने तो उन्हें ट्रैकिंग पर आई युवती के लापता होने की सूचना मिली , जिसके बाद भटवाड़ी क्षेत्र में तैनात एसडीआरएफ टीम को संयुक्त सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। एसडीआरएफ, वन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मिलकर युवती की तलाश में जुटी हैं। इधर खबर ये भी निकल कर आई की पुलिस को इस पूरे मामले की सूचना देरी मिली, लेकिन दोस्तो इस घटना ने ट्रैकिंग और साहसिक पर्यटन गतिविधियों में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, युवती के लापता होने की सूचना पुलिस को काफी देर से दी गई, जिससे तलाशी अभियान शुरू होने में भी देरी हुई, लेकिन दोस्तो चौकाने वाले बात तो ये है कि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक मार्ग पर नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर विशेष चौहान बीते तीन दिनों से लापता हैं। उन्हें ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है मगर अबतक सफलता हाथ नहीं लगी है। विशेष 29 मई की रात को ग्लेशियर से लौटते समय लापता हो गए थे। विशेष पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक पर एक पोर्टर के साथ गए थे मगर वापसी के समय वे उससे अलग हो गए और तय समय पर बेस तक नहीं पहुंच पाए। बताया जा रहा है कि वापस के दौरान विशेष ने पोर्टर से कहा कि वह थक चुके हैं और थोड़ा आराम करने के बाद चलेंगे। विशेष ने पोर्टर को आगे बढ़ने के लिए कहा। पोर्टर तो बेस पर पहुंच गया मगर लंबे इंतेजार के बाद भी जब विशेष नहीं आए तो उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की मदद मांगी गई। अधिकारियों के अनुसार, हेड कांस्टेबल टीका सिंह कार्की के नेतृत्व में एसडीआरएफ की एक टीम स्थानीय पुलिस के साथ ग्लेशियर के लिए रवाना हुई।

तो दोस्तों, सवाल कई हैं और जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं क्या उत्तराखंड के ये खूबसूरत बुग्याल और ट्रैकिंग रूट सिर्फ खराब मौसम और दुर्गम रास्तों की वजह से लोगों को निगल रहे हैं, या फिर कहीं सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ी चूक हो रही है?आखिर कैसे एक दिन पहले पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर लापता हो जाता है और अगले ही दिन दयारा बुग्याल से एक MBA छात्रा का कोई सुराग नहीं मिलता?क्या ट्रैकिंग एजेंसियां सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कर रही हैं?और सबसे बड़ा सवाल। क्या उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहे एडवेंचर टूरिज्म के बीच पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम हैं? उत्तराखंड की उस स्वर्ग जैसी वादियों में, जिसे कहा जाता है — दयारा बुग्याल ट्रेक क्या आपने कभी सोचा है कि आसमान को छूते बर्फीले पहाड़ों के बीच, हरे-भरे विशाल घास के मैदानों पर चलने का अनुभव कैसा होता है?तो दोस्तों, उत्तरकाशी जिले में स्थित दयारा बुग्याल ठीक वैसा ही अनुभव देता है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। लगभग 22 किलोमीटर लंबा यह ट्रेक न सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि शुरुआती ट्रेकर्स के लिए भी इसे सबसे सुरक्षित और अनुकूल ट्रेक माना जाता है।समुद्र तल से करीब 3,050 मीटर की ऊंचाई पर फैला यह बुग्याल, गर्मियों में हरे मखमली कालीन की तरह दिखता है, तो सर्दियों में यही जगह सफेद बर्फ की चादर में बदल जाती है, लेकिन सवाल ये है। आखिर क्यों हर साल हजारों पर्यटक और ट्रेकर्स इस जगह की ओर खिंचे चले आते हैं?क्या सिर्फ इसकी खूबसूरती? या फिर वो सुकून जो शहरों की भागदौड़ में कहीं खो चुका है? दयारा बुग्याल का हर मोड़, हर रास्ता और हर नजारा मानो प्रकृति का एक जीवंत चित्र हो, जहां बादलों के बीच चलती हवा और दूर तक फैले पहाड़ आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। फिलहाल दोनों लापता लोगों की तलाश जारी है और पूरा उत्तराखंड उनके सकुशल मिलने की दुआ कर रहा है। लेकिन इन घटनाओं ने एक बार फिर पहाड़ों में ट्रैकिंग और एडवेंचर गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इन दोनों मामलों में आगे क्या अपडेट आता है, हम आपको लगातार बताते रहेंगे।