आंदोलन छोटा नहीं, मुद्दा बड़ा है! दृष्टिबाधित बच्चों ने क्यों उठाई आवाज़? | Uttarakhand News

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देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) के सैकड़ों दृष्टिबाधित छात्रों ने अपने बुनियादी अधिकारों के लिए मोर्चा खोल दिया है। पिछले चार सालों से बिना किसी स्थायी निदेशक के चल रहे इस राष्ट्रीय संस्थान में छात्रों का आरोप है कि उनकी शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों को मिलने वाले लैपटॉप का न मिलना, पिछले तीन वर्षों से उच्च शिक्षा की स्कॉलरशिप बंद होना और ब्रेल पुस्तकों की भारी कमी ने इन विशेष रूप से सक्षम बच्चों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। मामला बढ़ता देख प्रशासन ने हॉस्टल वार्डन को हटाने और लैपटॉप के लिए बजट स्वीकृत करने जैसे कुछ तात्कालिक कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन छात्र अपनी सभी माँगें पूरी होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। मेस में घटिया भोजन, डिस्पेंसरी स्टाफ का संवेदनहीन व्यवहार और स्कॉलरशिप बहाली पर प्रशासन की जटिल शर्तों ने आंदोलन की आग को और भड़का दिया है, जिससे छात्रों ने अब भूख हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।