Delhi की चिंगारी पहाड़ों तक पहुंची! | Dehradun | Uttarkashi | Student Protest | Uttarakhand News

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दोस्तो, क्या दिल्ली के जंतर-मंतर से उठी आवाज़ अब पूरे देश में आंदोलन का रूप ले रही है? क्या छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई ने सिर्फ राजधानी ही नहीं, बल्कि पहाड़ों का भी सियासी पारा चढ़ा दिया है?दिल्ली से शुरू हुआ विरोध अब उत्तराखंड और हिमाचल की वादियों तक पहुंच चुका है। उत्तरकाशी की सड़कों पर हजारों छात्र उतर आए। देहरादून में कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला और शिमला में खुद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू प्रदर्शन में शामिल होकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते दिखाई दिए। कैसे उबल रहे हैं पहाड़ और केद्र की मोदी सरकार के खिलाफ हिमचल सरकार ने ही कैसे खौला मोर्चा दिखाउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो मै ये खबर शुरू करूं उससे पहले दो अहम सवाल है, जिनका जवाब आप भी कमेंट के जरिए दे सकते हैं। क्या दिल्ली का विरोध अब देशव्यापी आंदोलन बनता जा रहा है?

क्या छात्रों का गुस्सा आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक आंदोलन का कारण बनेगा? दोस्तो इन सवालों के जवाब आने वाले वक्त में मिलेगे, लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और कथित पुलिस कार्रवाई की गूंज अब सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रही। इसका असर अब पहाड़ी राज्यों में भी साफ दिखाई देने लगा है। दोस्तो ये तस्वीर उत्तराखंड के बाबा विश्वनाथ की नगरी उत्तरकाशी में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए। गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र में निकाली गई रैली में प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली की घटना का विरोध करते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई। उधर राजधानी देहरादून में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और छात्रों ने बुद्ध पार्क में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार जवाब देने से बच रही है। वहीं हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन के तहत लोकभवन के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया।

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन जनता का अधिकार है और छात्रों पर बल प्रयोग उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों से जुड़े मामलों के समाधान की मांग दोहराई, दोस्तो दिल्ली उत्तराखंड और हिमाचल तीनों जगह एक जैसी मांगे, एक जैसे नारे और एक ही मुद्दा—छात्रों का भविष्य और शिक्षा व्यवस्था।अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विरोध सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में और व्यापक रूप लेता है। फिलहाल इतना तय है कि दिल्ली से उठी चिंगारी अब पहाड़ों तक पहुंच चुकी है। छात्रों के मुद्दे पर सियासत भी तेज हो गई है और सड़क पर संघर्ष भी। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और राज्यों तक फैलता है।