जी हां दोस्तो भीषण गर्मी के बीच आखिर क्यों ग्रामीणों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है? रात के अंधेरे में हाथों में मशालें लेकर लोग सड़कों पर क्यों उतर आए। क्या जिम्मेदारों की अनदेखी अब लोगों के गुस्से को आंदोलन की आग में बदल रही है? जब जिम्मेदार चैन से सो रहे थे तो गांव के लोग एक बड़ी परेशानी का सामना कर रहे थे। देखिए जहां ग्रामीणों का फूटा गुस्सा और मशाल जुलूस ने सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया है। दोस्तो वैसे ये समस्या नई नहीं है, सालों से दशकों से ऐसा ही होता चला आ रहा है और आज भी वो ही चल रहा है बल। टिहरी जिले के देवप्रयाग में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक ग्रामीण इलाकों के लोग पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करते रहेंगे? और जिम्मेदार विभाग कब तक इस समस्या से आंखें मूंदे रहेगा? दोस्तो पूरी खबर दिखाने से पहले मै आपको दो तस्वीरें दिखा रहा हूं इन दोनों तस्वीरों के बारे में आगे बात करूंगा। दोस्तो इन दोनों तस्वीरों एक तो दिन के उजाले में सिस्टम पर सवाल करती तस्वीर है और दूसरी रात के अंधेरे में मशाल लेकर लोग जिम्मेदारों को गहरी नींद से जगाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन समस्या बड़ी ही नहीं बड़ी बिकट हो चली है। दोस्तो ये तस्वीर बेतालघाट विकासखण्ड के मल्लाकोट के तोक गांव में पानी के लिए हाहाकार, 3 से 4 किमी दूर से पानी ढोने को मजबूर ग्रामीणों की है। दोस्तो कुमाउं क्षेत्र की बात कर रहा हूं, अभीnयहां कई जिलें ऐसे जहां ऐसी ही तस्वीरें आपको देखने को मिल जाएंगी, लेकिन नैनीताल जिले के बेतालघाट विकासखंड अंतर्गत धनियाकोट मल्लाकोट ग्रामसभा के तोक धौड़ा व ज्योग्याड़ी में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को रोजाना 3 से 4 किलोमीटर दूर पहाड़ी रास्तों से पैदल चलकर पानी लाना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के बीच महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत मल्लाकोट के तोक धौड़ा-धामसपुर में आज तक मल्लाकोट पेयजल योजना से पानी उपलब्ध नहीं कराया गया। कफुल्टा-बारगल पम्पिंग योजना का काम वर्ष 2019-20 में नाबार्ड योजना के तहत शुरू हुआ था, लेकिन कई साल बीत जाने के बाद भी योजना आज तक पूरी नहीं हो सकी। अब यहां दोस्तो ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि धौड़ा-धामसपुर तोक को मल्लाकोट पेयजल योजना से जोड़ा जाए, जिसका स्रोत मात्र 2 से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उनका कहना है कि यदि इस योजना से कनेक्शन दिया जाए तो क्षेत्र की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान हो सकता है। पानी की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायक और सरकार के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है। दोस्तो टिहरी जिले के देवप्रयाग में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सप्लाई बाधित होने से लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। देवप्रयाग में लोगों ने मशाल जुलूस निकालकर सिंचाई विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि उस पीड़ा की आवाज थी, जो लंबे समय से अनसुनी की जा रही थी। क्या यह स्थिति प्रशासन की लापरवाही का नतीजा नहीं है? दोस्तो ग्रामीणों का कहना है कि कई इलाकों में लगातार पानी की आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। गर्मी के इस सीजन में जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब भी लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर योजनाएं और व्यवस्थाएं धरातल पर क्यों नाकाम हो रही हैं? प्रदर्शन कर रहे लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही पानी की आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। क्या प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा, या फिर हालात और बिगड़ने का इंतजार किया जाएगा? इधर देवप्रयाग विधानसभा मे पानी क़ो लेकर निकला मशाल जुलूस तो देवप्रयाग विधानसभा के विधायक विनोद कंडारी का आया बड़ा बयान क्या आया वो दिखाता हूं। दोस्तो इस पूरे मामले में सिंचाई विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। क्या नियमित मॉनिटरिंग की जा रही थी? क्या शिकायतों को समय रहते सुना गया? या फिर व्यवस्था सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है?गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है और साथ ही बढ़ रहा है ग्रामीणों का आक्रोश। यह स्थिति केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उन कई इलाकों की तस्वीर हो सकती है जहां आज भी मूलभूत सुविधाएं संघर्ष बन चुकी हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को कितनी तेजी और गंभीरता से सुलझाता है। क्या ग्रामीणों को राहत मिलेगी या उनका गुस्सा आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेगा?