क्या सिर्फ 12वीं पास एक युवक बन सकता है डॉक्टर?और क्या मरीजों की जान से खुलेआम खेला जा सकता है?UP से आए एक युवक ने उत्तराखंड में खुद को डॉक्टर बताकर ऐसा ही खेल रच दिया।आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाइयों का “खतरनाक मिक्स” मरीजों को दिया जा रहा था, लेकिन सवाल ये है कि आखिर इतने लंबे समय तक ये फर्जीवाड़ा चलता कैसे रहा?अब स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई में बड़ा भंडाफोड़ हुआ है—और सामने आया है फर्जी डॉक्टर का पूरा खेल! दोस्तो भीषण गर्मी का असर साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है और लोंगों के बीमार होना भी लाजमी है ऐसे में जहां सरकारी से लेकर नीजि क्लिनिक में मरीजों की भीड़ दिखाई दे रही है, तो वहीं कुछ फर्जी डॉक्टर भी बहती गंगा में हाथ धोने में लगे, लेकिन यहां अब इस पर भी स्वास्थ्य विभाग अपनी नजर टेढी कर चुका है। दोस्तो वीडियो को अंत तक जरूर देखिएगा क्योंकि आपके स्वास्थ्य से खिलवाड़ सिर्फ मौसम और बीमारी नहीं कर रही है बल्ली कुछ फार्जी डॉक्टर भी आपकी जिंदगी को खतरे में डालने का काम कर रहे हैं। वो कैसे कर रहे हैं उसे आप मेरे इस वीडियो रिपोर्ट के माध्यम से देख भी पाएंगे और समझ पाएंगे। दोस्तो ये खबर उधम सिंह नगर के दिनेशपुर से है जहां स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक कथित फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया है। आरोप है कि युवक खुद को डॉक्टर बताकर आयुर्वेदिक दवाइयों में एलोपैथिक दवाएं मिलाकर लोगों को दे रहा था। शिकायत मिलने पर प्रशासन हरकत में आया और मौके पर छापेमारी कर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया। फिलहाल दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोस्तो दिनेशपुर थाना क्षेत्र में अवैध तरीके से इलाज और दवाइयों के गोरखधंधे का बड़ा मामला सामने आया है।
लोगों का आरोप है कि पीलीभीत निवासी एक युवक खुद को डॉक्टर बताकर लोगों का इलाज कर रहा था। आरोप है कि वह आयुर्वेदिक दवाइयों में एलोपैथिक दवाएं मिलाकर मरीजों को दे रहा था, जिससे लोगों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था। स्थानीय लोगों द्वारा लगातार इसकी शिकायत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को दी जा रही थी। शिकायत के आधार पर दिनेशपुर पुलिस, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विभाग की टीम और ऋचा सिंह ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। टीम ने मौके पर पहुंचकर संबंधित क्लीनिक और दवाइयों की जांच की, जहां कई संदिग्ध दवाइयां बरामद हुईं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी केवल 12वीं पास है, लेकिन वह खुद को डॉक्टर बताकर लंबे समय से लोगों का इलाज कर रहा था। अधिकारियों ने मौके से बड़ी मात्रा में दवाइयां कब्जे में लीं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बरामद दवाओं के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया है। कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने क्लीनिक में मौजूद दस्तावेजों और लाइसेंस की भी जांच की। प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताएं सामने आने की बात कही जा रही है। बताया गया है कि पिछले 1 साल फर्जी डॉक्टर मरीजों का उपचार कर रहा था।
दोस्तो अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के पास वैध चिकित्सकीय डिग्री और आवश्यक अनुमति से जुड़े दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं पाए गए. इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर उधम सिंह नगर ने बताया कि बरामद दवाओं की सैंपलिंग कर ली गई है। दोस्तो प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. वहीं पुलिस भी मामले की जांच में जुटी हुई है। घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ऐसे फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर लगाम लगाई जा सके। दोस्तो फिलहाल इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई जारी है। बरामद दवाओं के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद आरोपी के खिलाफ आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सवाल अब भी वही है—क्या बिना डिग्री और बिना अनुमति ऐसे फर्जी क्लीनिकों पर समय रहते लगाम नहीं लगनी चाहिए?स्थानीय लोगों ने भी ऐसे फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है, ताकि मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर पूरी तरह रोक लग सके।फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस हर पहलू से इस गोरखधंधे की तह तक जाने में जुटी हुई है।