क्या देवभूमि उत्तराखंड में सिस्टम इतना कमजोर हो चुका है कि अब जाम में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ी जाने लगी है?क्या एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी अब किस्मत का सहारा लेना पड़ेगा?चमोली के बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगा जाम सिर्फ यातायात की समस्या नहीं रहा, बल्कि अब यह इंसानियत को झकझोर देने वाली एक दर्दनाक तस्वीर बन गया हैआखिर क्यों पहाड़ी रास्तों पर हर दिन जाम लोगों की जिंदगी के लिए खतरा बनता जा रहा है?क्यों इमरजेंसी में भी एम्बुलेंस रास्ता नहीं बना पा रही?और क्या सिस्टम सिर्फ हादसे के बाद जागने के लिए बचा है? ये बेहद ही चिंतनीय और सोचनीय खबर है दोस्तो क्या देवभूमि उत्तराखंड में अब जिंदगी भी जाम में फंसकर दम तोड़ने लगी है? क्या पहाड़ों की सड़कें सिर्फ सफर का जरिया हैं या फिर लोगों की मजबूरी और सिस्टम की नाकामी का आईना बन चुकी हैं? चमोली जिले के बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से आई यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं है। यह उस हकीकत की तस्वीर है, जो हर दिन पहाड़ों में कहीं न कहीं दोहराई जा रही है। दोस्तो मामला जोशीमठ क्षेत्र का है। दोस्तो जोशीमठ के किमाणा गांव की एक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था, सब कुछ सामान्य था लेकिन रास्ते में ज्योतिर्मठ थाने के पास लगा लंबा जाम इस सफर को एक संकट में बदल देता है। वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहा था और समय के साथ महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी।
दोस्तो फिर क्या था परिजन घबरा गए हर मिनट भारी पड़ रहा था और उम्मीदें धीरे-धीरे कमजोर होने लगी थीं। दोस्तो स्थिति बिगड़ती देख परिजनों ने करीब एक किलोमीटर दूर स्थित Community Health Centre Joshimath को सूचना दी और दोस्तो इसके बाद जो हुआ, वह इस पूरे सिस्टम पर सबसे बड़ा सवाल छोड़ जाता है। दोस्तो अस्पताल से नर्सें और मेडिकल स्टाफ तुरंत आवश्यक उपकरण लेकर मौके पर पहुंचे, लेकिन अस्पताल पहुंचने का रास्ता भी जाम ने रोक रखा था।ऐसे में एक मजबूरी ने जन्म दिया एक असाधारण फैसले को और सड़क किनारे ही इमरजेंसी व्यवस्था तैयार कर दी गई और फिर यहीं सड़क बनी अस्पताल यहीं जिंदगी ने पहला सांस लिया और यहीं एक नवजात की दुनिया में एंट्री हुई। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने सड़क किनारे ही सुरक्षित प्रसव कराया। यह वह पल था, जहां हर सेकंड कीमती था और हर हाथ सिर्फ जिंदगी बचाने में लगा था। दोस्तो इस दौरान महिला पुलिसकर्मियों ने भी भीड़ को नियंत्रित किया और व्यवस्था बनाए रखने में मदद की, बाद में जब जाम खुला, तो जच्चा और बच्चा दोनों को अस्पताल ले जाया गया।
दोस्तो डॉक्टरों के अनुसार, दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन सवाल ये है कि क्या हर बार किस्मत इतनी मेहरबान होगी? क्या बदरीनाथ हाईवे पर जाम अब आम बात बन चुका है? क्या इमरजेंसी सेवाओं के लिए कोई ठोस प्लान नहीं है? और क्या पहाड़ों में प्रशासन सिर्फ घटनाओं के बाद ही सक्रिय होता है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है हर दिन लोग घंटों जाम में फंसते हैं।कभी मरीज, कभी स्कूली बच्चे तो कभी जरूरी सामान ले जा रहे वाहन सब इस जाम की मार झेलते हैं। स्थानीय निवासी नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन को अब स्थायी समाधान निकालना ही होगा, क्योंकि हर दिन की देरी किसी बड़ी त्रासदी को जन्म दे सकती है। दोस्तो सोचिए जरा, अगर एम्बुलेंस रास्ता नहीं बना पा रही। अगर मरीज सड़क पर इलाज को मजबूर हैं तो फिर सिस्टम की तैयारियों का दावा कितना मजबूत है? दोस्तो सीएचसी जोशीमठ के प्रभारी गौतम भद्रवा ने बताया कि जाम के कारण अस्पताल पहुंचना संभव नहीं था, इसलिए टीम को मौके पर ही काम करना पड़ा, लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रैफिक और इमरजेंसी मैनेजमेंट वाकई मजबूत है?या फिर हम हर बार सिर्फ हादसे के बाद ही जागते रहेंगे?बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग की यह घटना सिर्फ एक जाम की कहानी नहीं है। यह उस व्यवस्था की तस्वीर है, जहां जिंदगी और जाम के बीच दूरी बहुत कम रह गई है और खतरा बहुत बड़ा बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार लग रहा जाम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है। इसी बीच शुक्रवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। जाम में फंसी एक गर्भवती महिला की हालत बिगड़ने पर उसका सड़क किनारे ही सुरक्षित प्रसव कराना पड़ा। यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में ट्रैफिक और इमरजेंसी मैनेजमेंट कितना मजबूत है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि बदरीनाथ हाईवे पर आपातकालीन वाहनों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए।