दोस्तों, क्या अगले 48 घंटे उत्तराखंड पर सबसे भारी पड़ने वाले हैं? क्या आसमान से बरसने वाला पानी पहाड़ों पर फिर आफत बनकर टूटेगा?क्या चारधाम यात्रा ट्रैकिंग और पहाड़ों की आवाजाही पर फिर संकट गहराने वाला है?मौसम विभाग ने चेतावनी दे दी है। जिला प्रशासन हाई अलर्ट पर है, ट्रैकिंग पर रोक लगा दी गई है और साफ कहा गया है कि बिना जरूरत यात्रा करने से बचें। आखिर ऐसा क्या दिख रहा है मौसम विभाग को कि प्रशासन ने पहले से ही पूरी मशीनरी मैदान में उतार दी है?कहां सबसे ज्यादा खतरा है, कितने दिन तक बारिश का कहर रहेगा और लोगों को किन बातों का ध्यान रखना होगा। दोस्तो उत्तराखंड में एक बार फिर मौसम डराने लगा है।बादल सिर्फ बरस नहीं रहे, बल्कि प्रशासन की चिंता भी बढ़ा रहे हैं। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद पूरे सिस्टम को हाई अलर्ट पर रखा गया है। देहरादून जिले में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सभी विभागों, आपदा प्रबंधन, पुलिस, SDRF और संबंधित एजेंसियों को चौबीसों घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। दोस्तो प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ऑरेंज अलर्ट की अवधि में पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी।
वहीं उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही पर भी रोक रहेगी ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। यानी इस बार प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि कहीं भूस्खलन या मलबा आने से सड़कें बंद होती हैं तो उन्हें तत्काल खोलने की कार्रवाई की जाए। वहीं नगर निकायों को जलभराव रोकने के लिए नालियों और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने के आदेश दिए गए हैं। उधर मौसम विज्ञान केंद्र का कहना है कि उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बिगड़ा रहेगा। बुधवार को देहरादून और बागेश्वर जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। दोस्तो सिर्फ यही नहीं, देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, टिहरी गढ़वाल, चंपावत और नैनीताल समेत कई पर्वतीय जिलों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। लगातार हो रही बारिश का सबसे बड़ा खतरा भूस्खलन, सड़कें बंद होने, अचानक जलस्तर बढ़ने और नदियों-नालों के उफान के रूप में सामने आ सकता है। ऐसे में प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि पहाड़ी क्षेत्रों की अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित इलाकों के आसपास जाने से परहेज करें और प्रशासन की ओर से जारी हर एडवाइजरी का पालन करें। दोस्तो प्रशासन ने कंट्रोल रूम और आपदा प्रबंधन तंत्र को भी पूरी तरह सक्रिय रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके। वहीं दोस्तो अगर बात देहरादून शहर मेँ जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। एक तरफ करोड़ो रूपए देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए खर्च कर दिए गए, लेकिन वहीँ मानसून के सीजन मेँ सड़कें तालाब मेँ बदल जाती है। जिसके चलते आम जनता और खास तौर पर स्कूली बच्चों को काफ़ी परेशानियों को झेलना पड़ता है। वहीँ नगर निगम देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल का कहना है कि निगम लगातार सफाई व्यवस्था को दुरस्त करने के साथ नालियों का भी निर्माण कर रहा है, जिससे बरसात के मौसम मेँ पानी की निकासी बनी रहे। फिलहाल दोस्तो साफ संकेत यही हैं कि अगले 24 से 48 घंटे उत्तराखंड के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी मुसीबत में बदल सकती है।