उत्तराखंड: अब दंगईयों से होगी सरकारी व निजी संपत्ति के नुकसान की वसूली, कानून को मिली मंजूरी

देवभूमि में सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति के नुक्सान की वसूली नुकसान पहुंचाने वालों से ही की जाएगी भरपाई के अलावा 8 लाख तक का जुर्माना भी वसूला जाएगा।

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उत्तराखंड में किसी विरोध या हिंसक प्रदर्शन के दौरान किसी सरकारी या सार्वजानिक संपत्ति को नुक्सान पहुंचाना भारी पड़ सकता है। उत्तराखंड की धामी सरकार समान नागरिक संहिता के बाद अब एक और नया कानून लाने जा रही है। इस कानून के तहत दंगाइयों से ही नुक्सान की भरपाई की जाएगी। क्षति ग्रस्त संपत्ति की भरपाई के अलावा 8 लाख तक का जुर्माना और दंगा नियंत्रण पर सरकारी अमले का खर्चा भी भरना होगा। कैबनेट में संपत्ति क्षति वसूली अध्यादेश को मंजूरी दे दी गई है और जल्द ही यह कानून बनने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने लोकसभा चुनावों से पहले विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर नियंत्रण के लिए उत्तराखंड लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली अध्यादेश पहले ही लागू किया था। यह अध्यादेश 16 मार्च को राज्यपाल की मंजूरी के बाद प्रभावी हुआ था। इसकी छह महीने की अवधि समाप्त हो रही थी, इसलिए कैबिनेट ने इसे स्थायी कानून बनाने के लिए विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दी है।

कानून के तहत उपद्रवियों को तय समय में शत प्रतिशत भरपाई देना होगा। दंगाइयों से नुकसान की वसूली बाजार दर पर की जाएगी और कुछ मामलों में ट्रिब्यूनल की अनुमति से हर्जाना दोगुना भी हो सकता है। इसके लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र ट्रिब्यूनल का गठन होगा जिसे सिविल कोर्ट की शक्तियां दी गई हैं। सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए संबंधित विभागाध्यक्ष तीन महीने के भीतर ट्रिब्यूनल में अपील करेंगे। प्रस्तावित कानून के तहत लोग निजी संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवजे का दावा कर सकते हैं। मुआवजा स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता की रिपोर्ट पर निर्भर होगा जिसे सरकार के पैनल से चुना जाएगा। ट्रिब्यूनल के निर्णय के बाद आरोपित को एक महीने में राशि जमा करनी होगी। ऐसा न करने पर राजस्व वसूली की तर्ज पर वसूली की जाएगी और जेल की सजा का भी प्रावधान है।