Dehradun में दृष्टि दिव्यांग Students Protest! | NIEPVD | Galpha | Genz | Uttarakhand News

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Gen-Alpha आंदोलन में अब एक ऐसी आवाज भी शामिल हो गई है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। देहरादून में दृष्टि दिव्यांग छात्रों ने ‘हमारी भी सुनिए’ कहते हुए अपनी समस्याएं सामने रखीं और NIEPVD की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए। आखिर ऐसा क्या है, जिसे लेकर इन छात्रों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा? उनकी मांगें क्या हैं और संस्थान की व्यवस्थाओं पर उन्होंने कौन-कौन से सवाल खड़े किए? देहरादून में शिक्षा और अपने अधिकारों को लेकर चल रही Gen Z और Gen Alpha की मुहिम अब दृष्टि दिव्यांग छात्रों तक भी पहुंच गई है। राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) के छात्र-छात्राओं ने अपनी समस्याओं को सामने रखते हुए संस्थान की व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं।

छात्रों का कहना है कि उनकी जरूरतों से जुड़े कई अहम मुद्दे लंबे समय से बने हुए हैं। NIEPVD यानी National Institute for the Empowerment of Persons with Visual Disabilities देहरादून, उत्तराखंड में स्थित भारत सरकार का प्रमुख संस्थान है। यहां दृष्टिबाधित लोगों की शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास से जुड़े काम किए जाते हैं. ऐसे में यहां पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि संस्थान में उन्हें अपनी रोजमर्रा की पढ़ाई और जरूरी सुविधाओं को लेकर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ब्रेल प्रेस में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस की कीमत से लेकर स्कॉलरशिप तक कई मुद्दे उठाए। उनका आरोप है कि जरूरी उपकरणों की उपलब्धता और उनकी लागत को लेकर पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है। छात्रों ने अपनी पढ़ाई से जुड़ी जरूरतों को लेकर भी सवाल खड़े किए.छात्रों ने ब्रेल प्रेस से जुड़ी महंगी डिवाइस का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि दृष्टि दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई में ब्रेल सामग्री बेहद महत्वपूर्ण है, ऐसे में इससे संबंधित उपकरणों तक आसान पहुंच जरूरी है। विद्यार्थियों ने स्कॉलरशिप को लेकर भी सवाल किए और कहा कि आर्थिक सहायता से जुड़े मामलों में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

छात्राओं ने बातचीत के दौरान संस्थान में अपने साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायत भी सामने रखी. उनका कहना है कि परिसर में छात्राओं के साथ व्यवहार को लेकर गंभीर समस्या है। उन्होंने इस मामले में बेहतर व्यवस्था और संवेदनशील रवैये की जरूरत बताई। दोस्तो स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी विद्यार्थियों ने अपनी परेशानी साझा की। उनका आरोप है कि डिस्पेंसरी में स्वास्थ्य संबंधी मामलों को लेकर अपेक्षित स्तर की तत्परता नहीं दिखाई जाती। छात्रों के मुताबिक, दृष्टि दिव्यांग छात्रों के लिए स्वास्थ्य सुविधा आसानी से उपलब्ध होना बेहद जरूरी है, लेकिन उन्हें इस मोर्चे पर भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.छात्रों ने मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर्स की भारी कमी का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि दृष्टि दिव्यांग छात्रों के लिए Mobility Instructor की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे उन्हें स्वतंत्र रूप से आवाजाही और दैनिक गतिविधियों में मदद मिलती है। स्टाफ की कमी के कारण कई विद्यार्थी हॉस्टल में रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं।