Babita Pandey के सर्च ऑपरेशन में क्या मिला? | Dayara Bugyal | Uttarkashi | Uttarakhand News

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दोस्तो बबीता पांडे, वहीं दो दयारा ट्रैक से जो रयस्यमय तरीके से गायब हो गई। वही बबीता पांडे कहां गायब हुई, कैसे हुई, कौन ले गया, किसके साथ गई, क्यों अचानक हवा हो गई एक बेटी। ऐसे ना जाने कितने सवाल आपके मन में चल रहे होंगे, मेरे भी, लेकिन दोस्तो बीच में जब हमारी जिम्मेदार सर्च एजेंसिया कोई सुराग नहीं ढूंढ पाई। जब पुलिस कोई सबूत नहीं जुटा पाई, तो ये कह दिया गया कि वो अपने आप कहीं चली गई। यानि कि सीधे कहूं तो वो भाग गई, कहां किसके साथ गई, ये नहीं पता, अब दोस्तो पुलिस ने बबीता पांडे उस भाग जाने वाले एंगल पर अपडेड आया है। मोबाइल और सीसीटीवी में क्या मिला ये पुलिस ने बता दिया है। दोस्तो उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल क्षेत्र से लापता बबीता पांडे की खोजबीन को 3 हफ्ते का लंबा समय बीत चुका है। इतने दिन गुजर जाने के बाद भी अब तक बबीता का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस, प्रशासन और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां दिन-रात सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। शुरुआती दिनों में जंगलों और पहाड़ियों में बड़े पैमाने पर भौतिक रूप से खोजबीन करने के बाद, अब जांच टीम ने अपना पूरा ध्यान तकनीकी पहलुओं पर लगा दिया है। पुलिस मोबाइल सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर के जरिए बबीता की लोकेशन और घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है, लेकिन जब पुलिस ने इस पहलू पर जांच शुरू की तो क्या कुछ मिला भी या फिर पुलिस अंधेर में तीर मारने का काम ही कर रही है। आगे बताउंगा आपको हर एक चीज जो अब तक पुलिस ने की है और जो पुलिस को मिला है। बबीता की गुमशुदगी को लेकर दोस्तो बबीता पांडे की खोज में पुलिस जुड़ी है और इसकी कमान संभाल रहे हैं डिप्टी एसपी जनक सिंह पंवार।

दोस्तो आपको यहां पहले मै आपको बता दूं कि 29 तारीख की रात करीब साढ़े ग्यारह से डेढ़ बजे के बीच बबीता पांडे के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, उसके बाद से ही लगातार पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन विभाग और स्थानीय आपदा प्रबंधन की टीमों ने मिलकर गोई क्षेत्र और दयारा ट्रैक पर लगातार निगरानी और सर्च अभियान चला रही हैं। थाना और जिला स्तर पर पर चल ही रही है ऐसा पुलिस कह रही है। इस पूरे मामले में कई बार जब मेने आपको खबर दिखाई तो आप लोगों में से बहुत से लोगों का कहना था कि सीसीटीवी क्यों नहीं देख रही पुलिस। अब दोस्तो पुलिस की तरफ से जो कहा जा रहा है वो ये कि रैथल से लेकर तेखला पुल और उत्तरकाशी मुख्यालय तक के सभी सरकारी और प्राइवेट सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जांची गई है। इसके लिए एक अलग टीम तैनात की गई थी, लेकिन दोस्तो चौकाने वाली बात तो ये है कि वहां से कोई भी फायदेमंद जानकारी पुलिस को नहीं मिल सकी। दोस्तो रैथल में जहां से ट्रैकिंग शुरू होती है, वहां के कैमरे की 29, 30 और 31 तारीख की पूरी रात की फुटेज देखी गई। रात में कुछ गाड़ियां जरूर वहां आई थीं, लेकिन जांच में पता चला कि वे बाहर से आए ट्रैकर्स की थीं जो रात एक बजे वहां रुके थे। कैमरों में ऊपर से किसी के नीचे आने का कोई सबूत नहीं मिला है।

दोस्तो कुछ लोगों का ये भी कहना था इस मामले में कि गोई जहां बबीता का कैंप था वहां से रोड हैड तक पहुंचे के लिए यानि की रैथल तक पहुंचे के कई और रास्ते भी हैं। जो स्थानी लोग कह रहे हैं, लेकिन दोस्तो वहीं कोई सीसीटीवी नहीं है, ऐसे में पुलिस इस बात को साफ करती दिखाई दे रही है कि रैथल में जहां सीसीटीवी कैमरा लगा है, उससे ठीक ऊपर वाले ट्रैक पर जहां तक कैमरे की नजर जाती है, उससे पहले एक गाथर यानी नाला पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति कैमरे की नजर से बचना चाहे, तो वह उस रास्ते से पैदल नीचे आ सकता है। यहां इतना भर नहीं है इसके अलावा दोस्तो पुलिस ये बता रही है कि भटवाड़ी चौकी पर लगे कैमरों की मदद से 29 और 3 तारीख की सुबह गंगोत्री और रथल क्षेत्र से गुजरने वाली सभी गाड़ियों की जांच की जा चुकी है, लेकिन बबीता को लेकर कोई सुराग नहीं मिला। वैसे दोस्तो रहस्य तो पहले दिन से ही बबीता की गुमशुदगी को लेकर है, लेकिन जब 3 हफ्ते बाद आप पुलिस से इस बात की जानकारी लेंगे कि जब कोई सुराग नहीं कोई सबूत नहीं तो फिर आगे क्या, कैसे ये जांच चलेगी। बबीता की खोज कैसे आगे बढ़गी। दोस्तो पुलिस के अधिकारी ये कहते दिखाई दे रहे हैं कि दयारा से लेकर डोडीताल तक के सभी संभावित रास्तों को खंगाला जा चुका है, जहां कोई व्यक्ति बेहोशी या बिना सोचे-समझे जा सकता है, लेकिन वहां से बबीता का जिंदा या मृत अवस्था में कोई शरीर या सबूत नहीं मिला। इसके अलावा दोस्तो आपको याद होगा जब बबीता को लेकर पुलिस अधिकारी और इस जांच टीम को हेड कर रहे हैं। डिप्टी एसपी जनक सिंह पंवार ने इस बात का जिक्र किया था की बबीता पांडे की इंस्टाग्राम आईडी पर कुछ भावनात्मक यानी सेंटीमेंटल पोस्ट देखी गई थीं।

दोस्तो इसको लेकर पुलिस उम्मीद लगा रही है कि अगर मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी, तो हो सकता है कि वह एकांत चाहने और लोगों के संपर्क से दूर रहने के लिए खुद कहीं चली गई हों। पुलिस टीम परिजनों और दोस्तों के मोबाइल पर नजर रख रही है ताकि कहीं भी संपर्क होने पर उसे ट्रेस किया जा सके, तो देखा आपने, करीब तीन हफ्ते की लगातार तलाश, जंगलों-पहाड़ों की खाक छानने के बाद अब जांच पूरी तरह तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित हो चुकी है। सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा चुकी है, मोबाइल सर्विलांस और कॉल डिटेल्स की जांच जारी है, लेकिन बबीता पांडे की गुमशुदगी का रहस्य अभी भी बरकरार है। हालांकि जांच एजेंसियां कई संभावनाओं पर काम कर रही हैं, लेकिन अभी तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सबसे अहम बात यह है कि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे बबीता के साथ क्या हुआ, इसका स्पष्ट जवाब मिल सके। फिलहाल पुलिस और प्रशासन का दावा है कि तलाश और जांच दोनों जारी हैं। वहीं परिवार और स्थानीय लोगों की उम्मीदें भी अब इसी बात पर टिकी हैं कि जल्द से जल्द कोई ऐसा सुराग मिले, जो इस पूरे रहस्य से पर्दा उठा सके।