Babita Pandey केस में बड़ा सवाल बरकरार!| Police | Uttarkashi | Dayara Bugyal | Uttarakhand News

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दोस्तो क्या दयारा बुग्याल में लापता हुई बबीता पांडे का रहस्य और गहराता जा रहा है? क्या लगातार चल रहे सर्च ऑपरेशन के बावजूद कोई ठोस सुराग न मिलना कई नए सवाल खड़े कर रहा है? और क्या अब पुलिस की अंतिम थ्योरी पर भी सवाल उठने लगे हैं? कैसे पुलिसिया थ्योरी जमीनी हकिकत से मेल नहीं खाती बताउंगा आपको पूरी खबर कि क्या कह रहे हैं अंतरार्टि्रय पर्वतारोही। दोस्तो उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से लापता हुई बबीता पांडे का मामला अब सिर्फ एक गुमशुदगी का मामला नहीं रह गया है। दिन बीत रहे हैं, सर्च ऑपरेशन जारी है, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और स्थानीय टीमें लगातार खोजबीन में जुटी हैं, लेकिन अब तक बबीता का कोई स्पष्ट सुराग सामने नहीं आया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बबीता पांडे हैं कहाँ? दोस्तो दयारा बुग्याल कोई ऐसा इलाका नहीं माना जाता जिसे बेहद खतरनाक ट्रैक रूट की श्रेणी में रखा जाए। हर साल हजारों पर्यटक और ट्रैकर यहां पहुंचते हैं। लेकिन इस बार जो हुआ, उसने ट्रैकिंग सुरक्षा को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। दोस्तो जानकारों का कहना है कि दयारा का क्षेत्र जितना खूबसूरत है, उतना ही विशाल भी है। घने जंगल, देवदार के पेड़, झाड़ियां और कई किलोमीटर तक फैला खुला इलाका किसी भी व्यक्ति को भ्रमित कर सकता है। ऐसे में यह संभावना जरूर जताई जा रही है कि यदि कोई व्यक्ति रात के समय रास्ता भटक जाए तो वह लगातार गलत दिशा में आगे बढ़ता चला जाए। लेकिन दोस्तो यहीं से सवाल भी शुरू होते हैं।

अगर बबीता सिर्फ रास्ता भटकी थीं, तो इतने दिनों के सर्च ऑपरेशन के बाद कोई न कोई सुराग क्यों नहीं मिला? कोई सामान, कोई कपड़ा, कोई डिजिटल लोकेशन, कोई स्पष्ट निशान आखिर क्यों सामने नहीं आया? दोस्तो पुलिस की ओर से यह संभावना भी जताई गई है कि बबीता वापस लौटने की कोशिश कर रही होंगी। क्योंकि वह पहाड़ की रहने वाली हैं और इलाके की परिस्थितियों को कुछ हद तक समझती होंगी। लेकिन सवाल यह भी है कि अगर उन्होंने वापसी की कोशिश की, तो वह किस दिशा में गईं? क्या उस दिशा की पूरी तरह जांच हो चुकी है?मामले को लेकर एक और चर्चा यह भी है कि जिन लोगों के साथ ट्रैकिंग हुई, उनसे पूछताछ और गहराई से होनी चाहिए। आखिर आखिरी बार बबीता को किसने देखा? उनकी मानसिक स्थिति कैसी थी? क्या किसी तरह का विवाद, तनाव या कोई असामान्य परिस्थिति सामने आई थी? ये ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब जांच एजेंसियों को तलाशने होंगे, हालांकि दोस्तो यह भी सच है कि अभी तक किसी भी तरह की आपराधिक घटना या साजिश का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन जब कोई मामला लंबे समय तक अनसुलझा रहता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। दोस्तो इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी है। पिछले कुछ समय में उत्तराखंड में ट्रैकिंग और पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में क्या ट्रैकिंग नियमों को और सख्त करने की जरूरत है? क्या रात के समय अकेले घूमने या कैंप क्षेत्र से बाहर जाने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होने चाहिए? क्या ट्रैकिंग कंपनियों और गाइड्स की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए? क्योंकि अगर दयारा जैसे लोकप्रिय ट्रैकिंग रूट पर भी कोई व्यक्ति इस तरह लापता हो जाता है और कई दिनों तक उसका कोई सुराग नहीं मिलता, तो यह केवल एक परिवार की चिंता नहीं बल्कि पूरे ट्रैकिंग तंत्र के लिए एक चेतावनी है। फिलहाल दोस्तो राहत बस इतनी है की सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं। लेकिन हर गुजरते दिन के साथ चिंता भी बढ़ती जा रही है तो दोस्तो सवाल वहीं हैं जो पहले दिन से लेकर आज तक जवाब मांग रहे हैं क्या बबीता पांडे कहीं रास्ता भटक गई हैं? क्या अभी कोई अहम सुराग जांच एजेंसियों के हाथ लगना बाकी है?इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच और सर्च ऑपरेशन के नतीजों में ही छिपे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बबीता पांडे सुरक्षित मिलें और उनके परिवार की चिंता जल्द खत्म हो। लेकिन जब तक यह रहस्य नहीं सुलझता, तब तक दयारा बुग्याल का यह मामला उत्तराखंड के सबसे चर्चित और चिंताजनक मामलों में बना रहेगा।