Pauri दिग्गजों के गढ़ में युवाओं का बड़ा ‘विद्रोह’? । Srinagar University। Uttarakhand News

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दोस्तो क्या उत्तराखंड भाजपा के सबसे मजबूत और अजेय किले में बहुत बड़ी ‘राजनीतिक कंक्रीट’ दरक चुकी है? क्या देवभूमि की Gen Z (युवा पीढ़ी) ने राज्य के सबसे कद्दावर मंत्रियों और दिग्गजों को एक ऐसा ज़ोरदार झटका दिया है जिसकी गूंज सीधे देहरादून सचिवालय तक सुनाई दे रही है? कैसे विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पौड़ी में हो गया बड़ा खेला, और ढह गया बीजेपी का मजबूत किला बताउंगा आपको पूरी खबर। जी हां, दोस्तो ये तस्वीर उस क्षेत्र से है जिस पौड़ी जिले की सभी 6 विधानसभा सीटों पर बीजेपी का एकछत्र राज है, जहां से खुद कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, धन सिंह रावत और विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूरी जैसी बड़ी हस्तियां आती हैं। उस पौड़ी में श्रीनगर गढ़वाल यूनिवर्सिटी के कैंपस कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव में ABVP का सूपड़ा साफ हो गया है! NSUI ने सभी बड़े पदों पर क्लीन स्वीप करते हुए इतिहास रच दिया है। आखिर इस गढ़ में बीजेपी की इतनी बड़ी छात्र विंग ताश के पत्तों की तरह क्यों बिखर गई? क्या यह 2027 का कोई शुरुआती ट्रेलर है? दोस्तो पौड़ी जिला, जिसे उत्तराखंड की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य दुर्ग कहा जाता है। लेकिन इसी दुर्ग के केंद्र हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पौड़ी परिसर से जो चुनावी नतीजे आए हैं, उन्होंने बीजेपी के रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इस छात्र संघ चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने वो कर दिखाया है जिसकी कल्पना खुद उनके बड़े नेताओं ने भी नहीं की होगी। पूरे के पूरे मुख्य पैनल से ABVP की विदाई हो गई है। दोस्तो देखिए, अध्यक्ष पद पर NSUI के आयुष थपलियाल ने 382 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। ABVP की अनिशा को 166 वोट मिले। आयुष ने 216 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की।

कोषाध्यक्ष पद पर NSUI की अनीशा को 343 वोट मिले, जबकि ABVP की सृष्टि को 188 वोट मिले। अनीशा 155 वोटों से विजयी रहीं। सचिव पद पर NSUI के ऋषभ कुमार को 317 वोट मिले, जबकि ABVP के करण कुमार को 223 वोट मिले। ऋषभ ने 94 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। दोस्तो आंकड़े साफ बयां कर रहे हैं कि यह कोई मामूली या नजदीकी हार नहीं है। अध्यक्ष पद पर NSUI के आयुष थपलियाल ने ABVP की अनिशा को सीधे 216 वोटों के भारी अंतर से पटखनी दी। कोषाध्यक्ष पद पर NSUI की अनीशा ने 155 वोटों से और सचिव पद पर ऋषभ कुमार ने 94 वोटों से एकतरफा जीत दर्ज की। युवाओं के इस एकतरफा झुकाव ने साबित कर दिया है कि कॉलेज के भीतर का नैरेटिव पूरी तरह बदल चुका है। दोस्तो चलिए अब बात करते हैं कि इस छात्र संघ चुनाव के नतीजों का उत्तराखंड सरकार और बीजेपी के रसूख पर क्या असर होने जा रहा है। दोस्तो पौड़ी वो जिला है जो उत्तराखंड की सत्ता की धुरी तय करता है। इस अकेले जिले पौड़ी की सभी 6 की 6 विधानसभा सीटों पर बीजेपी का पूर्ण कब्जा है। यही नहीं, सूबे के सबसे कद्दावर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज (चौबट्टाखाल विधायक) खुद उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत (श्रीनगर विधायक) और सूबे की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण (कोटद्वार विधायक) इसी वीआईपी जिले से आते हैं!

दोस्तो उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के अपने ही प्रभाव वाले श्रीनगर यूनिवर्सिटी कैंपस में एबीवीपी का इस तरह सूपड़ा साफ होना सीधे तौर पर बीजेपी के स्थानीय नेतृत्व और उनके दबदबे को खुली चुनौती है। दोस्तो सवाल उठ रहा है कि क्या Gen Z (पहाड़ के युवा मतदाताओं) ने स्थानीय मुद्दों, बेरोजगारी, पेपर लीक के विवादों या फिर अंकिता भंडारी जैसे संवेदनशील मामलों को लेकर अंदरूनी गुस्सा जाहिर किया है? हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस एक कॉलेज के नतीजे के आधार पर पूरे उत्तराखंड का विश्लेषण करना जल्दबाजी होगी। राज्य के अन्य बड़े डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों (जैसे डीएवी देहरादून या कुमाऊं विवि) के आगामी परिणाम देखने के बाद ही साफ होगा कि युवाओं का यह मिजाज केवल पौड़ी तक सीमित है या पूरे सूबे में बीजेपी के खिलाफ कोई अंडरकरंट चल रहा है, लेकिन दोस्तो एक बात तो तय है। छात्र राजनीति को मुख्यधारा की राजनीति की नर्सरी कहा जाता है। अगर भाजपा के सबसे मजबूत किले में कांग्रेस की छात्र विंग ने इस तरह सर्जिकल स्ट्राइक की है, तो इसे केवल ‘छात्रों का चुनाव’ कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। 2027 के महा-संग्राम से पहले, युवाओं ने सरकार के सबसे ताकतवर मंत्रियों को संभलने का एक बड़ा और कड़ा इशारा जरूर दे दिया है।