जी, हां दोस्तो उत्तराखंड सरकार ने ले लिए बड़े फैसले, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि फैसले लेने में वो किसी भी तरह की हिचक नहीं दिखाने वाले। देहरादून सचिवालय में हुई कैबिनेट की आपात और बेहद महत्वपूर्ण बैठक खत्म हो हुई और बाहर निकलकर आई है वो बड़ी खबर जिसने पूरे प्रदेश की नौकरशाही से लेकर विपक्ष तक को हिला दिया है, बताउंगा आपको वो फैससले हैं क्या दोस्तो धामी कैबिनेट ने एक साथ 10 सबसे बड़े और ऐतिहासिक प्रस्तावों पर अंतिम मुहर लगा दी है! शिक्षा से लेकर रोजगार तक, पर्यटन से लेकर स्वास्थ्य तक सरकार ने रातों-रात उत्तराखंड के कायदे कानून बदलने का पूरा मन बना लिया है। आखिर वो कौन से 10 फैसले हैं जो देवभूमि की तकदीर और सियासी तस्वीर बदलने जा रहे हैं। देखिएगा मेरी रिपोर्ट में पूरा देखिएगा और अपनी राय फिर दीजिएगा। दोस्तो चुनाव से पहले और मानसून सत्र की दहलीज पर खड़ी धामी सरकार ने वो कर दिखाया है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। सचिवालय में दोपहर से शुरू हुई माथापच्ची के बाद कैबिनेट ने 10 ऐसे प्रस्तावों को पास किया है, जो सीधे तौर पर राज्य की जनता के बुनियादी हकों और व्यवस्थाओं से जुड़े हैं
- UERC की वार्षिक रिपोर्ट को सदन में रखने की अनुमति
- उत्तराखंड कारागार सुधार विभाग में अपर निदेशक के एक पद के प्रस्ताव को मंजूरी
- शासकीय अधिवकताओ को मिलने वाले शुल्क का पुनर्नरधारण को बनी कमेटी की रिपोर्ट को मंजूरी
- खाद्य विभाग के तहत सुधार कार्यकम में सीधी भर्ती के पदों को लेकर चर्चा
- पांच राजकीय मेडिकल कॉलेज में आंदोलन कर रहे MBBS इंटर्न की stipend को 17 हजार से बढाकर 25000 किया गया।
- शिक्षा विभाग के अंतर्गत व्यायाम शिक्षक के 35 पद खेल विभाग के लिए स्वीकृत, पदक विजेताओं के लिए आरक्षित
- खेल नीति 2021 के अंतर्गत आउट ऑफ़ टर्न तैनाती देने के लिए विभिन्न विभागों में 200 से ज्यादा पद स्वीकृत
- पुरुकुलगाँव में निर्माणाधीन मसूरी रोपवे परियोजना के तहत होगी लैंड ट्रांसफर, गढ़वाल सभा का बनेगा भवन
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तहत हरिद्वार में बनेगा ESI अस्पताल
- सेवा संकल्प अभियान के तहत 17 सितम्बर को होंगे कई कार्यक्रम
दोस्तो इसे धामी सरकार का चुनावी साल से पहले का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है! इस कैबिनेट का सबसे बड़ा प्रहार नियमों को दुरुस्त करने पर रहा है। चाहे वो स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से जुड़े संवेदनशील फैसले हों, या फिर शिक्षा विभाग के भीतर शिक्षकों के सालों से लटके ग्रेड-पे और कैडर के विवादों पर सीधी चोट! सिर्फ यही नहीं, उत्तराखंड की पहचान बन चुके एडवेंचर टूरिज्म और रिवर राफ्टिंग के नियमों को भी सुरक्षा के लिहाज से बेहद कड़ा कर दिया गया है। सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि अब ढीली प्रशासनिक व्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोस्तो धामी कैबिनेट के ये 10 फैसले सिर्फ कागज पर दस्तखत नहीं हैं, बल्कि यह 2026 और आने वाले चुनावों के लिए सरकार का वो रोडमैप है, जिस पर चलकर भाजपा दोबारा सत्ता के शिखर पर पहुंचने का दावा कर रही है। अब देखना यह होगा कि ये मंजूर हुए प्रस्ताव जमीन पर कितनी तेजी से उतरते हैं और उत्तराखंड की जनता को इनका कितना सीधा लाभ मिलता है।