क्या देवभूमि के सबसे बड़े धार्मिक संस्थानों में से एक पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं? क्या सूचना के अधिकार यानी RTI से सामने आई जानकारी ने बदरी-केदार मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर नई बहस छेड़ दी है? कैसे राम मंदिर से जुड़े विवादों की चर्चाओं के बीच अब उत्तराखंड की बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) भी सवालों के घेरे में है। दोस्तो हाल में आपने राम मंदिर से जुड़े विवादों की चर्चाओं के बीच अब उत्तराखंड की बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) भी सवालों के घेरे में है। RTI के जरिए सामने आए कुछ दस्तावेजों और दावों के आधार पर समिति पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों को लेकर प्रदेश में नई चर्चा शुरू हो गई है। दोस्तो आखिर RTI में ऐसा क्या सामने आया, किन बिंदुओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं, और इन आरोपों पर समिति या संबंधित पक्ष का क्या कहना है? इस पूरी रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे तथ्य, दस्तावेजों के दावे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी। दोस्तो ये जो बयान है इसको अपने जहन में आखिर तक जरूर रखिएगा, क्योंकि ये बहूत काम आने वाला है। राम मंदिर में कथित तौर पर दान चोरी के मामले के बाद अब बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) में कथित भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोप सामने आए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर नया खुलासा करते हुए आरोप लगाया है कि मंदिर समिति के कुछ सदस्यों ने एक वर्ष से कम अवधि में टीए/डीए (यात्रा एवं दैनिक भत्ता) के नाम पर लाखों रुपये का अनियमित भुगतान लिया है। उन्होंने इसे श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन का दुरुपयोग बताते हुए मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। दोस्तो विकेश सिंह नेगी ने बताया कि बीकेटीसी द्वारा आरटीआई के जवाब में दी गई जानकारी के अनुसार, मंदिर एक्ट की धारा 26 (च) के तहत समिति के सदस्यों को केवल समिति से संबंधित कार्यों के लिए यात्रा करने पर ही पारिश्रमिक या यात्रा भत्ता दिया जा सकता है।