गुरु की लाडली फौज’ का सच! | Karnaprayag | Nihang Sikh | BJP | Congress Uttarakhand News

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उत्तराखंड के चमोली जिले में सिखों का पवित्र स्थान हेमकुंट साहिब है, जिस पर सिखों की गहरी आस्था है। लाखों की संख्या में सिख यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रास्ते में कर्णप्रयाग पड़ता है। Uttarakhand Nihang Controversy जहां बीते दिनों पार्किंग को लेकर निहंग और स्थानीय व्यापारियों में विवाद हो गया। इस घटना में कुछ लोग घायल हो गए। जिसके बाद चार निहंग गिरफ्तार किए गए। इसको लेकर निहंग नाराज हैं। इसके बाद निहंगों ने चार दिन तक रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू में गुरुद्वारे पर कब्जा किया। अब पंजाब से आए निहंग हेमकुंट साहिब को जाना जाते हैं। जिनको हिमाचल सीमा पर रोका गया है। इस प्रकरण के बाद निहंग सिख चर्चाओं में है। सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर निहंग कौन होते हैं। उनका इतिहास क्या है और उनकी पहचान किन आधारों पर बनी है।

इतिहास के अनुसार, जब भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर संकट गहराने लगा और अत्याचार बढ़ने लगे तब सिख गुरुओं ने आध्यात्मिक शक्ति के साथ सैन्य शक्ति को भी आवश्यक माना। निहंग सिख धर्म के उस योद्धा वर्ग का हिस्सा माने जाते हैं, जिसकी स्थापना धर्म, समाज और कमजोरों की रक्षा के उद्देश्य से हुई थी। इतिहास के अनुसार, जब भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर संकट गहराने लगा और अत्याचार बढ़ने लगे तब सिख गुरुओं ने आध्यात्मिक शक्ति के साथ सैन्य शक्ति को भी आवश्यक माना। इसी सोच के तहत गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की और ऐसे अनुशासित योद्धाओं की परंपरा विकसित हुई, जो अन्याय के खिलाफ हथियार उठाने के साथ-साथ सेवा, त्याग और मानवता की रक्षा को भी अपना धर्म मानते थे समय के साथ यही योद्धा परंपरा निहंगों के रूप में प्रसिद्ध हुई। सिख इतिहास में उन्हें अकाल सेना या गुरू की फौज के नाम से भी जाना जाता है।