Dehradun सड़क नहीं..तो हंगामा! BJP MLA से भिड़ी जनता! | Sahdev Pundir | Sahaspur | Uttarakhand News

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दोस्तों, जब सड़क की मांग लेकर जनता किसी विधायक के दरवाजे तक पहुंच जाए तो सवाल सिर्फ सड़क का नहीं रहता, सवाल बन जाता है जवाबदेही का! दोस्तों, जनता सड़क मांगने पहुंची थी, लेकिन विधायक आवास पर पहुंचते ही मामला बहस और बवाल में बदल गया!देहरादून में BJP विधायक सहदेव पुंडीर के घर उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब सड़क निर्माण की मांग को लेकर पहुंचे लोगों का सामना विधायक से हो गया। जब जनता अपनी समस्या लेकर विधायक के दरवाजे पहुंचे, तो क्या उसे सिर्फ जवाब चाहिए था या मिला सियासी टकराव? आखिर सड़क क्यों अटकी है? विधायक और जनता आमने-सामने क्यों आ गए दोस्तो ये तस्वीरें देहरादून के सहसपुर विधानसभा क्षेत्र की हैं, जहां सड़क की मांग को लेकर लोगों का गुस्सा विधायक आवास तक पहुंच गया। दरअसल,सेलाकुई के स्वास्तिक एनक्लेव, शिवालिक एनक्लेव और श्रीराम पुरम क्षेत्र के लोग लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग उठा रहे हैं। इसी मांग को लेकर UKD नेता निरंजन चौहान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग विधायक सहदेव पुंडीर के आवास पहुंचे और धरने पर बैठ गए। लेकिन जैसे ही विधायक सहदेव पुंडीर मौके पर पहुंचे माहौल बदल गया।जनता ने सड़क निर्माण में देरी को लेकर सवाल उठाए तो विधायक ने भी अपना पक्ष रखा।

देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। विधायक ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सड़क निर्माण को लेकर उनकी तरफ से प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और शासन स्तर से मंजूरी मिलने के बाद काम शुरू होगा। वहीं UKD नेता निरंजन चौहान का आरोप है कि सड़क निर्माण के लिए PWD स्तर पर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन विधायक की संस्तुति नहीं मिलने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया, उनका कहना है कि क्षेत्र के लोग वर्षों से सड़क की समस्या झेल रहे हैं और अब जवाब चाहते हैं। दोस्तो इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सड़क निर्माण में देरी की वजह क्या है?अगर विधायक का दावा है कि प्रस्ताव भेजा जा चुका है तो स्वीकृति में देरी क्यों? और अगर स्थानीय लोगों की मांग सही है तो वर्षों से सड़क का इंतजार क्यों? दोस्तो सड़क का मुद्दा अब सिर्फ विकास का मुद्दा नहीं रहा बल्कि सियासी बहस का केंद्र बन गया है।जनता ने सवाल उठाए हैं। विधायक ने जवाब दिया है, लेकिन अब नजर इस बात पर है कि सड़क कब तक बनती है।क्योंकि चुनावी वादों से नहीं जमीन पर बने रास्तों से ही जनता का भरोसा कायम होता है।