गजब! भारत का राष्ट्रीय पक्षी ‘कौआ’? Almora । Student Issues । Uttarakhand News

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दोस्तो मोर को भूल जाइए साहब! क्योंकि हमारे देश की महान और दिव्य शिक्षा व्यवस्था ने अब ‘कौए’ को भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोषित कर दिया है! जी हाँ, चौंकिए मत! अपनी आँखें मलिए और अखबार की सुर्खियां बनी। दोस्तो मै आपको पहले ही बता दूं कि ये कोई सोशल मीडिया का मीम नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की एक प्रतिष्ठित सरकारी यूनिवर्सिटी द्वारा जारी की गई आधिकारिक उत्तर कुंजी से जुड़ी खबर है! देश में पहले पेपर लीक कर के छात्रों का भविष्य अंधकार में डाला जाता था, और जब पेपर बच जाता है, तो ऐसे ‘ज्ञानी’ प्रोफेसरों से कॉपियां जंचवाई जाती हैं जो इतिहास और भूगोल की धज्जियां उड़ा देते हैं! आखिर हमारे देश के युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ कब तक चलेगा? उत्तराखंड का राष्ट्रीय पक्षी कौआ! बीएड-एमएड एग्जाम की आंसर की में लिखा था ये जवाब, दूसरी हेडलाइन हिंदुस्तान खबर लिखता है, कौवे को राष्ट्रीय पक्षी, पिथौरागढ़ में जोजिला पास बताया, BEd Med एंट्रेस आंसर-की में कई खामियां, उत्तराखंड में कौवे को बताया राष्ट्रीय पक्षी, जोजिला को पिथौरागढ़ में, बीएड प्रवेश परीक्षा की आंसर-की में ब्लंडर। दोस्तो क्यों आखिर ऐसा होता है अपने देश के प्रदेश के छात्रों के साथ। दोस्तो दरअसल ये मामला उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय का है, जहाँ बीएड और एमएड (B.Ed/M.Ed) की संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद जब छात्र सरकारी आंसर-की का इंतजार कर रहे थे, तो जो जवाब सामने आए, उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। यूनिवर्सिटी के महान विशेषज्ञों के मुताबिक—भारत का राष्ट्रीय पक्षी मोर नहीं, बल्कि ‘कौआ’ है!

इतना ही नहीं, इनका ज्ञान यहीं नहीं रुका; इनके मुताबिक ‘जोजिला दर्रा’ कश्मीर में नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में है! और सुनिए, भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से नहीं, बल्कि पाकिस्तान से लगती है! जो छात्र कल को टीचर बनकर देश का भविष्य संवारने वाले हैं, उन्हें खुद सरकारी तंत्र यह कबाड़ ज्ञान परोस रहा है! विवाद बढ़ा तो यूनिवर्सिटी ने इसे ‘तकनीकी खामी’ कहकर पल्ला झाड़ लिया। लेकिन सवाल यह है कि ऐसे गैर-जिम्मेदार लोग इन कुर्सियों पर बैठ कैसे जाते हैं? दोस्तो इस कौआ छाप आंसर-की को सिर्फ एक प्रशासनिक गलती मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। इसे समझने के लिए हमें हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए उस महा-आंदोलन को देखना होगा, जहाँ देश के कोने-कोने से आए लाखों छात्र अपनी फटी हुई किताबों और आंसुओं के साथ न्याय की भीख मांग रहे थे। नीट (NEET) से लेकर नेट (NET) परीक्षाओं में जिस तरह से देश स्तर पर पेपर लीक के रैकेट पकड़े गए, उसने साफ कर दिया है कि भारत का परीक्षा सिस्टम वेंटिलेटर पर है! जंतर-मंतर पर गूंजती वो चीखें चीख-चीख कर कह रही थीं कि इस देश में मेहनत करने वाले छात्र सड़कों पर लाठियां खाएंगे और पैसे के दम पर पर्चे खरीदने वाले महलों में बैठेंगे! और जब पेपर लीक से बच जाए, तो अल्मोड़ा जैसी यूनिवर्सिटी बैठी है, जो छात्रों की बची-कुची उम्मीदों का ‘कौआ’ उड़ा देती है।

दोस्तो उत्तराखंड के युवा इस दर्द को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। यह वही देवभूमि है जो पिछले कुछ सालों में UKSSSC और UKPSC पेपर लीक घोटालों के दंश से लहूलुहान हो चुकी है। वीपीडीओ (VPDO), पटवारी और सचिवालय रक्षक जैसी परीक्षाओं के पेपर जिस तरह हाकम सिंह जैसे मठाधीशों के कमरों में लाखों रुपये में बेचे गए, उसने पहाड़ के गरीब माता-पिता की कमर तोड़ कर रख दी थी। जो युवा दिन-रात एक कर के देहरादून और हल्द्वानी के छोटे-छोटे कमरों में भूखे पेट तैयारी करते हैं, उन्हें अंत में क्या मिलता है? या तो पेपर लीक का नोटिफिकेशन, या फिर ऐसी विवादित आंसर-की जो उनके सीधे-साधे सही जवाबों को भी गलत साबित कर देती है! क्या उत्तराखंड के युवाओं की नियति सिर्फ आंदोलनों की भेंट चढ़ना ही रह गई है? दोस्तो जब तक पेपर सेट करने वाले बाबुओं और लीक करने वाले माफियाओं को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाएगा, तब तक देश की शिक्षा व्यवस्था का यही ‘कौआ’ उड़ता रहेगा। सोबन सिंह जीना यूनिवर्सिटी की इस शर्मनाक हरकत पर सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं है, बल्कि उन प्रोफेसरों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने देश का मज़ाक उड़ाया है। क्या आपको भी लगता है कि हमारे देश के परीक्षा सिस्टम को एक बड़े ‘मेजर ऑपरेशन’ की जरूरत है? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। युवाओं के हक की इस आवाज को दबने मत दीजिए, इस वीडियो को हर छात्र और अभिभावक तक शेयर कीजिए और हमारे चैनल को तुरंत सब्सक्राइब कीजिए!