दोस्तो चुनावी साल करीब आते ही उत्तराखंड बीजेपी के भीतर एक ऐसा ज्वालामुखी फूट पड़ा है, जो आने वाले समय में बड़े सियासी संकट का इशारा कर रहा है! विपक्ष तो दूर, जब सत्ताधारी दल के अपने ही सिपहसालार अपनी सरकार के सबसे रसूखदार मंत्रियों के खिलाफ खुली बगावत पर उतर आएं, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है! मै आपको बताने के लिए आया हूं कि कैसे और क्यों पड़ी बीजेपी में फूट और किसने किसने खिलाफ खोला मोर्चा। दोस्तो रुद्रप्रयाग की खस्ताहाल सड़कों को लेकर शुरू हुई यह जंग अब लोक निर्माण मंत्री सतपाल महाराज की चौखट से होते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंच चुकी है! और इस बगावत पर विधायक भरत चौधरी का जो तीखा पलटवार आया है, उसने आग में घी डालने का काम किया है! दोस्तो मामला रुद्रप्रयाग जिले की उन सड़कों का है जो आज गड्ढों और मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन सड़कों की बदहाली पर जनता से पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता कमलेश उनियाल ने ही अपनी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला उनियाल ने सीधे तौर पर सूबे के पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री सतपाल महाराज और स्थानीय विधायक व कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी के कामकाज और विजन पर गंभीर सवाल दागे हैं, उन्होंने न सिर्फ अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि रुद्रप्रयाग की जनता की दुर्दशा का हवाला देते हुए इस पूरे मामले की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PMO) को पत्र भेजकर कर दी है! कार्यकर्ताओं की यह नाराजगी साफ इशारा कर रही है कि चुनाव से ठीक पहले जमीन पर सब कुछ ठीक नहीं है।
रुद्रप्रयाग की जनता आज इन जर्जर और जानलेवा सड़कों पर चलने को मजबूर है! मैंने बार-बार स्थानीय स्तर पर आवाज उठाई, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मुझे सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को चिट्ठी लिखकर हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ी। अपनी ही सरकार के कार्यकाल में अगर हमारे क्षेत्र का यह हाल रहेगा, तो हम चुनाव में जनता के बीच किस मुंह से जाएंगे? मंत्रियों को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी! जी हां दोस्तो मुझे तो यह भी नहीं पता कि कमलेश उनियाल जी आज की तारीख में बीजेपी में सक्रिय हैं भी या नहीं। लेकिन जिस तरह से वो बात कर रहे हैं, उससे लगता है कि वो इतने बड़े और भारी नेता बन चुके हैं कि उन्होंने केवल PMO तक चिट्ठी भेजी। उनकी जो राजनैतिक हैसियत है, उस हिसाब से तो उन्हें सीधे संयुक्त राष्ट्र संघ यानी UNO तक चिट्ठी भेजनी बनती थी! ऐसी अनर्गल बयानबाजी से धरातल की हकीकत नहीं बदलती। दोस्तो स्थानीय विधायक भरत चौधरी का यह तीखा तंज साफ करता है कि बीजेपी के भीतर का यह विवाद अब निजी हमलों में तब्दील हो चुका है। लेकिन इस पूरी लड़ाई का सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को, क्योंकि उनके विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर उंगली उठना अब आम बात हो गई है। दोस्तो राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो चुनाव से ठीक पहले कार्यकर्ताओं के भीतर पनप रही यह खुली बगावत बीजेपी आलाकमान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकती है। अगर रुद्रप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण गढ़ में पार्टी के नेता आपस में ही सिर-फुटौव्वल करेंगे, तो विपक्षी दल कांग्रेस को बैठे-बिठाए एक बहुत बड़ा मुद्दा मिल जाएगा। क्या संगठन इस अंदरूनी कलह को शांत कर पाएगा या यह चिंगारी पूरी देवभूमि की सियासत में आग लगाएगी? दोस्तो पहाड़ की जर्जर सड़कें सिर्फ गाड़ियों को नहीं तोड़तीं, बल्कि नेताओं के राजनैतिक समीकरणों को भी बिखेर देती हैं। कमलेश उनियाल की पीएमओ को भेजी चिट्ठी और उस पर भरत चौधरी का ‘UNO’ वाला तंज, उत्तराखंड की इस सियासी जंग को और ज्यादा दिलचस्प बना चुका है। आपको क्या लगता है, क्या कार्यकर्ताओं का अपनी ही सरकार के खिलाफ यह गुस्सा जायज है? क्या वाकई सतपाल महाराज के विभागों में काम ढीला चल रहा है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।