Babita Pandey ट्रैकर लापता, सरकार बेखबर?| Police | Uttarkashi | Dayara Bugyal | Uttarakhand News

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क्या उत्तराखंड में एक ट्रैकर के लापता होने का जवाब किसी के पास नहीं है? क्या दयारा बुग्याल जैसे चर्चित ट्रैकिंग रूट पर किसी महिला ट्रैकर का यूं गायब हो जाना सामान्य घटना मान ली जाए? और सबसे बड़ा सवाल, जब परिवार जवाब मांग रहा है, तब सरकार के जिम्मेदार मंत्री आखिर क्या जवाब दे रहे हैं? पूरी खबर दखिए और फिर बताना कितने गंभीर हैं हामारे नेता जी जनस्मयाओ को लेकर। दोस्तों, दयारा बुग्याल ट्रैक से लापता हुई ट्रैकर बबीता पांडे का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। दिन बीत रहे हैं, तलाश जारी है, परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है, लेकिन अब तक बबीता पांडे का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। इसी बीच जब इस मामले को लेकर सरकार के जिम्मेदार मंत्री से सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब लोगों को और हैरान कर गया। सवाल ये उठ रहा है कि आखिर एक ट्रैकर के लापता होने पर सरकार का रुख इतना हल्का क्यों दिखाई दे रहा है? क्या खोज अभियान की प्रगति पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है? और क्या सरकार के पास परिवार को देने के लिए कोई ठोस जवाब नहीं बचा है? आखिर दयारा बुग्याल में उस दिन क्या हुआ था? बबीता पांडे कहां हैं? खोज अभियान किस स्थिति में है? और मंत्री जी के बयान पर अब सवाल क्यों उठ रहे हैं? दोस्तो महाराज जी पर्यटन मंत्री हैं, धर्मस्व मंत्री भी है यानि की पर्यटन और तीर्थाटन को नई ऊचाईँयों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हैं इनके कंधों पर लेकिन इनका जवाब हैरान करने वाला है। आप करिए नई और और अच्छी व्यवस्था लेकिन मौजूदा चुनौती से मुंह चुराना कितना जायज है।

दोस्तो इससे पहले मै आपको वन मंत्री का बयान भी एक रिपोर्ट के जरिए दिका चुका हूं। वन मंत्री सुबोध उनियाल का बयान भी मुझे जल्दबाजी वाला ही लगा जिसने नहीं देखा वो फिर देख लें। दोस्तो उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हुई रामनगर की एमबीए छात्रा बबीता पांडे की तलाश अब उत्तराखंड के हालिया सबसे जटिल सर्च ऑपरेशनों में बदलती दिखाई दे रही है। दिन बीत चुके हैं, सैकड़ों किलोमीटर क्षेत्र में तलाशी ली जा चुकी है, लेकिन सवाल अभी भी वहीं खड़ा है- आखिर बबीता गई तो गई कहां?पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बबीता के मोबाइल की अंतिम सक्रिय लोकेशन दयारा ट्रेक के पड़ाव गोई क्षेत्र से लगभग 200 मीटर नीचे की ओर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि यह लोकेशन मोबाइल एप के रात करीब डेढ़ बजे तक सक्रिय रहने के आधार पर ट्रेस की गई यानी तब तक वह अपना मोबाइल चला रही थी। तकनीकी टीमों ने कथित रूप से एल्फा, बीटा और गामा जैसी तकनीकों के आधार पर अंतिम डिजिटल संकेतों का अध्ययन किया है. हालांकि, अधिकारियों की ओर से इस तकनीकी विश्लेषण का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

दोस्तो त्तराखंड की पर्वतीय वादियां बुग्याल ग्लेशियर और विश्व प्रसिद्ध ट्रेकिंग मार्ग हर साल हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। मगर इन दिनों राज्य के तीन अलग-अलग ट्रेकिंग रूट्स एक अलग वजह से चर्चा में हैं। उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से बबीता पांडे लापता है। बागेश्वर के पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक से उत्तर प्रदेश के पर्यटक अभिषेक का कुछ पता नहीं चल पाया है। फूलों की घाटी से भी हरियाणा निवासी गब्बर सिंह लापता हुये हैं। इन तीनों लापता टूरिस्ट की तलाश जारी है। सर्च अभियान में कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लग रही है। सबसे अधिक चर्चा उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई बबीता पांडे की हो रही है। बबीता पांडे दो सप्ताह पहले लापता हुई थी जिसके बाद से अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। एसडीआरएफ, पुलिस प्रशासन और स्थानीय ग्रामीण लगातार खोज अभियान में जुटे हैं। जंगलों, खाइयों ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों तालाबों और जल स्रोतों की तलाशी ली जा चुकी है। अब हेलीकॉप्टर की मदद से भी क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। बावजूद इसके बबीता का कोई पता नहीं चल सका है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय गांवों तक एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर दयारा बुग्याल में ऐसा क्या है कि कोई व्यक्ति इस तरह रहस्यमय ढंग से गायब हो जाए? दूसरी ओर बागेश्वर जिले के पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक पर लापता हुए उत्तर प्रदेश के शामली निवासी अभिषेक चौहान की तलाश भी लगातार जारी है। अभिषेक 28 मई को ट्रेकिंग के लिए गए थे। 29 मई को लौटते समय खाती गांव से करीब सात से आठ किलोमीटर पहले छिल्याणी गधेरे के पास अचानक लापता हो गए। उनके साथ मौजूद पोर्टर और गाइड ने रात में खाती पहुंचकर इसकी सूचना दी।

जिसके बाद तत्काल खोज अभियान शुरू किया गया। शुरुआती तलाशी के दौरान घटनास्थल के आसपास से उनका कैमरा बरामद हुआ। बाद में पिंडर नदी के समीप उनका रेनकोट और कैप भी मिली। इन बरामद वस्तुओं ने मामले को और गंभीर बना दिया। इसी बीच चमोली जिले स्थित विश्व धरोहर फूलों की घाटी से एक और पर्यटक के लापता होने की खबर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हरियाणा के फरीदाबाद निवासी 48 वर्षीय गब्बर सिंह फूलों की घाटी घूमने पहुंचे था। देर शाम तक वापस नहीं लौटे उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन मोबाइल फोन भी नहीं लग पाया। सूचना मिलते ही वन विभाग पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें सक्रिय हो गईं। मंगलवार शाम से शुरू हुआ खोज अभियान अगले दिन भी जारी रहा, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका। दोस्तों, सवाल सिर्फ बबीता पांडे का नहीं है। सवाल उत्तराखंड के उन तमाम ट्रेकिंग रूट्स का भी है, जहां हर साल हजारों पर्यटक पहुंचते हैं और अपनी सुरक्षा का भरोसा सिस्टम पर छोड़ते हैं। दयारा बुग्याल, पिंडारी ग्लेशियर और फूलों की घाटी तीन-तीन ट्रेकिंग रूट और तीन पर्यटक लापता। लेकिन जवाब अब भी अधूरे हैं।उम्मीद है कि सर्च ऑपरेशन जल्द सफल होगा और लापता लोगों का सुराग मिलेगा। लेकिन तब तक एक सवाल लगातार गूंजता रहेगा—क्या हमारी व्यवस्था सिर्फ पर्यटन बढ़ाने तक सीमित है, या पर्यटकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभाई जाएगी?फिलहाल बबीता पांडे और अन्य लापता पर्यटकों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद के साथ