दोस्तो उत्तराखंड में सबसे बड़ी खबर और पहेली बना रामनगर की बबीता पांडे का उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता होना है, लेकिन दोस्तो ये खबर क्यों आई की बबीता पांडे की तलाश में जुटी टीमों को एक ऐसा सुराग मिला, जिसने उम्मीद भी जगाई और रहस्य भी बढ़ाया। कैसे स्निफर डॉग बबीता की गंध का पीछा करते हुए एक झील तक पहुंचे, लेकिन उसके बाद अचानक ट्रेल खत्म हो गई। आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रशिक्षित खोजी कुत्ते भी आगे का रास्ता नहीं तलाश पाए? क्या है इसके पीछे की बड़ी वजह। दोस्तो बबीता पांडे के दयारा ट्रैक से लापता होने के मामले में मेरे पास आपको बताने के लिए दो खबर हैं। हां अभी ये उम्मीद मत करना कि बबीता पांडे मिल चुकी है या उसका कोई बड़ा सुराग पुलिस या सर्च कर रही टीमों को मिल चुका है। जब ऐसा होगा उसकी खबर सबसे पहले मै आप तक जरूर पहुंचाउंगा, लेकिन दोस्तो क्या हम अपनी जांच एजेंसियों सर्च ऑपरेशन में लगी तमाम टीमों पर से भरोसा खो रहे हैं वो इस लिए कह सकता हूं क्योंकि आपके आने वाले कॉमेंट्स में कई लोगों ने इस बात को लेकर सवाल किया है कि या तो ये टीमें खोज नहीं पा रही हैं या फिर मामला कुछ और है खोजना नहीं चाहती। वैसे दोस्तो सब की सब एंजेसिंया तो लगा दी गई हैं, अब सिर्फ सीबीआई और सीआईडी वाले ही बचे हैं मुझे ऐसा लगता है। दोस्तो बबीता मिल जाय या इस पूरे मामले का पटाक्षेप हो जाए लेकिन ये सवाल तो फिर भी रहेगा कि दुनिया को उत्तराखंड घुमाने खुबसूरत बुग्यालों की ट्रेकिंग करने के लिए जो हम बार बार धात लगाते हैं ना आओ उत्तराखंड पर्यटननगरी है, लेकिन यहां उनकी सुरक्षा और होने वाले किसी हादसे के बाद उसकी जांच पर को लेकर शायद हम दुनिया वालों का भरोसा खो दें। खैर दोस्तो पहली खबर बबीता पांडे केस में ये निकल कर आई की। एक बार सर्च ऑपरेशन में ऐसा मोड़ आया जब टीमें इस बात की उम्मीद कर चुकी थी कि सुराग मिल गया ये मै इसलिए कह रहा हूं जैसा की रह रह कर कुछ बातें जो निकल कर आ रही हैं दयारा ट्रैक से कुछ पुष्ट हैं कुछ अपुष्ट, ऐसे में ये बात तो हम सभी जानते हैं कि दयारा ट्रैग पर जांच दल के साथ खोजी कुत्ते भी बबीता पांडे की तलाश कर रहे हैं। एक बारगी दोस्तो कहा जाता है कि इंसानी चूक हो सकती हैं लेकिन एक ट्रेंड खोजी कुत्ते से किसी भी सुराग का छिपना या छिपाना मुश्किल है लेकिन दोस्तो यहां क्या वो स्नाईपर डॉग कैसे फेल हो गए। दोस्तो एक खबर ये भी आई कि हाल में दयारा ट्रैक के पास ही जहां बबीता पांडे अपने दो दोस्तो के साथ रात को रुंकी थी, उसके ठीक पास में एक तालाब है एक झील है जिसकी तस्वीरें आपने भी देखी होगीं।
दोस्तो कहा ये जा रहा है कि इस झील तक सर्च टीम को पहुंचाने वाले खोजी कुत्ते ही थे,लेकिन वहं तो चप्पा-चप्पा झील का छान मारा लेकिन बबीता पांडे के पारे में कोई सुराग नहीं मिला। तो फिर कैसे ये सुंघ कर अपराधी या सबूत खोद कर निकालने वाले स्नाईपर डॉग बबीता पांडे मामले में कैसे फेल हो गए। क्यों अगर बबीता पांडे अपने टैंट से बाहर निकली तो कहीं को तो गई हो गई ऊपर को नीचे शहर को झील की तरफ, कहीं तो गई होगी तो फिर क्यों ये खोडी कुत्ते बबीता पांडे की गंध नहीं आगे नहीं खोज पाए। दोस्तो इस सवाल पर जब शोर हुआ तो कुछ लोगों का ये मानना है कि बारिश होने के बाद सुराग धुल गए और गंध भी खत्म हो गई, अब ऐसा होता है मुझे नहीं मालूम। आप लोगों में से किसी को पता हो तो बताना जरूर लेकिन दोस्तो मुझे इतना जरूर बता है कि स्नाइपर या खोजी कुत्ते अपनी सूंघने की अद्भुत क्षमता (इंसानों से 1,00,000 गुना बेहतर) और सकारात्मक सुदृढीकरण प्रशिक्षण के आधार पर काम करते हैं. उन्हें विशिष्ट खतरों—जैसे विस्फोटक, नशीले पदार्थ, या बंदूकें—को खोजने और अपने हैंडलर को बिल्कुल खामोश इशारों (जैसे बैठ जाना या पंजों से खरोंचना) से सतर्क करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। स्नाइपर डॉग गंध की पहचान दोस्तो कुत्तों की सूंघने की क्षमता इतनी सटीक होती है कि वे कई अन्य गंधों के बीच छिपी हुई विशिष्ट गंध को भी अलग कर सकते हैं। दोस्तो अध्ययनों से पता चलता है कि प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स की सटीकता का स्तर लगभग 80% से 90% के बीच होता है, जो कि कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर्स और इंसानों से काफी बेहतर है। लेकिन बबीता पांडे के मामले में ये स्नाइपर डॉग खोजी कुत्ते कैसे फेल हो गए। क्या झील के आसपास कोई अहम सुराग छिपा है, या फिर यह मामला जितना दिख रहा है उससे कहीं ज्यादा रहस्यमय है? 10 दिन से ज्यादा समय बीतने के बाद भी बबीता का कोई पता नहीं चल पाया है, जबकि पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और कई एजेंसियां लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।सवाल यह है कि जब गंध झील तक पहुंची तो उसके बाद क्या हुआ? और क्या इसी कड़ी में छिपा है बबीता पांडे की गुमशुदगी का सबसे बड़ा रहस्य?