दोस्तो, उत्तराखंड की सियासत में 10 साल पुराना एक ऐसा जख्म फिर हरा हो गया है, जिसने कभी पूरी सरकार की नींव हिला दी थी!एक तरफ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत। दूसरी तरफ खानपुर के विधायक उमेश कुमार और अब दोनों के बीच सोशल मीडिया पर ऐसा सियासी वार-पलटवार शुरू हुआ है कि कांग्रेस से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज हो गई है! हरदा ने बिना नाम लिए 2016 के स्टिंग का जख्म कुरेदा, तो उमेश कुमार ने भी पलटवार करते हुए ‘सियार वाली सियासत’ का तंज कस दिया!लेकिन बड़ा सवाल ये है—क्या ये सिर्फ फेसबुक की जुबानी जंग है, या 2027 के चुनाव से पहले उत्तराखंड में नए सियासी समीकरणों की शुरुआत हो चुकी है?और आखिर खानपुर सीट को लेकर हरदा और उमेश कुमार के बीच इतनी तल्खी क्यों है? 10 साल पुराने सियासी जख्म से निकली इस नई जंग की पूरी कहानी देखिए। दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर वो पुराने ज़ख्म हरे हो गए हैं, जिसने 10 साल पहले देवभूमि की सत्ता को हिला कर रख दिया था! एक तरफ हैं प्रदेश के सबसे कद्दावर और चतुर राजनेता, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत। और दूसरी तरफ हैं स्टिंग ऑपरेशन से लेकर निर्दलीय विधायकी तक का सफर तय करने वाले खानपुर के विधायक उमेश कुमार! दोनों के बीच फेसबुक पर छिड़ी ज़ुबानी जंग ने उत्तराखंड कांग्रेस से लेकर दिल्ली दरबार तक भूचाल ला दिया है। हरीश रावत ने जहां बिना नाम लिए ‘गद्दार’ और ‘स्टिंगबाज़’ का मुद्दा उछाला, तो वहीं उमेश कुमार ने सीधा खुला खत लिखकर कह दिया—‘हरदा, अपनी सियार वाली सियासत बंद करो!’ दोस्तो क्या यह सिर्फ एक फेसबुक वॉर है, या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता के नए समीकरणों की खूनी जंग? दोस्तो तोज सिंह बिष्ट हैं राज्यमंत्री हैं, इन्होंने कांग्रेस और हरीश रावत की बोखलाहट पर जो बोला वो कितना सच है। इस पर आपनी बनाईये, लेकिन दोस्तो मै आपको आगे की खबर बताता हूं। हरीश रावत बनाम उमेश कुमार की ये नई जंग क्या कहती है।
वैसे दोस्तो सियासत में न कोई स्थाई दोस्त होता है और न कोई स्थाई दुश्मन, लेकिन कुछ ज़ख्म ऐसे होते हैं जिन्हें वक़्त भी नहीं भर पाता। उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक ऐसा बम फोड़ा, जिसने पूरी कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर दिया। रहीम के दोहे का सहारा लेते हुए हरदा ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को लपेटा। उन्होंने साफ कहा कि जिस व्यक्ति ने 2016 में स्टिंग ऑपरेशन करके कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को गिराने का पाप किया था, आज कांग्रेस के ही कुछ नेता उसका महिमामंडन कर रहे हैं, उसे हीरो बना रहे हैं! हरदा का इशारा साफ़ था—निशाना खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार पर था, जिनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज़ थीं, लेकिन दोस्तो हरीश रावत ने तीर छोड़ा तो पलटवार भी उतना ही तीखा और ज़हरीला होना था। खानपुर के विधायक उमेश कुमार ने बिना किसी डर के, सीधे हरीश रावत को संबोधित करते हुए एक ‘खुला पत्र’ जारी कर दिया। उमेश कुमार ने लिखा—‘हरदा, आपकी कांग्रेस आपको मुबारक हो। मेरे नाम पर अपनी सियार वाली सियासत का रंग मत दिखाइए।’ उमेश कुमार ने साफ कर दिया कि वो किसी भी कीमत पर कांग्रेस में नहीं जा रहे हैं, उन्होंने अपनी खुद की ‘जन निर्माण पार्टी’ बना ली है। लेकिन उन्होंने हरदा से एक चुभता हुआ सवाल पूछा—आखिर हरीश रावत को एक निर्दलीय विधायक से इतना डर क्यों लगता है? बड़े-बड़े दिग्गजों की नज़र हमेशा खानपुर सीट पर ही क्यों टिकी रहती है?
दोस्तो इस जंग को समझने के लिए हमें 2016 के उस काले अध्याय में जाना होगा, जब उमेश कुमार एक खोजी पत्रकार हुआ करते थे और उनके एक स्टिंग ऑपरेशन ने हरीश रावत सरकार की चूलें हिला दी थीं। उसी स्टिंग के बाद हरीश रावत को मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी और राष्ट्रपति शासन लगा था। आज 10 साल बाद भी हरीश रावत उस जख्म को भूले नहीं हैं। यही वजह है कि जैसे ही उमेश कुमार की कांग्रेस के कुछ नेताओं से नजदीकियां बढ़ीं, हरदा ने दिल्ली दौड़ लगा दी। पार्टी प्रभारी कुमारी सैलजा और के.सी. वेणुगोपाल के सामने उन्होंने अपनी सख्त नाराजगी दर्ज कराई है कि पार्टी किसी भी कीमत पर उस शख्स को तवज्जो न दे जिसने कभी पीठ में छुरा घोंपा था। दोस्तो यह जंग सिर्फ फेसबुक के दो पोस्ट्स तक सीमित नहीं है। यह उत्तराखंड की राजनीति के उस बड़े टकराव का ट्रेलर है जो 2027 के चुनावों में देखने को मिलेगा। उमेश कुमार ने हरीश रावत को खुली चुनौती दे दी है कि वो खानपुर की धरती पर आएं और जनता तय करेगी कि असली हीरो कौन है और सियार कौन! वहीं हरीश रावत अपनी ‘जनसंवाद यात्रा’ के जरिए खुद को कांग्रेस का इकलौता चेहरा साबित करने में जुटे हैं, और इस सियासत को विपक्षी यानि बीजेपी से जुड़े लोग अपने चश्मे देख भी रहे हैं, चलिए बीजेपी वाले मौके का फायदा उठाना जानती है। वैसे सीएम की रेस में कई चेहरों को लेकर कांग्रेस में जंग पूरानी रही है, लेकिन दोस्तो हरीश रावत की कांग्रेस प्रदेश संगठन और हाईकमान के आदेशों के खुल्लेआम धज्जियां उड़ाने का कारण हरिद्वार के खानपुर से निर्दलील विधायक उमेश कुमार हैं। इस सियासी महाभारत ने यह तो साफ कर दिया है कि देवभूमि की राजनीति में आने वाले दिन बेहद आक्रामक और दिलचस्प होने वाले हैं! आप क्या कहेंगे खबर को लेकर कमेंट कर जरूर बताएं।