BJP MLA ने क्रांतिकारी को बताया बुद्धिहीन, कैसे मची खलबली?। Dilip Rawat। CM Dhami l Uttarakhand News

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दोस्तो क्या उत्तराखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के सम्मान पर सवाल उठाने वाला बयान एक जनप्रतिनिधि को शोभा देता है? क्या पेशावर कांड के नायक के लिए यह कहना कि “उनमें बुद्धि नहीं थी” केवल एक निजी राय है या फिर इतिहास और शहीदों के सम्मान पर चोट? और क्या यही वजह है कि अब इस बयान ने उत्तराखंड की सियासत में तूफान खड़ा कर दिया है? बताउंगा आपको कैसे अपने अपने एक विधायक के विवादित बयान से घिर गई बीजेपी और सरकार। दोस्तो लैंसडाउन से बीजेपी विधायक दिलीप रावत के वायरल बयान के बाद कांग्रेस हमलावर है। कांग्रेस ने इसे वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और उत्तराखंड के गौरव का अपमान बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष से सार्वजनिक माफी की मांग की है। आखिर विधायक ने ऐसा क्या कहा, जिस पर पूरे प्रदेश में बहस छिड़ गई? सबसे अपने आप देखिए वो विडियो जिसने बीजेपी के साथ सीएम धामी को भी असहज कर दिया। दोस्तो उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, लेकिन उससे पहले ही उत्तराखंड में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। ताजा मामला लैंसडाउन भाजपा विधायक दिलीप रावत से जुड़ा है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान पेशावर कांड के नायक रहे वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर कथित विवादित बयान देने के बाद सियासत तेज हो गई है। जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने उनके बयान की निंदा की है। साथ ही कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को मांगी मांगनी चाहिए, तो क्या बीजेपी के विधायक मांफी मांगेगे। क्या बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया देंगे। कांग्रेस तो सीएम धामी से भी रिएक्शन चहाती है, तो क्या कहेगी बीजेपी अपने विधायक के इतने बेहतरीन बयान पर। दोस्तो लैंसडाउन से बीजेपी विधायक दिलीप रावत के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर दिए विवादित बयान घमासान मच गया है। मामले को लेकर कांग्रेस धामी सरकार रो घेर रही है।

वहीं दिलीप रावत के बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने लैंसडाउन विधायक के इस बयान को उत्तराखंड के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान बताया है। उन्होंने कहा कि उनका वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर दिया गया बयान बहुत ही निंदनीय है। कांग्रेस पार्टी इसकी घोर निंदा करती है। गोदियाल ने दिलीप रावत से तत्काल अपना बयान वापस लिए जाने की मांग की है। गणेश गोदियाल ने कहा कि आजादी के स्वतंत्रता संग्राम के समय वीर चंद्र गढ़वाली की भूमिका क्या रही, इस पर भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं ने रेखांकित किया है. निश्चित रूप से उत्तराखंड को गौरव का एहसास उस वक्त हुआ, जब स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेताओं ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की भूमिका को उम्दा बताया था। किंतु आज के समय के विधायक उनको ऐसे शब्दों से नवाज रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं। गणेश गोदियाल ने कहा कि दिलीप रावत के बयान पर वह चाहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी को विधायक के बयान पर जरा भी अफसोस है तो पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री को इस पर अपना बयान जारी करते हुए तत्काल माफी मांगनी चाहिए। दरअसल देहरादून में स्वरोजगार दिवस कार्यक्रम में अपने संबोधन में विधायक दिलीप रावत ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर एक विवादित बयान दे दिया। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी बीजेपी पर आक्रामक हो गई है और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री से दिलीप रावत के बयान पर माफी मांगने की मांग की है। दोस्तो आपको बतादूं कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली (मूल नाम: चंद्र सिंह भंडारी) एक महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और रॉयल गढ़वाल राइफल्स के एक वीर सैनिक थे। वे 23 अप्रैल 1930 के ऐतिहासिक ‘पेशावर कांड’ के नायक के रूप में अमर हैं, जहाँ उन्होंने निहत्थे पठानों पर गोली चलाने के ब्रिटिश आदेश को मानने से इंकार कर दिया था, तो देखा आपने। एक बयान ने कैसे उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सवाल सिर्फ एक विधायक के शब्दों का नहीं, बल्कि उस विरासत का भी है जिसे उत्तराखंड अपनी सबसे बड़ी पहचान मानता है।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली केवल एक नाम नहीं हैं, बल्कि साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक हैं। पेशावर कांड में उन्होंने निहत्थे लोगों पर गोली चलाने से इनकार कर इंसानियत और देशभक्ति की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे इतिहास हमेशा याद रखेगा।अब इस पूरे मामले में कांग्रेस भाजपा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से माफी की मांग कर रही है। वहीं सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा विधायक दिलीप रावत अपने बयान पर सफाई देंगे या उसे वापस लेंगे? क्या भाजपा नेतृत्व इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगा? और क्या मुख्यमंत्री धामी इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ेंगे?इन सभी सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिल सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि चुनावी माहौल में नेताओं का हर शब्द राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा असर छोड़ता है। ऐसे में इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों और उत्तराखंड के गौरव से जुड़े विषयों पर बयान देते समय जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की अपेक्षा और भी बढ़ जाती है।फिलहाल इस पूरे विवाद पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि इस बयान पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण या माफी आनी चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।