BKTC कर्मचारी संघ ने खोला मोर्चा | Chardham Yatra | Employee Protest | CM Dhami | Uttarakhand News

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चारधाम यात्रा के बीच अब एक नया विवाद सामने आ गया है, जहां बद्री-केदार मंदिर समिति कर्मचारी संघ ने खुलकर नाराजगी जाहिर की है। संघ ने अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं और अब यह मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी बात है जिसने यात्रा के बीच कर्मचारियों को मोर्चा खोलने पर मजबूर कर दिया? क्या व्यवस्थाओं में कहीं बड़ी चूक हो रही है? और क्या इसका असर चारधाम यात्रा पर भी पड़ सकता है इन्हीं सवालों के जवाब जानेंगे इस रिपोर्ट मे। दोस्तो चारधाम यात्रा के ठीक बीच में ये चौकाने वाली बड़ी खबर आ रही है, जहां कई सवाल हैं। दोस्तो उत्तराखंड चारधाम यात्रा इस वक्त अपने चरम पर है। देश-विदेश के बड़ी संख्या में श्रद्धालु चारधाम में दर्शन करने के लिए पहुंचे रहे है। इसी बीच बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कर्मचारियों ने अपनी कुछ मांगों को लेकर नाराजगी जताई है। चारधाम यात्रा के बीच बीकेटीसी कर्मचारियों का बढ़ता असंतोष अब प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। दरअसल, दोस्तो बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी संघ ने लंबित पदोन्नति को लेकर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी को पत्र लिखा है. पत्र के जरिए बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। दोस्तो यहां आपको बता दूं कि कर्मचारियों का कहना है कि वे चारधाम यात्रा के सुचारु संचालन की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। संघ के अनुसार साल 2022 से पदोन्नति की प्रक्रिया ठप पड़ी है, जिससे कर्मचारियों में निराशा और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं जब आप इस पत्र को देखेंगे पढंगे तो इसमें ये लिखा गया है कि जोशीमठ स्थित कार्यालय में आयोजित उप-समिति की बैठक में पदोन्नति को लेकर अनुशंसा की गई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। दोस्तो कर्मचारियों का आरोप है कि इस देरी ने उनके मनोबल पर सीधा असर डाला है। वहीं दोस्तो कर्मचारी संघ ने मांग की है कि मंदिर सेवा नियमावली के तहत विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) का जल्द पुनर्गठन किया जाए और समयबद्ध तरीके से पदोन्नति सुनिश्चित की जाए। उनका मानना है कि इससे न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि यात्रा व्यवस्थाएं भी और अधिक सुदृढ़ होंगी।

वहीं अब बीकेटीसी कर्मचारियों के इस आक्रोष पर प्रतिक्रियांए भी तीखी आ रही हैं। दोस्तो जानकारों का ये मानना है कि चारधाम यात्रा जैसे राष्ट्रीय महत्व के आयोजन के दौरान कर्मचारियों की नाराजगी को नजरअंदाज करना प्रशासन के लिए भारी पड़ सकता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका असर यात्रियों की सुविधाओं और समूची व्यवस्थाओं पर पड़ना तय है तो दोस्तों, चारधाम यात्रा के इस चरम दौर में उठी ये नाराजगी अब सिर्फ कर्मचारियों का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि सीधे-सीधे व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से भी जुड़ती नजर आ रही है। दोस्तो एक तरफ लाखों श्रद्धालु आस्था लेकर धाम पहुंच रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारी खुद असंतोष में हैं—ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिना मजबूत और संतुष्ट सिस्टम के इतनी बड़ी यात्रा सुचारु रह पाएगी?क्या समय रहते कर्मचारियों की मांगों पर फैसला लिया जाएगा?क्या प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को शांत कर पाएगा?और सबसे अहम—क्या इसका असर चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं पर पड़ेगा?अब नजर इस बात पर है कि आस्था के इस महापर्व के बीच सरकार और प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटते हैं।