जी हां दोस्तो जिस बात का डर थो वो ही होता दिखाई दे रहा है, केदारनाथ में भारी बवाल की तस्वीरें सामने आई तो हड़कंप मच गया। इस बार किसी बाहरी या श्रद्धालुंओं ने नहीं किया हंगामा, इस बार बढ़ते वीआईपी कल्चर और तमाम परेशानियों पर फूछा है तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा ऐसा गुस्सा फूटा की निशाने पर है बीकेटीसी वो बीकेटीसी जो बद्री केदार की छोटी से बड़ी व्यवस्था को देखती है और नारे तो मुर्दाबाद के लग रहे हैं हेमंत द्विवेदी भी सोच में पड़े हैं कि आगे क्या किया जाए। दोस्तो बड़ी हैरानी होती है जब भगवान के दर ही हंगामा ऐसा कि दुनिया भी देख कर दंग रह जाए। दोस्तो क्या केदारनाथ धाम में आस्था से ज्यादा अब VIP कल्चर हावी होता जा रहा है? आखिर क्यों तीर्थ पुरोहितों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया? ये सब यू हीं नहीं इसके बीचे की वजह बड़ी है और बेहद ही चुनौतीपूर्ण है और सवाल कई हैं क्या आस्था के सबसे पवित्र धामों में अब नियमों से ज्यादा रसूख चलने लगा है? और अगर VIP दर्शन पर रोक है, तो फिर ये विशेष दर्शन आखिर किसके इशारे पर जारी हैं? दोस्तो श्री केदारनाथ धाम में मौजूदा माहौल पूरी तरह गर्म है। आस्था, व्यवस्था और प्रशासन—तीनों एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। कारण है बढ़ता हुआ VIP कल्चर, जिस पर अब तीर्थ पुरोहित खुलकर सड़क पर उतर आए हैं।
दोस्तो नज़ारा साधारण नहीं था। धाम की पवित्रता के बीच गूंजते नारे—“मुर्दाबाद मुर्दाबाद” और निशाने पर कोई और नहीं, बल्कि हेमंत द्विवेदी और बद्री-केदार मंदिर समिति की कार्यप्रणाली के खिलाफ गुस्सा तमाम है। दोस्तो जहां बाबा केदार के जयकारे गूंजते थे जहां बोल बम बोल बम सुनाई देता था वहां आज ऐसी स्थिति बन चुकी है कि मुर्दाबाद मुर्दाबाद के नारे सुनाई दे रहे हैं। ऐसा नहीं इस बात की जानकारी सरकार प्रशासन या फिर बीकेटीसी को नहीं लेकिन फिर ना जाने ऐसी कौन सी मजबूर है कि स्थानिय जनाता देश विदेश के आम श्रद्धालुंओ की भवनाओं को किनारे कर बीकेटीसी वो तामाम फैसले लेता है जो अब सीधे तौर पर केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों को ही नागवार गुजर रहे हैं इसलिए तो ये नारे हैं ये माहौल है। कहने वाले वाले तो कहते हैं की वीआईपी दर्शन पर रोक है लेकिन धाम में BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के विरोध में तीर्थ पुरोहितों ने जमकर नारेबाज़ी की ह। सरकार ने चारधाम यात्रा की शुरुआत में ही VIP दर्शन को पूरी तरह से बैन करने की बात कहीं थी. लेकिन जिस तरह से VIP दर्शन जारी है। अब महेद्र भट्ट जितना भी मेनेजिबल बयान देदें लेकिन जमीनी तस्वीर किसी छिपी नहीं है।
दोस्तो ऐसे में अब तीर्थ पुरोहित भी इस व्यवस्था से खासे नाराज हो गए है। वहीँ बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने भी VIP दर्शन को बंद करने की बात कहीं है तो क्या धाम में दर्शन सबके लिए बराबर हैं या फिर कतारों के बीच कोई VIP रास्ता भी चलता है? दोस्तो तीर्थ पुरोहितों का साफ आरोप है कि सरकार ने VIP दर्शन पर रोक का ऐलान किया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। आम श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहते हैं, जबकि विशेष लोगों को प्राथमिकता मिलने की बातें अब खुलकर सामने आ रही हैं तो क्या यह सिर्फ व्यवस्था की चूक है या फिर किसी बड़े सिस्टम की अनदेखी?पुरोहितों का गुस्सा यहीं नहीं रुका। उनका कहना है कि धाम में आस्था के नाम पर दो अलग-अलग सिस्टम चल रहे हैं—एक आम श्रद्धालुओं के लिए और दूसरा खास मेहमानों के लिए। यही असमानता अब विवाद की जड़ बन चुकी है। दोस्तो अब बड़ा सवाल यह भी उठता है—अगर सरकार खुद VIP दर्शन पर रोक की बात कर चुकी है, तो फिर यह व्यवस्था धाम तक कैसे पहुंच रही है?क्या नियम सिर्फ कागजों पर हैं? या फिर उनके पालन में कहीं न कहीं ढील दी जा रही है?हाल ही में धाम में चर्चित हस्तियों के दर्शन के बाद यह विवाद और तेज हो गया है। लेकिन सवाल सिर्फ किसी एक व्यक्ति या यात्रा का नहीं है—सवाल पूरे सिस्टम की पारदर्शिता का है।तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि आस्था की रक्षा की लड़ाई है। उनका आरोप है कि अगर यही स्थिति रही तो आम श्रद्धालुओं का भरोसा टूट सकता है।तो क्या आने वाले समय में प्रशासन इस विवाद को सुलझा पाएगा? या फिर केदारनाथ धाम में VIP बनाम आम श्रद्धालु की यह बहस और गहरी होती जाएगी?फिलहाल हालात तनावपूर्ण हैं, मांगें साफ हैं—VIP एंट्री पूरी तरह बंद हो, और हर श्रद्धालु को एक समान दर्शन मिले।लेकिन असली सवाल अभी भी वही है—“क्या केदारनाथ में आस्था सबसे ऊपर है, या फिर VIP संस्कृति?