दोस्तो अपनी मित्र पुलिस फिर चर्चा में हैं इस बार खूब सुर्खियां इस बात को लेकर बटोर रही है कि पुलिस कर्मियों द्वारा दून की सड़कों पर जो कारनामा किया वो सिर्फ सवाल करने वाला दिखाई दिया, बल्कि बेहद ही क्रुरता का प्रकाष्ठा को पार करता दिखाई दिया। मैने जब वो तस्वीर देखी तो रुह तक कांप कई आखिर ऐसा क्या गुनाह किया जा रहा था दूहरादून के एक नीजी कॉलेज के के बाहर जो पुलिस को जाम खुलवाने के नाम पर ऐसा हल्का बल प्रयोग किया कि एक युवक बेहोश तक हो गया। पूरी खबर बताता हूं आपको और वो पुलिस जिससे हल्का बल प्रयोग किया कह रही है उसकी तस्वीर भी दिखाता हूं। दोस्तो देहरादून के थाना प्रेमनगर क्षेत्र स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी में आयोजित युवा फेस्ट के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब छात्रों की भारी भीड़ को हटाने के दौरान पुलिस और एक युवक के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला लाठीचार्ज तक पहुंच गया तो क्या भीड़ को नियंत्रित करने का यही एकमात्र तरीका था, या फिर हालात हाथ से निकल चुके थे? दोस्तो दरअसल, यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर बड़ी संख्या में छात्र जमा हो गए थे, जिससे यातायात बाधित हो रहा था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने जब व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की, तो एक युवक से बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते टकराव में बदल गई और फिर क्या था अब देखिए अपनी मित्र की बड़ी कार्रवाई ऑन दी रोड कर दी।
जी हां दोस्तो इस तस्वीर पर अपनी दून की मित्र पुलिस की खूब किरकिरी हो रही है, लेकिन हुया क्या था। जब सड़क पर जाम था तो फिर क्या हूआ। दोस्तो पुलिस द्वारा युवक को पकड़ने के प्रयास में वह भागने लगा, और कुछ ही देर बाद उसे पकड़कर कथित तौर पर लाठीचार्ज किया गया, जिसके बाद युवक के बेहोश होने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। जी हां दोस्तो ये दोनों तस्वीरें चिल्ला कर कई सवाल कर रही है पहली तस्वीर पुलिस की बेरहमी वाला एक्शन और दूसरी तस्वीर उस एक्शन का परिणाम तय आप करना ये कार्रवाई के नाम पर क्या है कयोंकि माना दोस्तो पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई हालात को संभालने के लिए जरूरी थी, लेकिन इसमें संयम की कमी दिखाई दी? दोस्तो जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने घटना का संज्ञान लिया। मामले में एक दरोगा और एसआई को लाइन हाजिर कर दिया क्या इतनी भर कार्रवाई काफी है पुलिसिया कुरुरता पर या फिर कुछ और होना चाहिए।
दोस्तो बताया ये गया कि थाना प्रेमनगर में तैनात दरोगा और सिपाही दोनों ने जिस तरह से युवक को बेरहमी से पीटा ये दिखाई भी दे रहा है लेकिन दोस्तो इसको पुलिस अपने गैर जिम्मेदाराना बयान मैनेज करने की कोशिश कर रही है। अरे साहब जब ये हल्का बल प्रयोग है तो फिर भारी बल प्रयोग क्या होता है उसकी परिभाषा भी बता देते। दोस्तो नियम तोड़ने कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई बेहद जरूरी है, लेकिन कार्वाई के नाम पर कुरुरता और पुलिसिया गुंडागर्दी पर सवाल होना ही चाहिए। हालांकि वीडियो सामने आने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। दोस्तो, सवाल अब सिर्फ एक घटना का नहीं है, सवाल उस भरोसे का है जिसे हम “मित्र पुलिस” कहते हैं।क्या व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किया गया यह “बल प्रयोग” वाकई जरूरत था या फिर संयम की सीमा टूट गई?एक तरफ कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और दूसरी तरफ एक युवक का बेहोश होना—क्या दोनों के बीच संतुलन खो गया?SSP द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए दरोगा और SI को लाइन हाजिर तो कर दिया गया है लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ लाइन हाजिर करना ही काफी है?क्या इस तरह की घटनाओं पर सिर्फ विभागीय कार्रवाई ही समाधान है, या फिर जवाबदेही और पारदर्शिता और सख्त होनी चाहिए?और सबसे बड़ा सवाल—क्या सड़क पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए “संयम” ज्यादा जरूरी था या “सख्ती”? जवाब आपके हैं, सोचिए भी और बताइए भी।