उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर राज्य के ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ₹2,708 करोड़ की विकास परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) के तहत तैयार किए गए इस प्रस्ताव में 1,777 किलोमीटर लंबी 315 नई सड़कों और 32 महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण शामिल है, जिससे प्रदेश की 610 दूरस्थ बसावटों को हर मौसम में चालू रहने वाली पक्की सड़कों से जोड़ा जा सकेगा। केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए इसे आगामी सप्ताह के भीतर औपचारिक मंजूरी देने का आश्वासन दिया है।मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पर्वतीय इलाकों की आवश्यकताओं को देखते हुए 1,360 किलोमीटर लंबी 213 अतिरिक्त सड़कों का प्रस्ताव भी केंद्र के समक्ष रखा, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन सड़कों के बनने से सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों के ग्रामीणों, विद्यार्थियों और मरीजों को आवागमन में सुविधा मिलेगी तथा स्थानीय कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों, पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन की चुनौतियों तथा ग्रामीण आबादी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के अंतर्गत राज्य द्वारा व्यापक स्तर पर सड़क एवं सेतु निर्माण के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का महत्वपूर्ण आधार है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विशेष महत्व है। ऐसे में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क नेटवर्क का विस्तार राज्य की विकास प्राथमिकताओं में शामिल है। सड़क संपर्क बेहतर होने से किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी। स्थानीय उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था सुदृढ़ होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार एवं उद्यमिता की संभावनाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय पर्यटन गतिविधियों और उनसे जुड़े व्यवसायों को भी लाभ मिलने की संभावना है।