दोस्तो क्या देवभूमि पर दिए गए उन तमाम विवादित बयानों पर अब बवाल तय है ये इसलिए पूछ रहा हूं कि एक तरफ उत्तराखंड -हरियाणा को लेकर जो सोशल वॉर चल रही है। उस आग में घी डालने का काम किया है एक भगवाधारी ने और हरियाणा के एक नेता ने उत्तराखंड को हरियाणा बनाने का सपना पाले हैं नेता जी तो दूसरा कालनेमि पहाड़ियों की तुलना कुत्ता बिल्ली से कर रहा है। अब इन का क्या किया जाय, पूरी खबर दिखा रहा हूं। गौर कीजिएगा जवाब दीजिएगा खबर पूरी देखने के बाद जरूर। दोस्तो एक तरफ हरियाणा के कुछ लोग उत्तराखंड अपनी देवभूमि को गंदा करते हैं। उत्पात तमाम मचाते हैं नंगई करते दिखाई देते हैं। वहीं दूसरी ओर उनके हिमायती सोशल मीडिया के माध्यम से उत्तराखंक को गालिया दे रहे हैं, लेकिन मै आज दो ऐसे लोगों के बयान आपको दिखाने जा रहाहूं यकिन मानिये आपका खून खौला देंगे दोनों बयान। दोस्तो कहा ये जाता है कि बिना सियासी समर्थन के कोई काम उतना आसान नहीं होता जितना वो सियासी कनैक्शन के बाद हो जाता है। हाल में जो ऋषिकेश में हुआ वो सबने देखा उसके बाद एक अलग तरह की आग उत्तराखंडियों को लेकर हरियाणा वालों में और हरियाणा के कुछ लोगों की करतूत और कुछ के सोशम बयानों ने पहाड़ियों को गुस्सा दिलाने का काम किया है, लेकिन क्या जो कुछ भी बीते दिनों से चल रहा है उत्तराखंड बनाम हरियाणा इसका सियासी कनैक्सन है मै कहूंगा हां है अब मै ये क्यों कह रहा हूं वो बताता हूं। हरियाणा का एक नेता ये बयान दे रहा है कि वो उत्तराखंड को हरियाणा बना देंगे। अब ये अभी का बयान है या पूराना है लेकिन इसकी चर्चा खूब हो रही है क्या ऐसे लोग कोइ साजिश कर रहे हैं अपने उत्तराखंड को लेकर। तो दोसतो सुना आपने हरियाणा को छोड़ेंगे नहीं बल और उत्तराखंड को हरियाणा बना देंगें।
दोस्तो एक तरफ तो हरियाणा के कुछ उपद्रवियों ने जहां देखो वहाँ आतंक मचाया हुआ है और वहीं ये करतार सिंह भड़ाना जी हरियाणा से उत्तराखंड विधानसभा का उपचुनाव लड़ने क्या आए। ये हमारी देवभूमि को भी हरियाणा बनाने की सोच रहे हैं अब हम ‘पहाड़ियों’ को इनसे कौन बचाएगा? बल क्योंकि ये तो इतनी बड़ी साजिश रच रहे हैं लेकिन करतार सिंह भडाना हैं कौन दो बार उन्होंने हरियाणा की समालखा विधानसभा से और एक बार हरियाणा के सहकारिता मंत्री के रूप में कार्य किया। एक बार उन्होंने उत्तर प्रदेश के खतौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक का प्रतिनिधित्व किया। 1999 में, भड़ाना ने हरियाणा राज्य में आईएनएलडी सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। करतार सिंह भड़ाना ने उत्तराखंड की मंगलौर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था उन्होंने BJP के उम्मीदवार के तौर पर 2024 में हुए उपचुनाव में इस सीट से अपनी किस्मत आजमाई थी. लेकिन हार का सामना करना पड़ा अब इनका ये बयान कई सवाल खड़े गर रहा है। तो इनलोगों की मनसा तो बड़ी है भाई लेकिन प्रदेश में एक कालनेमि भी देखना को मिला है जो उत्तराखंड-हरियाणा विवाद पर पहाड़ियों को सीधे गाली दे रहा है। कुत्ता बिल्ली कर रहा है। देख लो दोस्तो अब ये फ़र्ज़ी किस्म के भगवाधारी भी उछल कूद करने लगा कावड़ का खूब फ़ायदा उठाया तुमने फॉलोअर्स और रोटी पानी का जुगाड़ यही हरिद्वार से ही किया है अभी तक ! ऐसे माहौल में आग लगाने वालो के ख़िलाफ़ कार्यवाही होनी चाहिए नहीं तो इस बार कावड़ में माहौल बिगाड़ने के प्रयास करेंगे ये इसको गंभीरता से लेना चाहिए। दोस्तो अब इनकी नजर कावड़ यात्रा पर भी है यानि की उत्तराखंड की सरकार प्रशासन को और ज्यादा चौकन्ना होने की जरूरत है, तो दोस्तों आपने देखा। कैसे सोशल मीडिया के जरिए बयानबाज़ी, भड़काऊ शब्द और विवादित टिप्पणियां लगातार माहौल को गर्माने का काम कर रही हैं। एक तरफ देवभूमि की शांति, संस्कृति और आस्था की बात होती है और दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे बयान देकर उत्तराखंड और यहां के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है —क्या सोशल मीडिया पर इस तरह आग भड़काने वालों पर अब सख्त कार्रवाई होगी?क्या धार्मिक आयोजनों और कांवड़ यात्रा जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर प्रशासन पहले से ज्यादा सतर्क होगा? क्योंकि अगर समय रहते ऐसे विवादित बयानों और माहौल बिगाड़ने की कोशिशों पर रोक नहीं लगी,तो इसका असर सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तराखंड देवभूमि है यहां आस्था भी है, संस्कृति भी है और भाईचारे की परंपरा भी। इसलिए जरूरत इस बात की है कि कोई भी व्यक्ति, चाहे वह नेता हो, कथावाचक हो या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अगर समाज में तनाव फैलाने की कोशिश करे, तो कानून अपना काम जरूर करे। फिलहाल इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है?क्या ऐसे बयानों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दीजिएगा।