क्या पहाड़ों की खूबसूरती अब ट्रैफिक जाम में फंसती जा रही है? क्या पर्यटन और चारधाम यात्रा का बढ़ता दबाव पहाड़ी सड़कों की क्षमता से ज्यादा हो चुका है? आखिर क्यों 50 किलोमीटर का सफर तय करने में 8 घंटे लग रहे हैं?हिमाचल से लेकर उत्तराखंड तक सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें हैं, पर्यटक और स्थानीय लोग घंटों जाम में फंसे हैं। सवाल यह है कि पहाड़ों में बढ़ती भीड़ का समाधान क्या है और कब मिलेगी इस महाजाम से राहत? बताउँगा आपको पूरी खबर। जी हां दोस्तो ये खबर पहाड़ों पर महाजाम की। गर्मी से राहत की तलाश में उमड़ा सैलाब, हिमाचल से उत्तराखंड तक थम गई रफ्तार गांडियों का तो लग रहा था जाम, इंसानी जाम ने भी कर दिया प्रशासन को हल्कान। दोस्तो उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इस समय गर्मी अपने चरम पर है। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है। ऐसे में लाखों लोग राहत की तलाश में पहाड़ों की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन पहाड़ों की ठंडी वादियों तक पहुंचने की यह चाहत अब एक नई समस्या को जन्म दे रही है। हिमाचल प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक सड़कों पर वाहनों का ऐसा दबाव है कि कई जगह लोगों को 50 किलोमीटर का सफर तय करने में 7 से 8 घंटे तक लग रहे हैं। पर्यटन स्थलों पर होटल हाउसफुल हैं, पार्किंग की जगह कम पड़ रही है और सड़कों पर कई किलोमीटर लंबे जाम आम बात बन चुके हैं। दोस्तो हिमाचल प्रदेश के मनाली और रोहतांग दर्रे में इन दिनों पर्यटकों का भारी सैलाब उमड़ रहा है। मई के अंतिम दिनों में भी रोहतांग की बर्फ लोगों को आकर्षित कर रही है। समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित रोहतांग दर्रा अभी भी बर्फ की चादर से ढका हुआ है..लेकिन इस खूबसूरत नजारे तक पहुंचने की राह आसान नहीं है। मनाली-रोहतांग मार्ग पर हालात ऐसे हैं कि सुबह 6 बजे निकले पर्यटक दोपहर 1 या 2 बजे रोहतांग पहुंच पा रहे हैं। सामान्य तौर पर डेढ़ से दो घंटे में पूरा होने वाला सफर अब 7 से 8 घंटे में पूरा हो रहा है। कई जगह पांच किलोमीटर से अधिक लंबा जाम लगा हुआ है।
पर्यटक बताते हैं कि उन्हें घंटों तक वाहनों में बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सफर और भी कठिन साबित हो रहा है अब बात उत्तराखंड की करता हूं यहां हालात और बिकट हैं एक तरफ गाड़ियों तो जाम में फंसी ही हैं। इंसान पैदल चल रहा है तो पैदल चलने वालों का भी लग गया भीषण जाम पहले आपको वहनों की जाम की तस्वीर दिखा रहा हूं। जी हां दोस्तो रिकॉर्ड बनाने और हर जगह भीड़ जुटाने की होड़ ने नाज़ुक हिमालयी क्षेत्रों को मानो दुनिया की सबसे लंबी पार्किंग में बदल दिया है। उत्तराखंड के जोशीमठ में हालात ऐसे हैं कि विष्णुप्रयाग से लेकर कई किलोमीटर आगे तक करीब 25-30 किलोमीटर लंबा जाम लगा हुआ है। हजारों पर्यटक घंटों से अपनी गाड़ियों में फंसे हैं। सवाल सिर्फ ट्रैफिक का नहीं है, बल्कि हिमालय की क्षमता और उसके भविष्य का भी है। क्या हम पर्यटन और विकास के नाम पर पहाड़ों पर इतना बोझ डाल रहे हैं कि वे अब सांस भी नहीं ले पा रहे? उत्तराखंड की सरोवर नगरी नैनीताल में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। वीकेंड के दौरान शहर में पर्यटकों की इतनी भीड़ उमड़ रही है कि माल रोड, स्नो व्यू, चिड़ियाघर, केव गार्डन और आसपास के तमाम पर्यटन स्थल लोगों से खचाखच भरे हुए दिखाई दे रहे हैं। नैनी झील में नौकायन के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। सुबह से लेकर देर शाम तक बोटिंग का सिलसिला जारी रहता है। पहाड़ों की ठंडी हवाएं और सुहावना मौसम लोगों को आकर्षित कर रहा है, लेकिन बढ़ती भीड़ ट्रैफिक व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। बाबा नीम करौली महाराज के प्रसिद्ध कैंचीधाम में भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं और दोस्तो हद तो तब देखने को मिल रही है जब पैदल चलने वालों का जाम लग रहा है।
दोस्तो उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने चरम पर है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड पहुंच रहा है। इसके साथ ही हेमकुंड साहिब, औली, नीति-माणा घाटी और अन्य पर्यटन स्थलों पर भी लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। सबसे अधिक दबाव चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र पर पड़ रहा है। मारवाड़ी से गोविंदघाट और जोशीमठ से सेलंग तक कई स्थानों पर 15 से 20 किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है। कई यात्रियों को 2 से 3 घंटे तक ट्रैफिक खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। दोस्तो चमोली जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अभी भी कई जगह बारिश और बर्फबारी हो रही है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। बद्रीनाथ धाम में अब तक 7 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि चारधाम यात्रा में कुल यात्रियों की संख्या 24 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है।यह आंकड़े बताते हैं कि आस्था और पर्यटन दोनों ही रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं जहां एक ओर जाम और अव्यवस्था लोगों की परेशानी का कारण बन रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पर्यटन उद्योग के लिए यह सीजन किसी वरदान से कम नहीं है। होटल, होमस्टे, टैक्सी, रेस्टोरेंट और स्थानीय व्यापारियों का कारोबार तेजी से बढ़ा है। होटल संचालकों का कहना है कि लंबे समय बाद इतनी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। कई स्थानों पर होटल पूरी तरह बुक हैं। बढ़ती भीड़ के साथ प्रशासन की चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, लेकिन दोस्तो पहाड़ आज भी लोगों के लिए सुकून, आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का सबसे बड़ा केंद्र हैं। लेकिन बढ़ती भीड़ ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि बिना मजबूत बुनियादी ढांचे के पर्यटन और तीर्थाटन का दबाव संभालना आसान नहीं होगा। एक तरफ लोग गर्मी से राहत पाने के लिए पहाड़ों का रुख कर रहे हैं, दूसरी तरफ पहाड़ खुद भीड़ और जाम के बोझ तले दबते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में पहाड़ों की खूबसूरती और शांति को बचाते हुए पर्यटन का संतुलित मॉडल विकसित किया जा सकेगा? यही आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती होगी।