उत्तराखंड में अदम्य साहस दिखाने वाले नन्हे नायकों को सम्मानित करने के लिए धामी कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार’ योजना को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस ऐतिहासिक प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय पुरस्कारों की तर्ज पर शुरू की जा रही इस राज्य स्तरीय योजना का मुख्य उद्देश्य विपरीत परिस्थितियों में दूसरों की जान बचाने वाले बच्चों के हौसले को पहचानना और उनमें समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करना है। सूबे की महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे राज्य की बाल प्रतिभाओं के मान-सम्मान के लिए एक बड़ा कदम बताया है।
इस नई नीति के तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों से हर साल एक-एक बहादुर बच्चे (कुल 13 बच्चों) का चयन इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए किया जाएगा। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग को इस योजना का नोडल विभाग बनाया गया है, जो 18 वर्ष तक की आयु के योग्य बच्चों के साहसिक कारनामों की स्क्रूटनी करेगा। अंतिम रूप से चयनित होने वाले प्रत्येक वीर बच्चे को राज्य स्थापना दिवस (9 नवंबर) के अवसर पर मुख्यमंत्री के हाथों ₹51,000 की नकद पुरस्कार राशि, एक पदक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। गुलदार के हमलों, आपदा या किसी भी आपातकालीन संकट में अद्वितीय बहादुरी दिखाने वाले बच्चों को अब प्रांतीय स्तर पर यह बड़ा और विशिष्ट मंच मिल सकेगा।