दोस्तो देहरादून पूलिस का एक बड़ा एनकाउंटर चर्चा हैं, जहां ये कहा गया कि दूहरादून के अंकित के बूढे माता-पिता के 12 साल बाद इंसाफ मिल गया, लेकिन जब आप अंकित थपलियाल हत्याकांड के एक कड़वे सच को जानेंगे तो आपके पैरो तले जमीन खिसक जाएगी, तो क्या 12 साल का इंतज़ार सच में इंसाफ लेकर आया है, या कहानी का एक और अध्याय अभी बाकी है? कैसे देहरादून में हत्यारे अकरम के एनकाउंटर में ढेर होने के बाद भी उठ रहे सवाल, नहीं मिला अंकित थपलियाल के माता-पिता को पूरा न्यय बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो वैसे एक बारगी मुझे भी लगा कि अपनी देहरादून पुलिस अब तो तुरंत एक्शन ले रही है उसी का नतीजा जा कि 17 साल बाद गोलियों की गूंज से राजधानी हिल उठी लेकिन दोस्तो 12 साल पहले ऐसा क्या हुआ था कौन था अंकित थपलियाल किसने की थी हत्या, क्या अंकित थपलियाल हत्याकांड के सभी आरोपी पकड़े जा चुके है। जाहिर सी बात है आप सोच रहे होंगे कि 12 साल में तो परिवार को इंसाफ मिल ही गया होगा, लेकिन दोस्तो इसके पीछे का एक काला सच अब सामने आया है या यूं कहूं कि देहरादून में हुए चर्चित अंकित थपलियाल हत्याकांड में बड़ा मोड़ आया है। मुख्य आरोपी अकरम एनकाउंटर में ढेर हो गया है, लेकिन सवाल अब भी वही है—क्या यही पूरा इंसाफ है? क्या एक आरोपी के मारे जाने से 12 साल पुराना दर्द खत्म हो जाता है? या फिर यह सिर्फ शुरुआत है उस सच्चाई की, जिसमें अभी 5 और कातिलों का चेहरा सामने आना बाकी है? और दोस्तो सबसे बड़ा सवाल—जब मां खुद कह रही हैं कि “इंसाफ अभी अधूरा है”, तो क्या सिस्टम ने वाकई अपना काम पूरा किया है?
दोस्तो पुलिस एनकाउंटर के बाद दुनिया से जा चुके माता पिता का पहला रिएक्शन क्या था वो पहले देखिए। जी हां दोस्तो ये दोनों चेहरे याद कीजिए आज से ठीक 12 साल पहले जब इनके साथ एक घटना घटी और सब कुछ कुछ हत्यारों ने खत्म कर दिया। आज भले ही अंकित की मां पुलिस की तारीफ कर रही है, लेकिन इस तारीफ के पीछे उनके परिवार के कई सवाल भी हैं। दोस्तो देहरादून में हुए चर्चित अंकित थपलियाल हत्याकांड में करीब 12 साल बाद बड़ा मोड़ आया है। मुख्य आरोपी अकरम पुलिस एनकाउंटर में मारा गया, जिससे पीड़ित परिवार को लंबे समय बाद राहत और मानसिक शांति मिली, लेकिन दोस्तो अंकित की मां का कहना है कि अभी भी पांच हत्यारों को सजा मिलनी बाकी है तो फिर क्या कर रही थी पुलिस पिछले 12 सालों से और जिस अकरम को मारने के बाद पुलिस फूली नहीं समा रही है। उसका एनकाउंटर अंकित हत्याकांड को लेकर नहीं हुआ। एक लूट के मामले में हुआ है, तो फिर अकिंत हत्याकांड को ठंडे बस्ते में डाल चुकी है उत्तराखंड पुलिस। दोस्तो दरअसल, सितंबर 2014 में शामली निवासी अकरम अपने पांच साथियों के साथ नकरौंदा के बालावाला इलाके में लूट के इरादे से अंकित के घर में घुसा था। इस दौरान अंकित ने अपने परिवार की रक्षा करने की कोशिश की, लेकिन बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी, जिससे उनकी मौ’त हो गई। दोस्तो अंकित की हत्या के बाद उनके माता-पिता पूरी तरह टूट गए थे। डर के कारण वे अपनी बेटियों के पास बेंगलुरु, मुंबई और न्यूजीलैंड चले गए।
इस दर्दनाक घटना की याद आज भी उन्हें परेशान करती है और उनकी नींद उड़ा देती है। उस खौफनाक मंजर को भूलने के लिए उन्होंने अपने घर में भी बदलाव किए और अब ऊपर के हिस्से में रह रहे हैं। इतना ही नहीं दोस्तो अंकित के पिता सुरेंद्र थपलियाल ने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, उन्होंने सितंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की, लेकिन वहां से उन्हें नैनीताल हाईकोर्ट जाने को कहा गया। इससे निराश होकर उन्होंने केस से जुड़े दस्तावेज तक फाड़ दिए थे। हालांकि दोस्तो अब मुख्य आरोपी के मारे जाने के बाद उन्हें कुछ हद तक न्याय मिलने का एहसास हुआ है, लेकिन दस्तो दोस्तो एक मां तो मां होती है। अंकित की मां बेटे की तस्वीर हाथ में लेकर कहा कि अभी पांच हत्यारों को और सजा मिलनी बाकी है। जिस बेरहमी से उनके इकलौते बेटे की ह’त्या की गई, उसी तरह सभी आरोपियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। दोस्तो उनकी मांग है कि बाकी आरोपियों को फांसी दी जाए, तभी उन्हें पूरी तरह संतोष मिलेगा। अंकित के माता-पिता ने कहा कि अकरम को उसके कर्मों की सजा मिल चुकी है और इसके लिए उन्होंने देहरादून पुलिस का धन्यवाद किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बाकी पाँच आरोपियों को भी जल्द से जल्द पकड़कर सख्त सजा दी जानी चाहिए। नकरौंदा क्षेत्र के विवेक विहार में रहने वाले स्थानीय लोगों और परिवार की मांग है कि सोसायटी में अंकित थपलियाल के नाम पर एक गेट बनाया जाए। उनका मानना है कि अंकित ने अपने परिवार की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान की, इसलिए उनकी याद को हमेशा जीवित रखा जाना चाहिए, लेकिन दोस्तो सोचने वाली बात है कि 12 साल पहले हुए एक हत्याकांड में इंसाफ नहीं दिला पाई तो फिर किस बात की तारीफ होनी चाहिए। ये जो एनकाउंटर में अकरम नाम का अपराधी मारा गया, ये तो अंकित केस में फरार था लेकिन पुलिस ने इसे उस केस के तहत नहीं मारा जिस केस को लेकर एक दसक के बाद भी सिर्फ सवाल है। ये एनकाउंटर एक लूट के मामले में हुआ जो ताजा घटना है तो फिर बीते 12 सालों से पुलिस क्या कर रही थी। वो अंकित के 5 अन्य हत्यारोपी कहां हैं, उनके बारे में पुलिस के पास कोई ठोस जवाब है। अगर है तो फिर सार्वजनिक होना चाहिए और अंकित के माता पिता को भोरोसा देना चाहिए की उनको इंसाफ मिलेगा।