CM Dhami से गुहार लगाने को बच्चे क्यों मजबूर? | Almora | Gairsain | Education | Uttarakhand News

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दोस्तों सोचिए, अगर किसी बच्चे को स्कूल पहुंचने के लिए सुबह अंधेरे में घर से निकलना पड़े और वह देर शाम तक घर लौटे। ऊपर से जिस स्कूल में वह पढ़ता हो, वहां गणित और विज्ञान के शिक्षक ही न हों। तो उसका भविष्य कैसा होगा?उत्तराखंड से आज ऐसी ही दो तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर नन्हे छात्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हाथ जोड़कर कह रहे हैं—”हमें सड़क दिला दीजिए”। तो दूसरी ओर गैरसैंण के नवोदय विद्यालय में बोर्ड परीक्षा से महज़ पांच महीने पहले भी गणित और विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। सवाल यह है कि आखिर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट। दोस्तो सबसे पहले आप इस वीडियो को देखिए अपनी ही सरकार से कैसे गुहार लगाने को मजूबर हो गए स्कूली छात्र। हम रोज 8 घंटे पैदल चल कर 14–15 किलो मीटर की दूरी तय कर, स्कूल आते जाते हैं। हमारे गांव को रोड दे दो पुष्कर सिंह धामी सर.ये बच्चे अलमोड़ा जिले के भैंसियाछाना ब्लॉक के खानकारी गुंट गांव तिमरी तोक के हैं। 15 से अधिक छात्र, शिक्षा की खातिर रोजाना इस बेहद कठिन सफर को तय करते हैं। इन बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए सूरज उगने से पहले ही घर से निकलना पड़ता है। इस लंबे रास्ते पर पैदल चलने से होने वाली तकलीफ से बच्चे रास्ते में रोने लगते हैं.गांव में सड़क न होने के कारण वे न तो साइकिल चला सकते हैं और न ही कोई गाड़ी आ-जा सकती है.वर्षों से नेताओं, मुख्यमंत्रियों और क्षेत्र के विधायकों से गुहार लगाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई है। ग्रामीण कई सालों से ‘कासन बैंड’ से ‘तिमरी’ तक 7 किलोमीटर की सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। सड़क के लिए कई बार सर्वे तो हुए, लेकिन धरातल पर अभी तक सड़क नहीं बन सकी है। यह वीडियो चांदू नेगी नाम के स्थानीय व्यक्ति ने बनाया है इतने कष्टों के बाद भी बच्चे पढ़ाई करके बैंक मैनेजर, शिक्षक या सेना में जाना चाहते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उनका यह सफर बहुत संघर्षपूर्ण हो गया है।

वीडियो दोस्तो वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड शिक्षा विभाग ने अपनी प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि राज्य में कोई भी स्कूल 12 किलोमीटर की दूरी पर नहीं है और प्राथमिक विद्यालय अधिकतम 2 किलोमीटर के दायरे में उपलब्ध हैं। विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो में किए गए दावों के संबंध में संबंधित तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। उत्तराखंड सूचना विभाग ने बताया कि संबंधित गांव के लिए सड़क निर्माण का प्रस्ताव पहले ही तैयार किया जा चुका है। विभाग के अनुसार सड़क को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-4) के तहत मंजूरी मिल चुकी है। डीपीआर तैयार करने के लिए सर्वे पूरा हो चुका है। पहले यह सड़क PWD, अल्मोड़ा के अधिकार क्षेत्र में थी। सड़क का अलाइनमेंट मंजूर किया जा चुका है। फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया जारी है और संबंधित तकनीकी आपत्तियों (EDS) के समाधान के बाद आगे की कार्रवाई होगी। दोस्तो बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सड़क निर्माण का मुद्दा फिर चर्चा में है। अब ग्रामीणों और बच्चों को उम्मीद है कि प्रस्तावित सड़क का निर्माण जल्द शुरू होगा, जिससे उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकेगा। दोस्तो इस तस्वीर से इतर एक और खबर आई अपने गैरसैंण से जिसे राजधानी राजधानी कह कर ना जाने कितनी सरकारें बन गई.. यहां का मामला देखेंगे तो चौक जाएंगे। दोस्तो गैरसैंण के नवोदय विद्यालय का बुरा हाल, गणित-विज्ञान के टीचर नहीं, 5 महीने बाद हैं बोर्ड परीक्षाएं, SDM को ज्ञापन.. दे कर शिक्षकों की भीक मांगी जा रही है। दोस्तो सरकार भले ही पहाड़ों में बेहतर शिक्षा देना का दावा और वादा कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. एक और जहां स्कूलों की बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें खड़ी कर दी गई हैं। वहीं कई ऐसे विद्यालय भी हैं, जो आज भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं.अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को लेकर आये दिन लोग पहाड़ों से पलायन कर रहे हैं। कई बार लोगों को अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने को भी मजबूर होना पड़ता है. जिसका मुख्य कारण लोगों की मूल-भूत आवश्यकतायें हैं। आज हर व्यक्ति अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहता है, लेकिन सरकारी दावे और वादे उनके मंसूबों पर पानी फेर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सूबे की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण से आया है। यहां नौनिहाल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। दोस्तों, एक तरफ बच्चे सड़क मांग रहे हैं ताकि स्कूल पहुंच सकें, दूसरी तरफ स्कूल शिक्षक मांग रहे हैं ताकि बच्चों का भविष्य बन सके। सवाल सीधा है—क्या पहाड़ के बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ेगा?उम्मीद है कि सरकार इन दोनों मुद्दों पर जल्द ठोस कदम उठाएगी। क्योंकि बच्चों के सपने इंतज़ार नहीं करते।फिलहाल इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट में जरूर बताइए।