इतिहास में पहली बार! कुत्तों के आतंक से उत्तराखंड के इस शहर में कर्फ्यू | Chamoli | Uttarakhand News

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दोस्तो, पहाड़ों में बाघ-भालू का खौफ तो आपने खूब सुना होगा, लेकिन अब उत्तराखंड में कुत्तों का ऐसा आतंक मचा है कि लोग घरों से निकलने तक में डर रहे हैं! हालात इतने बिगड़े कि 10 स्कूलों को बंद करने का फैसला लेना पड़ा। आखिर ऐसा क्या हुआ कि कुत्तों के आतंक के आगे स्कूलों पर भी लगाना पड़ा ताला? बताउंगा आपको पूरी खबर। अब जरा सोचिए, जिस देवभूमि के पहाड़ों में लोग शेर, बाघ और गुलदार के आतंक से डरा करते थे, आज वहां खूंखार आवारा कुत्तों के डर से प्रशासन को स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं! और हैरानी का बात ये है कि भारत के इतिहास में ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब हिंसक कुत्तों के जानलेवा आतंक के आगे घुटने टेकते हुए उत्तराखंड के चमोली में 10 स्कूलों को अगले 4 दिनों के लिए पूरी तरह ताला लगाना पड़ गया है! दोस्तो एक तरफ हर साल रेबीज की रोकथाम और आवारा कुत्तों के इलाज पर सरकार 100 करोड़ रुपये से ज्यादा पानी की तरह बहा रही है, तो दूसरी तरफ हमारे बच्चे अपने ही गांव की गलियों में कदम रखने से खौफ खा रहे हैं! अब सवाल ये है कि आखिर चमोली में ऐसा क्या हुआ कि वहां ‘डॉग कर्फ्यू’ जैसी नौबत आ गई? और क्यों पूरे देश में आवारा कुत्तों का आतंक एक महामारी का रूप लेता जा रहा है? उत्तराखंड का चमोली जनपद, जहां इन दिनों खूंखार आवारा कुत्तों का एक ऐसा झुंड घूम रहा है जो इंसानों का खून बहाने पर आमादा है। चमोली के नारायणबगड़ क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में इन हिंसक कुत्तों ने 10 से अधिक ग्रामीणों और मासूम बच्चों पर जानलेवा हमला कर उन्हें बुरी तरह लहुलूहान कर दिया है। हालात इस कदर बेकाबू और डरावने हो चुके हैं कि मुख्य शिक्षा अधिकारी को बच्चों की जान बचाने के लिए क्षेत्र के 10 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को अगले 4 दिनों के लिए पूरी तरह बंद करने का ऐतिहासिक और खौफनाक आदेश जारी करना पड़ा है, और दोस्तो आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के इतिहास में ऐसा केवल दूसरी बार हो रहा है जब कुत्तों की वजह से स्कूल बंद करने पड़े हों। इससे पहले ऐसा ही एक डरावना मंजर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के राजौरी में देखने को मिला था, जहां आदमखोर कुत्तों के आतंक के चलते 8 ग्राम पंचायतों के स्कूलों को बंद करना पड़ा था और वहां मासूम बच्चों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए बकायदा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF के जवानों को तैनात करना पड़ा था। आज वही इतिहास उत्तराखंड के चमोली में खुद को दोहरा रहा है, जो यह साबित करता है कि यह समस्या अब सिर्फ नगर निकायों की नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बन चुकी है।

दोस्तो ये तस्वीर खंडवा, मध्य प्रदेश की है जहां आवारा कुत्तों के आतंक के विरोध में अनोखा प्रदर्शन, कुत्ते को देखने उमड़ी अधिकारियो औऱ स्थानीय लोगों की भीड़, शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक के विरोध में कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई में एक व्यक्ति को कुत्ते का कॉस्ट्यूम पहनकर पहुंचा। दुनिया में रेबीज से होने वाली मौ’तों में भारत शीर्ष पर। अब जरा इस सिस्टम की नाकामी के असली और कड़वे आंकड़ों पर नजर भी डालिए। साल 2024 की एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर सिंगल दिन यानी रोजाना डॉग बाइट के 10 हजार से ज्यादा मामले सामने आते हैं, और दोस्तो सबसे बड़ी विडंबना यह है कि भारत सरकार हर साल आवारा कुत्तों की नसबंदी, रेबीज के इलाज और उनकी रोकथाम पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी-भरकम बजट खर्च करती है, लेकिन करोड़ों रुपये का यह बजट आखिर किसकी जेब में जा रहा है? जब बजट 100 करोड़ का है, तो जमीनी धरातल पर चमोली जैसे हालात क्यों पैदा हो रहे हैं? क्यों नसबंदी और एबीसी (Animal Birth Control) प्रोग्राम्स सिर्फ कागजों पर ही दम तोड़ रहे हैं? चमोली के नारायणबगड़ में ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और वन विभाग आवारा कुत्तों के आगे पूरी तरह लाचार नजर आ रहे हैं। ‘एनिमल राइट्स’ और कड़े कानूनों के नाम पर इन हिंसक कुत्तों को न तो वहां से हटाया जा रहा है और न ही कोई ठोस समाधान निकाला जा रहा है। ग्रामीण अब अपने बच्चों को अकेले ट्यूशन या दुकान भेजने से भी कतरा रहे हैं। लोगों का सीधा सवाल है कि क्या प्रशासन तब जागेगा जब ये खूंखार कुत्ते किसी मासूम की जान ले लेंगे? दोस्तो करोड़ों का बजट और कागजी वादों के बीच हमारे बच्चों का श्मशान जैसी दहशत में जीना हमारी व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है। चमोली की यह घटना आंखें खोलने वाली है कि अब आवारा कुत्तों की समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता। सरकार को इन 100 करोड़ के बजट का हिसाब जमीन पर देना होगा। इस खौफनाक खबर पर और प्रशासन के इस फैसले पर आपकी क्या राय है? क्या आवारा कुत्तों के लिए और कड़े कानून बनने चाहिए? कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं।