दोस्तो जिस पुलिस से सुरक्षा और इंसाफ की उम्मीद होती है, उसी पर देहरादून में एक छात्र ने बर्बरता के गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा है कि हेलमेट के चालान को लेकर शुरू हुआ विवाद पुलिस चौकी तक पहुंचा और वीडियो बनाने पर छात्र के साथ मारपीट की गई। छात्रा ने भी पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। आखिर देहरादून की बिधौली चौकी में उस रात क्या हुआ? छात्र की जुबानी पूरी कहानी। दोस्तो उत्तराखंड की ‘मित्र पुलिस’ का एक ऐसा चेहरा सामने आया है जिसे देखकर आप दहल उठेंगे! आरोप है कि देहरादून की बिधौली पुलिस चौकी के भीतर एक छात्र को तब तक बेरहमी से पीटा गया, जब तक कि वो अधमरा नहीं हो गया! और उसका गुनाह सिर्फ इतना था कि उसने पुलिस की बदसलूकी का अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया था! कानून की पढ़ाई कर रहे एक भावी वकील को चौकी के अंदर बंद कर लात-घूसों और लाठियों से तोड़ा गया और साथ में मौजूद छात्रा के साथ भी बदसलूकी की गई! सोशल मीडिया पर इस छात्र की चीखें आज पूरे सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।
दोस्तो पूरी घटना देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र की है। बिहार का रहने वाला अमृतम अंशुमान यहाँ UPES कॉलेज से LLM की पढ़ाई कर रहा है। 17 अगस्त की सुबह जब वह अपनी महिला मित्र के साथ जा रहा था, तो हेलमेट न पहनने को लेकर पुलिस ने उसे रोका। दोस्तो छात्र का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने सीधे गाली-गलौज शुरू कर दी। जब उसने तमीज से बात करने को कहा और सबूत के तौर पर मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन की, तो पुलिस का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। और छात्र का फोन छीनकर वीडियो डिलीट कर दिया गया और चौकी के अंदर ले जाकर 6-7 पुलिसवालों ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उसे गंभीर चोटें आई हैं। एक तरफ जहाँ छात्र इंसाफ के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और डीजीपी तक गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ देहरादून पुलिस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी का कहना है कि छात्र द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी हैं। पुलिस के मुताबिक, ये छात्र सड़क पर हुड़दंग और आपस में मारपीट कर रहे थे और जब पुलिस ने बीच-बचाव किया तो इन्होंने पुलिस से ही अभद्रता की, जिसके बाद इनके खिलाफ बाकायदा मुकदमा दर्ज कर इन्हें कोर्ट में पेश किया गया था।
अब दोस्तो सच क्या है, यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही साफ होगा, लेकिन इस घटना ने देहरादून में पढ़ रहे बाहरी छात्रों की सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है एक बार फिर छात्र और छात्र के साथ मौजूद महिला मित्र ने क्या कहा, क्या चेकिंग के नाम पर किसी छात्र को चौकी के भीतर ले जाकर इस तरह के गंभीर आरोप लगना सही है? क्या पुलिस की इस थ्योरी में आपको सच्चाई नजर आती है? अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बिधौली चौकी में उस रात हुआ क्या था? छात्र और पुलिस—दोनों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, इसलिए सच्चाई निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगी। जरूरी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और अगर कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो। क्योंकि कानून सबके लिए बराबर है। आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। ऐसी ही हर बड़ी और निष्पक्ष खबर के लिए उत्तराखंड न्यूज को फॉलो और सब्सक्राइब करना न भूलें। नमस्कार!