दोस्तो बनभूलपुरा से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां हिंसा केस के मुख्य आरोपी को कोर्ट से जमानत मिल गई है। आखिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से ठीक पहले ही यह जमानत कैसे मिली और क्यों मिली? किस बिनाह पर नैनीताल हाई कोर्ट ने बनभूलपुरा कांड के मुख्य आरोपी की जामानत को स्वीकार लिया, कोर्ट ने क्या कहा कार्यवाही में सरकार के पक्ष से भी कराऊंगा आपको रूबरू अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो दोस्तो बनभूलपुरा केस के मुख्य आरोपी को कोर्ट से जमानत क्या मिली इधर कोर्ट की इस कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले में नई हलचल तेज हो गई है। क्या जमानत मिलने के बाद जांच की दिशा बदलेगी? और क्या इसका असर प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर पड़ेगा? मेरे इस वीडियो में शायद आपको सारे सवालों के जवाब मिलर जाएं, लेकिन सबसा बड़ा सवाल किन आधारों पर आरोपी को राहत मिली। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हल्द्वानी बनभूलपुरा कांड के साजिशकर्ता मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ इस मामले में दर्ज मुकदमों में उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ती आलोक कुमार वर्मा और न्यायमूर्ती आलोक महरा की खण्डपीठ में हुई।
दोस्तो पिछली तारीख को कोर्ट ने सरकार और आरोपी के अधिवक्ता से पूछा था कि इनके खिलाफ जो अन्य सात मुकदमें हैं उनकी वर्तमान स्थिति क्या है? कितने केसों में बरी हो चुके और कितने विचाराधीन हैं? दोस्तो जिस पर राज्य सरकार की तरफ से कोर्ट को हताया गया कि जांच के दौरान इनके खिलाफ इन केसों के अलावा अन्य सात मुकदमे दर्ज होने की पुष्टि हुई है। कई मामलों में ये बरी हो चुके हैं. कुछ का पता अभी नहीं चल सका है। और दोस्तो यहां मुकदमों की कोई पुष्टि न होने के कारण इस दंगे वाले मुकदमे से कोर्ट ने उन्हें जमानत पर रिहा करने को कहा है। यहां आपको बता दूं दोस्तो दंगे में इनके खिलाफ चार मुकदमे दर्ज थे. एक मे उन्हें पहले जमानत मिल चुकी थी। तीन में में आज मिल गयी है। मलिक को राजकीय भूमि को खुर्द बुर्द करने के का आरोप होने के साथ साथ मामले में सरकारी काम में व्यवधान करने के आरोप हैं। दोस्तो मामले के अनुसार मलिक सहित अन्य के खिलाफ बनभूलपुरा दंगे के समय चार मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें से एक मामला ये भी था कि मलिक ने कूटरचित , झूठे शपथपत्र के आधार पर राजकीय भूमि को हड़पने का कार्य किया… यही नहीं दोस्तो मलिक के द्वारा नजूल भूमि पर कब्जा करके प्लॉटिंग, अवैध निर्माण करके उसे बेचा गया। राज्य सरकार की तरफ से उनकी जमानत आर्जी का विरोध करते हुए कहा कि बनभूलपुरा कांड की शुरुआत यही से हुई थी। जब प्रशासन इस अवैध अतिक्रमण को हटाने गया तो उनके ऊपर पथराव किया गया। बाद में इसने दंगा का रूप ले लिया. इसी दंगे में सरकारी, पुलिस व अन्य लोग घायल हो गए। कईयों की जान तक चली गयी।
वहीं दोस्तो दंगे से संबंधित मामलों में मलिक की जमानत नहीं हुई है, इसलिए इनकी जमानत निरस्त की जाये। आरोपियों का कहना है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एफआईआर में उनका नाम नहीं है. पुलिस ने उन्हें जबरन इस मामले में फंसाया है उन्हें जमानत पर रिहा किया जाये। दंगे में शामिल सौ से अधिक लोगो को जमानत पहले ही कोर्ट से मिल चुकी है। दोस्तो यहां आपको ये भी बता दूं कि, नैनीताल के हल्द्वानी बनभूलपुरा थाना क्षेत्र में 8 फरवरी 2024 को सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने गई पुलिस-प्रशासन की टीम पर कुछ लोगों ने हमला बोल दिया था। इस दौरान 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे और पांच लोगों की गोली लगने से मौत भी हो गई थी। साथ ही उपद्रवियों ने बनभूलपुरा थाना परिसर में भी आग लगा दी थी। जिस सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान हिंसा भड़की थी, उसका संचालक अब्दुल मलिक था। अब्दुल मलिक पर सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण करने का आरोप है। बनभूलपुरा हिंसा मामले में मुख्य आरोपी को जमानत मिलने के बाद कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। क्या इस फैसले से मामले की जांच की दिशा बदलेगी? और क्या प्रशासन की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर इसका कोई असर पड़ेगा?सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब बाकी आरोपियों को भी इसी आधार पर राहत मिल सकती है? और क्या इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों तक जांच सही मायनों में पहुंच पाएगी?फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन बनभूलपुरा कांड से जुड़े कई पहलुओं पर अभी भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। ऐसे में अब सबकी नजरें आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।