देवभूमि की 12 साल की ‘गोल्डन गर्ल’! 4 गोल्ड… बिना हार! | Kayara Bhandari | Uttarakhand News

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दोस्तो, उम्र महज 12 साल लेकिन कारनामा ऐसा कि दुनिया दंग रह गई! देवभूमि की इस नन्हीं सनसनी ने एक ही टूर्नामेंट में 4 गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया! U-15 से सीनियर वुमेंस तक। बड़ी-बड़ी खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए बिना एक भी मैच गंवाए बनीं चैंपियन! आखिर कौन है उत्तराखंड की ये ‘वंडर गर्ल’? देखिए पूरी खबर! दोस्तो कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, और जब हौसले पहाड़ों जैसे ऊंचे हों, तो कामयाबी खुद-ब-खुद कदम चूमती है! आज देवभूमि उत्तराखंड की एक 12 साल की बेटी ने खेल की दुनिया में वो कर दिखाया है, जिसे देखकर बड़े-बड़े दिग्गज दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए हैं! हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की ‘वंडर गर्ल’ कायरा भंडारी की! जिसने टेबल टेनिस कोर्ट पर ऐसा चक्रव्यूह रचा कि विरोधी खिलाड़ी बस देखती रह गईं।महज 12 साल की इस नन्हीं खिलाड़ी ने एक ही टूर्नामेंट में एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 4 गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है! अंडर-15 से शुरुआत की और सीनियर महिला वर्ग तक आते-आते टूर्नामेंट में क्लीन स्वीप कर दिया। आज हम आपको रूबरू कराएंगे देवभूमि की इस नई खेल सनसनी से, जिसने अपने आक्रामक अंदाज से पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है! दोस्तो हाथ में टेबल टेनिस का रैकेट, आंखों में तिरंगा फहराने का सपना और रफ्तार ऐसी कि पलक झपकते ही शॉट गायब! यह पहचान है उत्तराखंड की नई टेबल टेनिस स्टार कायरा भंडारी की। पौड़ी गढ़वाल के शहीद राइफलमैन जसवंत सिंह महावीर चक्र स्टेडियम में आयोजित सेकंड उत्तराखंड स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस टूर्नामेंट में इस 12 साल की बच्ची ने वो कारनामा कर दिखाया है, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। कायरा ने इस प्रतियोगिता के चारों मुख्य वर्गों में गोल्ड मेडल जीतकर क्लीन स्वीप कर दिया है।

दोस्तो ज़रा सोचिए, जिस उम्र में बच्चे खेल-खेल में नियम सीख रहे होते हैं, उस उम्र में कायरा अपने से दोगुनी उम्र की खिलाड़ियों को धूल चटा रही थीं। कायरा ने इस रैंकिंग टूर्नामेंट के अंडर-15, अंडर-17, अंडर-19 और सबसे कठिन माने जाने वाले सीनियर महिला वर्ग (Women’s Singles) में स्वर्ण पदक अपने नाम किए। इस पूरे टूर्नामेंट की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात ये रही कि दाएं हाथ से खेलने वाली यह अटैकिंग प्लेयर पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही! यानी कायरा ने अपना एक भी मुकाबला नहीं हारा और विरोधी खिलाड़ियों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। दोस्तो लेकिन कामयाबी की यह गूंज रातों-रात नहीं आई है। इसके पीछे छिपी है सालों की कड़ी तपस्या। कायरा का यह सफर साल 2021 में कोविड लॉकडाउन के दौरान शुरू हुआ था। शुरुआत में वो लॉन टेनिस खेलती थीं, लेकिन फिर अपने पिता की सलाह पर उन्होंने हाथ में टेबल टेनिस का रैकेट थाम लिया। इसके बाद तो मानो इस खेल से उनका नाता हमेशा के लिए जुड़ गया। रोजाना घंटों तक टेबल पर पसीना बहाना, अपनी तकनीक को सुधारना और हार न मानने की जिद ने आज कायरा को इस मुकाम पर पहुंचा दिया है कि भारतीय टेबल टेनिस टीम के कोच पराग अग्रवाल भी उनकी तारीफ करते नहीं थकते। कोच का मानना है कि कायरा में वो ‘एक्स-फैक्टर’ है, जो उन्हें आने वाले समय में देश का बड़ा स्टार बनाएगा। दोस्तो चार गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी कायरा के पैर जमीन पर हैं और उनकी निगाहें अब देश के सबसे बड़े लक्ष्य पर टिकी हैं। कायरा का सपना है कि वो अगले दो साल के भीतर भारत की नेशनल टीम में जगह बनाएं और दुनिया भर में तिरंगा फहराएं। वो पहले भी नेशनल लेवल पर रिकॉर्ड 5 अलग-अलग इवेंट्स में क्वालीफाई कर उत्तराखंड का मान बढ़ा चुकी हैं। जिस रफ्तार और पैशन के साथ ये 12 साल की वंडर गर्ल आगे बढ़ रही है, उसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि वो दिन दूर नहीं जब ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी कायरा भारत के लिए मेडल जीतती नजर आएंगी। दोस्तो कायरा भंडारी की यह जीत सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह देवभूमि की उन तमाम बेटियों के सपनों की उड़ान है जो कुछ अलग करना चाहती हैं। अपनी मेहनत, लगन और माता-पिता के भरोसे के दम पर कायरा ने साबित कर दिया है कि अगर जिद पक्की हो, तो इतिहास बनते देर नहीं लगती। पूरा उत्तराखंड और देश आज अपनी इस लाडली की कामयाबी पर गर्व कर रहा है। हम भी कायरा को उनकी इस ऐतिहासिक जीत के लिए ढेरों बधाइयां देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वो जल्द ही इंडिया की जर्सी में देश का नाम रोशन करेंगी।आपको कायरा की यह शानदार परफॉर्मेंस कैसी लगी, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर बेटी को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले।