उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र मुनस्यारी में पर्यावरण और पक्षी प्रेमियों के लिए एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। मुनस्यारी के पातलथौड़ क्षेत्र में समुद्र तल से लगभग 2650 मीटर की ऊंचाई पर एक अति दुर्लभ और गंभीर रूप से संकटग्रस्त पक्षी ‘लाल सिर वाला गिद्ध’ देखा गया है. ‘मोनाल संस्था’ के सदस्यों—सुरेंद्र पंवार, प्रकाश राणा और कविंद्र पंवार—ने बर्ड वाचिंग के दौरान इस दुर्लभ मेहमान को कैमरे और वीडियो में कैद करने में सफलता हासिल की. विशेषज्ञों के अनुसार, पिथौरागढ़ के निचले इलाकों में इसके रिकॉर्ड पहले जरूर मिले हैं, लेकिन इतनी अधिक ऊंचाई पर इस प्रजाति का प्रामाणिक फोटो और वीडियो साक्ष्य पहली बार दर्ज किया गया है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
वैज्ञानिक भाषा में सार्कोजिप्स कालवस के नाम से जाने जाने वाले इस गिद्ध को आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखा गया है. पिछले कुछ दशकों में पशुओं के इलाज में दी जाने वाली प्रतिबंधित दवा ‘डाइक्लोफेनाक’ के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में इनकी आबादी में भारी गिरावट आई थी। ऐसे में मुनस्यारी के घने जंगलों में इस लाल सिर वाले गिद्ध की मौजूदगी यह प्रमाणित करती है कि यहां का पर्वतीय भूभाग और पारिस्थितिकी तंत्र आज भी इन दुर्लभ पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल प्राकृतिक आवास बना हुआ है। मुनस्यारी में हुई इस दुर्लभ Sightings से क्षेत्र में बर्ड वाचिंग और नेचर टूरिज्म (प्रकृति पर्यटन) को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।