दोस्तो, हल्द्वानी में सोशल मीडिया पर व्यूज और लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश अब बड़े विवाद की वजह बन गई है! मां काली के स्वरूप में व्लॉगिंग को लेकर इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप लगे हैं। मामला इतना बढ़ा कि करणी सेना ने हल्द्वानी कोतवाली पहुंचकर प्रदर्शन किया और BNS व आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई। लेकिन सवाल है—क्या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता की होड़ में धार्मिक आस्था की मर्यादा का ध्यान नहीं रखा जा रहा? आखिर इस पूरे मामले में पुलिस क्या कार्रवाई करेगी? विवाद की वजह क्या है और प्रदर्शनकारियों की प्रशासन से क्या मांग है? देखिए पूरी रिपोर्ट! तो दोस्तो क्या सोशल मीडिया के इस डिजिटल युग में चंद लाइक्स और डॉलर्स कमाने की भूख इतनी अंधी हो चुकी है कि लोग हमारी आस्था और सनातन संस्कृति की मर्यादाओं को पैरों तले रौंदने लगे हैं? उत्तराखंड के हल्द्वानी की सड़कों पर जो हुआ, उसने करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत कर दिया है! अपने यूट्यूब व्लॉग के लिए व्यूज बटोरने के चक्कर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नीतू बिष्ट ने मां काली का रूप तो धारण कर लिया, लेकिन जिस अमर्यादित और विकृत ढंग से उन्होंने इसे सार्वजनिक रास्तों पर पेश किया, उसने पूरे उत्तराखंड में बवाल खड़ा कर दिया है! करणी सेना की महिला जिला अध्यक्ष योगिता बनोला के नेतृत्व में आक्रोशित महिलाओं और हिंदूवादी संगठनों ने हल्द्वानी कोतवाली को घेरकर जमकर नारेबाजी की है! आज इस आक्रामक रिपोर्ट में हम पूछेंगे वो सीधा सवाल— क्या पब्लिसिटी स्टंट के नाम पर हमारे आराध्यों का अपमान अब एक फैशन बन चुका है?
दोस्तो एक शिकायत के मुताबिक, नीतू बिष्ट ने अपने नए वीडियो/रील के लिए मां काली का वेष धारण किया। लेकिन श्रद्धा दिखाने के बजाय, उन्होंने इस पवित्र और रौद्र स्वरूप का इस्तेमाल महज एक पब्लिसिटी स्टंट के रूप में किया। आरोप है कि वह इस बेहद संवेदनशील और पूजनीय स्वरूप को धारण कर हल्द्वानी के सार्वजनिक स्थानों और व्यस्त सड़कों पर घूमती और व्लॉगिंग करती नजर आईं। दोस्तो इधर करणी सेना का सीधा आरोप है कि इस तरह के गंभीर धार्मिक स्वरूप को बिना किसी गरिमा के सड़कों पर तमाशा बनाकर पेश करने से वहां मौजूद आम जनता और खासकर छोटे बच्चों में डर और खौफ का माहौल पैदा हो गया! बच्चे सहम गए कि आखिर यह सड़कों पर क्या तमाशा चल रहा है। क्या इन तथाकथित डिजिटल स्टार्स को यह नहीं पता कि सनातन धर्म में मां काली की पूजा कितनी निष्ठा और शुद्धता के साथ की जाती है? क्या कैमरों के सामने थिरकने के लिए अब धर्म को भी तमाशा बना दिया जाएगा? इस वीडियो के इंटरनेट पर अपलोड होते ही हिंदू संगठनों का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फट पड़ा। देखते ही देखते करणी सेना की दर्जनों महिला कार्यकर्ता हल्द्वानी कोतवाली पहुंच गईं। उन्होंने कोतवाली परिसर में खड़े होकर पुलिस प्रशासन के सामने तीखा विरोध दर्ज कराया और इन्फ्लुएंसर के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। दोस्तो महिला विंग की अध्यक्ष योगिता बनोला ने पुलिस को लिखित शिकायती पत्र सौंपते हुए मांग की है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट (IT Act) की गंभीर धाराओं के तहत नीतू बिष्ट पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए। करणी सेना ने दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है कि यदि पुलिस ने इस डिजिटल तमाशे पर तुरंत एक्शन नहीं लिया और आरोपी को सलाखों के पीछे नहीं भेजा, तो समस्त हिंदू समाज और करणी सेना सड़कों पर उतरकर उग्र और ऐतिहासिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
दोस्तो यह मामला सिर्फ एक रील या एक व्लॉग तक सीमित नहीं है। यह उस बीमार मानसिकता का नतीजा है, जहां रील बनाने वाले किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। कभी केदारनाथ के गर्भगृह में नोट उड़ाए जाते हैं, कभी गंगा नदी के पवित्र जल में रील बनाकर हुड़दंग किया जाता है, और अब हल्द्वानी के बीच बाजार में मां काली के पवित्र स्वरूप का यह अमर्यादित मजाक! दोस्तो सवाल यह है कि डिजिटल दुनिया के इन स्वयंभू कलाकारों पर कानून का डंडा कब चलेगा? क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है, या फिर लाखों फॉलोअर्स वाले इन इन्फ्लुएंसर्स को धर्म और समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का खुला लाइसेंस मिला हुआ है? पुलिस ने शिकायत लेकर जांच तो शुरू कर दी है, लेकिन जनता को अब केवल जांच नहीं, बल्कि एक ऐसा सख्त उदाहरण चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी देवी-देवताओं के नाम पर व्यूज बटोरने की जुर्रत न कर सके। दोस्तो आस्था कोई खिलौना नहीं है जिसे कैमरों के फ्रेम में फिट करके बेचा जा सके। देवभूमि उत्तराखंड की जनता अपनी संस्कृति और अपने देवी-देवताओं के प्रति बेहद संवेदनशील है, और ऐसे में इस तरह का कोई भी अमर्यादित कृत्य बर्दाश्त से बाहर है। अब देखना यह है कि हल्द्वानी पुलिस इस शिकायत पर कितनी तेजी से एक्शन लेती है और क्या नीतू बिष्ट को इस धार्मिक अपमान की कानूनी सजा भुगतनी पड़ती है! सोशल मीडिया पर व्यूज के इस गंदे खेल पर आपकी क्या राय है?