उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ और प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा की आपत्तिजनक चिट्ठी के बाद सियासी हलचल बेहद तेज हो गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की स्पष्ट हिदायत के बावजूद हरीश रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी इस यात्रा की शुरुआत कर दी है, जिसे पार्टी संगठन के भीतर एक ‘समानांतर कार्यक्रम’ और सीधे तौर पर अनुशासनहीनता के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने रावत को पत्र भेजकर इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई कि यात्रा को लेकर न तो उनसे और न ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष से कोई चर्चा की गई थी। सैलजा ने आगामी विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए रावत को इस यात्रा को तुरंत रोकने की हिदायत दी थी, लेकिन हरीश रावत ने आलाकमान के निर्देशों को दरकिनार करते हुए वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह और कई विधायकों के समर्थन के साथ अपना काफिला आगे बढ़ा दिया।
इस बढ़ते आंतरिक विवाद को थामने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने अब हरीश रावत को दिल्ली तलब किया है, जहां 7 या 8 अक्टूबर को प्रभारी कुमारी सैलजा के साथ उनकी अहम बैठक तय की गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कांग्रेस के साथ उनका 60 साल का पुराना रिश्ता है और पार्टी ने आज तक उनसे कभी स्पष्टीकरण नहीं मांगा है, इसलिए इस बार दिल्ली में अपनी बात रखने को लेकर उनके भीतर एक अलग रोमांच है। हालांकि उन्होंने इसे ‘तलब’ किए जाने के बजाय खुद समय मांगने की बात कही है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच मची यह खींचतान और गुटबाजी एक बार फिर सड़क पर आ गई है जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।