दोस्तो पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी भले ही पहाड़ के काम न आ रही हो, लेकिन अब पहाड़ का गुस्सा कलेक्ट्रेट की दीवारों को हिलाने सड़क पर उतर चुका है! जरा देखिए उत्तरकाशी की इन तस्वीरों को, जहां यमुनोत्री के निर्दलीय विधायक संजय डोभाल ने हजारों की भारी भीड़ के साथ सीधे जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर दिया और हाजारों की भीड़ ने अपनी सरकार से सवाल कर दिया। कैसे और क्यों हुआ ये हंगामा, बताउंगा आपको पूरी खबर। दोस्तो सुनिए इस सिंहनाद को, क्योंकि सिस्टम और उसको चलाने वालों को अल्टीमेटम मिल चुका है कि अगर हक नहीं मिला, तो यह कलेक्ट्रेट ही अब आंदोलन का मुख्य कुरुक्षेत्र बनेगा! ये गुस्सा सिर्फ एक विधायक का नहीं, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों का है जो आजादी के दशकों बाद भी सड़क, शिक्षा और इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। आरोप बेहद संगीन हैं—सरकार और प्रशासन मिलकर जिला योजना के बजट में यमुनोत्री की उपेक्षा कर रहे है, मै आपको एक वो बयान दिखाने जा रहा हूं जो यमुनोत्री का पावन धरा को सुलगाए हुए है, थोड़ा गौर कीजिएगा। दोस्तो कहने के लिए तो ये कहा जाता है कि उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार है और विकास के बड़े-बड़े दावे किसी से छिपे नहीं हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज उत्तरकाशी की सड़कों पर तैरती नजर आई। दोस्तो यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के साथ हो रहे कथित सौतेले व्यवहार और विकास कार्यों की घोर उपेक्षा के खिलाफ यमुनोत्री के निर्दलीय विधायक संजय डोभाल का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। जिला मुख्यालय उत्तरकाशी का कलेक्ट्रेट परिसर अचानक एक राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया, जब विधायक डोभाल अपने पीछे हजारों समर्थकों, महिलाओं और युवाओं का हुजूम लेकर सीधे जिलाधिकारी (DM) कार्यालय को घेरने पहुंच गए। सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ लगे गगनभेदी नारों ने पूरे प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फुला दिए।
दोस्तो इस उग्र प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल ने सीधे तौर पर जिला योजना और प्रशासनिक नीतियों को कटघरे में खड़ा किया है। विधायक जी का गुस्सा सातवें आसमान पर है और उनकी मांगें बेहद बुनियादी हैं। दोस्तो यहां सड़क से दहाड़ते हुए विधायक संजय डोभाल ने प्रशासन को दो टूक लहजे में चेतावनी दी, जिला योजना के बजट में यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। हमारे क्षेत्र के सुदूर और सीमांत गांवों में आज भी सड़क नहीं है, स्कूल बिना शिक्षकों के चल रहे हैं और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है। हमारे महत्वपूर्ण प्रस्ताव फाइलों में धूल फांक रहे हैं। साथ ही कह दिया कि मैं साफ कर देना चाहता हूं कि यमुनोत्री की स्वाभिमानी जनता के साथ विकास के मामले में यह भेदभाव किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आक्रोशित महिला दोस्तो इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत वो ग्रामीण महिलाएं और युवा हैं, जो अपने बच्चों के भविष्य और अपने बुजुर्गों के इलाज की खातिर मीलों पैदल चलकर उत्तरकाशी पहुंचे। दोस्तो निर्दलीय विधायक संजय डोभाल के इस आक्रामक रुख ने राज्य सरकार के सामने एक बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ जहां सरकार हर क्षेत्र के समान विकास का ढिंढोरा पीटती है, वहीं एक जनप्रतिनिधि का अपने हजारों वोटरों के साथ इस तरह कलेक्ट्रेट को बंधक बना लेना यह साबित करता है कि नौकरशाही और जमीनी हकीकत के बीच की खाई बहुत गहरी हो चुकी है।अल्टीमेटम साफ है—या तो यमुनोत्री को उसका वाजिब हक और बजट तुरंत दिया जाए, या फिर शासन-प्रशासन सरकार के खिलाफ एक बहुत बड़े जन-आंदोलन का सामना करने के लिए तैयार रहे। अब देखना यह होगा कि इस घेराव के बाद देहरादून में बैठे आकाओं की नींद टूटती है या फिर पहाड़ की यह चिंगारी पूरी देवभूमि की सियासत को सुलगाने का काम करेगी।