दोस्तो भारत माता की जय और वंदे मातरम बोलने में जिनके हलक सूखते थे, वो सुन लो! तुम्हारी देशविरोधी हेकड़ी को कुचलने का कानूनी इंतज़ाम हो चुका है। अब तक ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का चोगा ओढ़कर जो लोग राष्ट्रगीत का मखौल उड़ाते थे, पैर पटकते थे, या खड़े होने तक से परहेज़ करते थे, उन्हें ये समझ लेना चाहिए कि अब नया हिंदुस्तान उनके इस गद्दार रवैये को बर्दाश्त नहीं करेगा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उस ऐतिहासिक बिल पर मुहर लगा दी है, जो राष्ट्रगीत के गुनहगारों को सीधे जेल की सलाखों के पीछे सड़ाने का माद्दा रखता है! दोस्तो आज बात उस कड़े प्रहार की, जिसकी ज़रूरत इस देश को दशकों से थी. आजादी के अमृतकाल के बाद साल 2026 में भारत ने अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा कदम उठा लिया है.’राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026′ अब कानून बन चुका है। यह सिर्फ एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो इस मिट्टी का खाते हैं, इसी हवा में सांस लेते हैं, लेकिन जब ‘वंदे मातरम’ गूंजता है, तो उनके सीने पर सांप लोटने लगता है! दोस्तो अब तक हमारे देश में ‘जन गण मन’ यानी राष्ट्रगान के अपमान पर तो सख्त सजा का प्रावधान था, लेकिन ‘वंदे मातरम’ को लेकर कुछ कानूनी खामियां थीं, जिसका फायदा उठाकर तथाकथित ‘लिबरल और बुद्धिजीवी’ इसका अपमान करने से बाज नहीं आते थे। कभी किसी असेंबली में इसके गायन का बहिष्कार किया जाता था, तो कभी सार्वजनिक मंचों पर इसके बजने के दौरान अभद्रता की जाती थी, लेकिन अब खेल खत्म! इस नए कानून के तहत:गैर-जमानती अपराध: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का किसी भी प्रकार से किया गया अपमान अब एक गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध की श्रेणी में आएगा।
तो दोस्तो सुना आपने वंदे मातरम् हमारा वह गौरवशाली गीत है, जिसे हर भारतीय को गर्व के साथ गाना चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में स्पष्ट नियम तय कर दिए गए हैं, जिसके तहत अब इस राष्ट्रीय प्रतीक के अपमान को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। इसे कुछ ऐसा समझिए। गैर-जमानती अपराध: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का किसी भी प्रकार से किया गया अपमान अब एक गैर-जमानती (Non-Bailable) अपराध की श्रेणी में आएगा। कठोर कारावास: अपमान करने वाले को सीधे 3 से 5 साल तक की कठोर जेल की सजा काटनी होगी। भारी जुर्माना: जेल के साथ-साथ भारी-भरकम आर्थिक दंड का भी प्रावधान किया गया है, ताकि जेब और अकड़ दोनों ढीली हो सके। सार्वजनिक पाबंदी: दोषी पाए जाने पर चुनाव लड़ने या किसी भी सरकारी पद पर बैठने की योग्यता हमेशा के लिए खत्म हो सकती है। दोस्तो इस कानून के लागू होते ही देशभक्तों में जहां उत्साह है, वहीं देशद्रोहियों के खेमे में सन्नाटा पसरा है। देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले का सिंहनाद करते हुए स्वागत किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है। “राष्ट्र का गौरव सर्वोपरि है। जो तत्व देश की आन-बान-शान का सम्मान नहीं कर सकते, उन्हें इस देश में रहने का भी कोई हक नहीं है। वंदे मातरम हमारी चेतना का प्रतीक है और इसका अपमान करने वालों पर अब कानून का हंटर काल बनकर बरसेगा! वैसे दोस्तो ये उन मजहबी कट्टरपंथियों और टुकड़े-टुकड़े गैंग के आकाओं के लिए अंतिम चेतावनी है, जो वंदे मातरम को किसी खास धर्म से जोड़कर देश को बांटने की राजनीति करते थे। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकला ये मंत्र देश की आजादी का उद्घोष था, जिसके लिए हजारों क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। उनके इस बलिदान का उपहास उड़ाने की छूट अब किसी को नहीं मिलेगी.साफ संदेश दे दिया गया है—अगर भारत में रहना है, तो भारत के प्रतीकों का सजदा करना होगा। राष्ट्रगीत का सम्मान आपकी मर्जी नहीं, बल्कि आपका बुनियादी कर्तव्य है. और अगर इस कर्तव्य से चूके, तो कानून की सलाखें आपका स्वागत करने के लिए चौबीसों घंटे तैयार खड़ी हैं!