क्या पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि अब मरीजों को इलाज नहीं, सिर्फ परेशानी मिल रही है?और आखिर कब तक नौगांव CHC की बदहाल व्यवस्था पर लोग इसी तरह सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर करते रहेंगे?क्या प्रशासन को जनता की ये आवाज सुनाई नहीं दे रही, या फिर सुनकर भी अनसुना किया जा रहा है?ढोल-दमाऊं के साथ जब ग्रामीण सड़क पर उतरते हैं, तो यह सिर्फ प्रदर्शन नहीं बल्कि सिस्टम पर एक बड़ा सवाल बन जाता है।आखिर कब सुधरेगी नौगांव CHC की स्वास्थ्य व्यवस्था? और कौन लेगा इस बदहाली की जिम्मेदारी?इन्हीं सवालों के साथ देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट। जी हां दोस्तो एक बार फिर बज रहे हैं ढोल-दमाउं और ढोल दमाउं की धुन पर नारे गूंजने लगे हैं। चारधाम यात्रा के प्रथम पड़ाव पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर क्षेत्रवासियों का गुस्सा फूट पड़ा. काफी संख्या में स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में एकत्र होकर सरकार और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। साथ ही एक सुर में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि लंबे समय से अस्पताल में चिकित्सकों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, आवश्यक उपकरणों और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है.स्वास्थ्य व्यवस्थाएं न सुधरने पर फूटा गुस्सा: कई बार शिकायतों और मांगों के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है, जिससे क्षेत्र की जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि चारधाम यात्रा मार्ग पर स्थित यह अस्पताल यात्रियों और स्थानीय नागरिकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं अपेक्षित स्तर से काफी नीचे हैं।
ढोल नगाड़ों के साथ निकाली रैली: वहीं, आंदोलन के दौरान लोगों ने यमुनोत्री हाईवे से अस्पताल परिसर तक ढोल नगाड़ों के साथ रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अस्पताल परिसर में धरना दिया। इस दौरान वक्ताओं ने जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को अस्पताल की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार ठहराया। व्यवस्थाएं न सुधरने पर व्यापक जन आंदोलन की चेतावनी: प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यह आंदोलन की केवल शुरुआत है। यदि जल्द ही अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता समेत अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्रवासी व्यापक जन आंदोलन छेड़ने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य केंद्र में तालाबंदी कर उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। आंदोलन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस दौरान अस्पताल परिसर में काफी देर तक नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन जारी रहा. क्षेत्रवासियों ने सरकार से जनहित को देखते हुए जल्द से जल्द स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने की मांग की है, तो सवाल साफ है। क्या चारधाम यात्रा के पहले पड़ाव पर स्थित नौगांव CHC की बदहाली को अब भी गंभीरता से लिया जाएगा या फिर यह प्रदर्शन भी सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह जाएगा?आखिर कब तक स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस तरह बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के सहारे अपनी जान जोखिम में डालते रहेंगे?क्या डॉक्टरों की कमी, उपकरणों का अभाव और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी इसी तरह जारी रहेगी?और सबसे बड़ा सवाल—जब जनता ढोल-नगाड़ों के साथ सड़कों पर उतरने को मजबूर हो, तब क्या इसे चेतावनी नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी माना जाएगा?प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दे दी है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा, यहां तक कि तालाबंदी भी की जाएगी।अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस जनआक्रोश को गंभीरता से लेता है या फिर हालात और बिगड़ने का इंतजार किया जाएगा।