क्या सचमुच देवभूमि उत्तराखंड अपनी पहचान खो रही है?क्या हालात इतने बदल गए हैं कि अब उत्तराखंड को बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है? और आखिर क्यों एक पूर्व मुख्यमंत्री को कहना पड़ा कि ‘देवभूमि अब देवभूमि नहीं रही’? बताउंगा आपको पूरी खबर और वो बयान भी जो जमकर वायरल हो रहा है। दोस्तो पूर्व मुख्यमंत्री के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, उन्होंने उत्तराखंड के मौजूदा हालात के लिए शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सियासी गलियारों से लेकर आम जनता तक चर्चा तेज हो गई है। आखिर इस बयान के पीछे क्या वजह है और क्यों मचा है इतना बवाल। दोस्तो मै सबसे सबसे आपको उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का वो बयान थोड़ा देख लीजिए। दोस्तो ये बयान इतना भर नहीं है, क्या यहां इशारा बड़ा है। दोस्तो ऐसा लगा कि उत्तराखंड में घटती हर एक घटना ने उत्तराखंड को ही सवालों के घेरे में ला दिया। अभी तो बाहर वाले कहते थे दिखाई देते थे कि देवभूमि अब देवभूमि नहीं रही लेकिन अब जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने चिंता जताई तो ये लगा कि मसला गंभीर है। गंभीर मतलब समाजिक तौर पर भी और सियासी तौर पर भी आखिर क्यों तीरथ सिंह रावत ये कहने की जरुरत पड़ी या फिर ये वाकई चिंतन का विषय है कि 25 साल का उत्तराखंड ये ही तय करने में उलझा है कि दशा क्यो हो दिशा क्या हो लेकिन दोस्तो उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज बड़ा दुर्भाग्य है कि देवभूमि अब देवभूमि नहीं रह गई।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा तेज हो गई है। दोस्तो तीरथ सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बने 25 वर्ष होने जा रहे हैं, लेकिन आज भी राज्य की दशा और दिशा पर चिंतन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अलग राज्य आंदोलन का उद्देश्य एक ऐसे उत्तराखंड का निर्माण था जो अपनी संस्कृति, मूल्यों और पहचान के लिए जाना जाए।
उम्मीद थी कि भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी, विकास के नए मानक स्थापित होंगे और देवभूमि की गरिमा बनी रहेगी, लेकिन आज हालात चिंता पैदा करने वाले हैं। दोस्तो पूर्व मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था और सामाजिक परिवेश को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कभी देहरादून अपनी शांति, स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित माहौल के लिए देशभर में प्रसिद्ध था, लेकिन अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि आज सुबह घर से निकलते समय भी यह भरोसा नहीं रहता कि सुरक्षित वापस लौट पाएंगे या नही। तीरथ सिंह रावत ने प्रदेश में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं और किशोरों में ड्रग्स की बढ़ती लत समाज के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि कई परिवार इस समस्या से जूझ रहे हैं और माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। दोस्तो चौकाने वाली बात ये है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने इसके लिए केवल शासन और प्रशासन को ही नहीं, बल्कि समाज और जनता को भी जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि प्रदेश के वर्तमान हालातों के लिए सरकार, प्रशासन और आम नागरिक सभी को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज समय रहते नहीं चेता तो आने वाली पीढ़ियों के सामने और भी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। दस्तो तीरथ सिंह रावत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। इससे पहले भी वह भ्रष्टाचार और शासन व्यवस्था को लेकर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। उनके ताजा बयान के बाद जहां सत्ता पक्ष असहज नजर आ रहा है, वहीं विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया है। अब देखना यह होगा कि पूर्व मुख्यमंत्री के इस बयान का राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है, लेकिन इतना तय है कि “देवभूमि अब देवभूमि नहीं रही” जैसी टिप्पणी ने उत्तराखंड की मौजूदा स्थिति और भविष्य को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।