उत्तराखंड में मौसम का कहर! । Uttarakhand Weather । Joshimath Haridwar । Uttarakhand News

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दोस्तो अक्टूबर में मौसम का ऐसा कहर कि पहाड़ से मैदान तक हड़कंप! चमोली के जोशीमठ में उफनते नाले का पानी और मलबा घरों में घुसा, तो हरिद्वार में ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। कहीं मकानों को नुकसान, तो कहीं खेतों में खड़ी फसलों पर संकट! आखिर अक्टूबर में मौसम ने अचानक ऐसी करवट क्यों ली? क्या चारधाम यात्रा पर भी इसका असर पड़ा है और प्रभावित लोगों को राहत कब मिलेगी? देखिए, उत्तराखंड में बेमौसम आफत की पूरी तस्वीर। दोस्तो तो क्या देवभूमि उत्तराखंड में एक बार फिर कुदरत ने रौद्र रूप धारण कर लिया है? अक्टूबर के इस महीने में जब मौसम को शांत होना चाहिए था, तब अचानक हुई इस मूसलाधार बारिश और भयंकर ओलावृष्टि ने पूरे सूबे को घुटनों पर ला दिया है! दोस्तो बेमौसम तबाही की, जिसने पहाड़ से लेकर मैदान तक एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है! चमोली के जोशीमठ में औली की तरफ से आने वाला एक पहाड़ी नाला ऐसा उफला कि इंसानी बस्तियों को लीलने पर आमादा हो गया। घरों के अंदर पानी नहीं, बल्कि भारी मलबा और बोल्डर घुस चुके हैं। वहीं दूसरी तरफ, धर्मनगरी हरिद्वार में आसमां से आफत बनकर गिरे बड़े-बड़े ओलों ने किसानों की सालभर की खून-पसीने की कमाई को पल भर में मिट्टी में मिला दिया है! दोस्तो उत्तराखंड के कई जिलों में अचानक मौसम ने करवट बदली और शुरू हुआ तबाही का वो दौर, जिसने हर किसी की रूह कंपा दी। सबसे खौफनाक मंजर देखने को मिला चमोली जिले के संवेदनशील इलाके जोशीमठ में। यहाँ के नोग मोहल्ले में मूसलाधार बारिश के बाद औली की तरफ से आने वाला एक नाला अचानक उफान पर आ गया। पानी का वेग इतना भयानक था कि नाला अपनी सीमाएं तोड़कर रिहायशी इलाकों की तरफ मुड़ गया। देखते ही देखते स्थानीय लोगों के घरों में भारी मात्रा में पानी और पहाड़ों का मलबा घुस गया। जोशीमठ जो पहले से ही भू-धंसाव के गंभीर संकट से जूझ रहा है, वहाँ नालों का इस तरह फटना और घरों की नींव में पानी घुसना एक नए और बड़े खतरे को दावत दे रहा है। दोस्तो पहाड़ अगर मलबे से कराह रहा है, तो मैदान ओलों की मार से लहूलुहान है। हरिद्वार अचानक दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया और तेज आंधी-तूफान के साथ ऐसी भयंकर ओलावृष्टि हुई कि लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते धर्मनगरी की सड़कें और किसानों के लहलहाते खेत बर्फ की सफेद चादर से ढक गए। आसमान से गिरे इन बम जैसे ओलों ने सड़कों पर खड़ी गाड़ियों के शीशे चकनाचूर कर दिए और घरों की छतों को भी भारी नुकसान पहुंचाया। इस बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने सबसे तगड़ा जख्म हमारे देश के अन्नदाता को दिया है। हरिद्वार और आसपास के मैदानी इलाकों में धान और गन्ने की फसलें पूरी तरह तैयार खड़ी थीं, कुछ जगहों पर कटाई का काम चल रहा था। लेकिन कुदरत के इस क्रूर प्रहार ने पकी-पकाई फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। खेतों में बिछी बर्फ की चादर को देखकर किसानों की आंखों में सिर्फ आंसू हैं। सालभर की मेहनत और बैंकों से लिया गया कर्ज अब इन बर्बाद फसलों के साथ मिट्टी में मिल चुका है। किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने तुरंत मुआवजा नहीं दिया, तो उनके सामने भुखमरी की नौबत आ जाएगी। दोस्तो इस महा-संकट का सीधा असर उत्तराखंड की लाइफलाइन यानी चारधाम यात्रा पर पड़ा है। मंदाकिनी और अलकनंदा नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर और रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और जोशीमठ क्षेत्रों में हुए भारी भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ और केदारनाथ हाईवे कई स्थानों पर पूरी तरह ठप हो गए हैं। सैकड़ों श्रद्धालु जगह-जगह फंसे हुए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर अस्थायी रोक लगा दी है और यात्रियों को हरिद्वार व ऋषिकेश जैसे सुरक्षित पड़ावों पर रोक दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन विभाग और एसडीआरएफ को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। दोस्तो जोशीमठ में मलबे में डूबे घर और हरिद्वार के खेतों में बिछी सफेद बर्फ की चादर यह चीख-चीख कर कह रही है कि ग्लोबल वार्मिंग और मौसम का यह बदलता मिजाज अब देवभूमि के लिए काल बनता जा रहा है। सरकार और प्रशासन को युद्धस्तर पर जोशीमठ के प्रभावित परिवारों की मदद करनी होगी और हरिद्वार के पीड़ित किसानों के लिए तुरंत विशेष आर्थिक पैकेज का ऐलान करना होगा, ताकि इस बेमौसम आफत से टूटी उनकी कमर को थोड़ा सहारा मिल सके। अगर आप भी इस समय उत्तराखंड की यात्रा पर आ रहे हैं, तो मौसम साफ होने तक अपनी यात्रा को तुरंत टाल दें और सुरक्षित रहें। इस प्राकृतिक आपदा पर आपकी क्या राय है और आपके इलाके में मौसम का क्या हाल है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।